{"_id":"68305b2b0f92356ce4086631","slug":"government-approves-14028-electric-buses-under-pm-edrive-scheme-in-two-years-2025-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Electric Buses: PM e-Drive योजना के तहत 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की होगी तैनाती, 10,900 करोड़ रुपये का बजट मंजूर","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Electric Buses: PM e-Drive योजना के तहत 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की होगी तैनाती, 10,900 करोड़ रुपये का बजट मंजूर
Fri, 23 May 2025 04:58 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 23 May 2025 04:58 PM IST
सार
PM e-Drive: भारत सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देशभर में 14,028 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करने का ऐलान किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 10,900 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है, जिससे शहरी परिवहन को हरित और स्मार्ट बनाया जाएगा।
विज्ञापन
14,028 इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति को मिली मंजूरी
- फोटो : GreenCell Mobility
विस्तार
शहरी सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण मुक्त और टिकाऊ बनाने की दिशा में भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएम ई-ड्राइव (PM e-Drive) योजना के तहत देशभर में कुल 14,028 इलेक्ट्रिक बसों की आपूर्ति की घोषणा की है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित और समावेशी शहरी परिवहन के विजन को साकार करने की दिशा में एक मजबूत पहल है।
गुरुवार को केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में खास तौर पर तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
प्रमुख शहरों को मिलेंगी इतनी बसें
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बेंगलुरु को लगभग 4,500, हैदराबाद को 2,000, दिल्ली को 2,800, अहमदाबाद को 1,000 और सूरत को 600 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। कुमारस्वामी ने कहा, "हम केवल इलेक्ट्रिक बसें आवंटित नहीं कर रहे, बल्कि भारत के परिवहन तंत्र का भविष्य गढ़ रहे हैं—नवाचार और पर्यावरण जागरूकता के साथ।"
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: लॉन्च हुई किआ कैरेंस क्लैविस एमपीवी, ADAS और 6 एयरबैग जैसे तगड़े फीचर्स से लैस
उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय से पीएम ई-ड्राइव योजना को सफल बनाया जाएगा।
दो साल में लागू होगी योजना
यह योजना अप्रैल 2024 से मार्च 2026 तक की दो साल की अवधि में लागू की जाएगी। इसके लिए कुल ₹10,900 करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था की गई है। सरकार का दावा है कि यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन विद्युतीकरण योजनाओं में से एक होगी। इस योजना में केवल बसें ही नहीं, बल्कि ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रक को भी शामिल किया गया है। प्रत्येक के लिए ₹500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
यह भी पढ़ें: ई-वाहन चलाने वालों के लिए खुशखबरी! अब चार्जिंग के लिए भाग-दौड़ होगी खत्म, जान लीजिए सरकार का प्लान
सरकार का कहना है कि ई-एंबुलेंस के जरिए मरीजों को आरामदायक और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। वहीं, ई-ट्रक से प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकेगी। ई-ट्रक पर सब्सिडी पाने के लिए वाहन स्क्रैपिंग प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है, जो कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे (MoRTH) द्वारा मान्यता प्राप्त रजिस्ट्रड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) से प्राप्त होना चाहिए।
मंत्रालय ने ई-वाहन खरीदारों के लिए ई-वाउचर प्रणाली भी शुरू की है, जिससे वे इस योजना के अंतर्गत मिलने वाले डिमांड इंसेंटिव का लाभ उठा सकें।
विज्ञापन
गुरुवार को केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। बैठक में खास तौर पर तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
विज्ञापन
प्रमुख शहरों को मिलेंगी इतनी बसें
सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, बेंगलुरु को लगभग 4,500, हैदराबाद को 2,000, दिल्ली को 2,800, अहमदाबाद को 1,000 और सूरत को 600 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। कुमारस्वामी ने कहा, "हम केवल इलेक्ट्रिक बसें आवंटित नहीं कर रहे, बल्कि भारत के परिवहन तंत्र का भविष्य गढ़ रहे हैं—नवाचार और पर्यावरण जागरूकता के साथ।"
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: लॉन्च हुई किआ कैरेंस क्लैविस एमपीवी, ADAS और 6 एयरबैग जैसे तगड़े फीचर्स से लैस
उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय से पीएम ई-ड्राइव योजना को सफल बनाया जाएगा।
दो साल में लागू होगी योजना
यह योजना अप्रैल 2024 से मार्च 2026 तक की दो साल की अवधि में लागू की जाएगी। इसके लिए कुल ₹10,900 करोड़ रुपये की वित्तीय व्यवस्था की गई है। सरकार का दावा है कि यह विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक परिवहन विद्युतीकरण योजनाओं में से एक होगी। इस योजना में केवल बसें ही नहीं, बल्कि ई-एम्बुलेंस और ई-ट्रक को भी शामिल किया गया है। प्रत्येक के लिए ₹500 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
यह भी पढ़ें: ई-वाहन चलाने वालों के लिए खुशखबरी! अब चार्जिंग के लिए भाग-दौड़ होगी खत्म, जान लीजिए सरकार का प्लान
सरकार का कहना है कि ई-एंबुलेंस के जरिए मरीजों को आरामदायक और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। वहीं, ई-ट्रक से प्रदूषण में भारी कमी लाई जा सकेगी। ई-ट्रक पर सब्सिडी पाने के लिए वाहन स्क्रैपिंग प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है, जो कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवे (MoRTH) द्वारा मान्यता प्राप्त रजिस्ट्रड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) से प्राप्त होना चाहिए।
मंत्रालय ने ई-वाहन खरीदारों के लिए ई-वाउचर प्रणाली भी शुरू की है, जिससे वे इस योजना के अंतर्गत मिलने वाले डिमांड इंसेंटिव का लाभ उठा सकें।