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पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत GARC की बड़ी पहल: ₹221 करोड़ से अपग्रेड होंगी ईवी और ADAS टेस्टिंग सुविधाएं
Mon, 28 Sep 2026 08:58 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Mon, 28 Sep 2026 08:58 PM IST
सार
भारत में इलेक्ट्रिक और उन्नत वाहन तकनीकों के विकास को देखते हुए चेन्नई के ओरागडम स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) अपनी वाहन परीक्षण सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है।
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PM Modi overlooking Electric Ambulance
- फोटो : IANS
विस्तार
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए चेन्नई के ओरागडम में स्थित ग्लोबल ऑटोमोटिव रिसर्च सेंटर (GARC) ने अपने टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नेशनल ऑटोमोटिव बोर्ड के तहत काम करने वाला यह सेंटर नए और अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना कर रहा है।
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सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स के तहत एक अधिकृत टेस्टिंग एजेंसी के रूप में GARC पावरट्रेन, एमिशन (उत्सर्जन), ईएमसी, फटीग, इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेफ्टी टेस्टिंग के क्षेत्र में व्हीकल व कंपोनेंट टेस्टिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), होमोलोगेशन और सर्टिफिकेशन सेवाएं प्रदान करता है।
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PM E-DRIVE योजना के तहत GARC को कितना बजट आवंटित किया गया है?
भारत सरकार की PM E-DRIVE (PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत कुल 10,900 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसमें से 780 करोड़ रुपये केवल टेस्टिंग एजेंसियों के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी।
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इस योजना के तहत GARC को 221.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। सेंटर ने प्रस्तावित लगभग सभी उपकरणों के लिए खरीद ऑर्डर जारी कर दिए हैं। इसके तहत एडवांस पैसिव सेफ्टी टेस्टिंग (डमी और डमी कैलिब्रेशन उपकरण), एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) टेस्टिंग (सॉफ्ट टारगेट व इंस्ट्रूमेंट्स के साथ) और ऑटोमोटिव कंपोनेंट टेस्टिंग जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं।
क्रैश टेस्ट और सेफ्टी एनालिसिस के लिए कौन सी नई तकनीकें शामिल की जा रही हैं?
खरीदे गए उपकरणों को लगाने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इस अपग्रेडेशन का सबसे प्रमुख आकर्षण हाई-स्पीड और हाय-रेजोल्यूशन इमेजिंग सिस्टम है:- कैमरा क्षमता: इसमें UHD-4K कैमरे शामिल हैं जो 750 fps (फ्रेम्स प्रति सेकंड) तक काम करते हैं, जबकि फुल एचडी रिकॉर्डिंग 3,000 fps तक की जा सकती है।
- क्रैश टेस्ट एनालिसिस: यह सिस्टम कार के फ्रंटल (सामने), साइड (बगल) और रियर (पीछे) क्रैश टेस्ट के दौरान वाहन के विरूपण, यात्रियों की हलचल और एयरबैग खुलने जैसे महत्वपूर्ण पलों को बारीकी से कैप्चर करेगा। इससे वाहनों की विस्तृत सुरक्षा जांच और होमोलोगेशन में बड़ी मदद मिलेगी।
इस इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रड से भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को क्या फायदा होगा?
- पीएम ई-ड्राइव के सहयोग से GARC में तैयार हो रहा यह नया ढांचा स्वदेशी टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- यह इंफ्रास्ट्रक्चर इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरियों, एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम्स, ADAS, भारी वाणिज्यिक वाहनों और उभरती ऑटो तकनीकों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। इन निवेशों के माध्यम से GARC एक सुरक्षित, तकनीकी रूप से उन्नत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के निर्माण में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।