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NHAI: टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, एनएचएआई से कहा- अपील करने के बजाय कुछ करें
Fri, 15 Aug 2025 06:27 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 15 Aug 2025 06:27 PM IST
सार
केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) (एनएचएआई) को कड़ी फटकार लगाई।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) (एनएचएआई) को कड़ी फटकार लगाई। मामला त्रिशूर के पालयेक्कारा टोल प्लाजा से जुड़ा है, जहां हाईकोर्ट ने 6 अगस्त को चार हफ्ते के लिए टोल वसूली रोकने का आदेश दिया था। अदालत का कहना था कि जब हाईवे का एक हिस्सा बेहद खराब हालत में है और वहां भारी ट्रैफिक जाम है, तो लोगों से टोल वसूली जायज़ नहीं है।
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खराब सड़क और ट्रैफिक जाम पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
एनएचएआई ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश के विनोद चंद्रन की पीठ ने अपील खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा, "आप लोगों से टोल लेते हो लेकिन सुविधा नहीं देते... सर्विस रोड भी ठीक से व्यवस्थित नहीं है।"
जस्टिस चंद्रन ने एनएचएआई से कहा, "अपील करके वक्त बर्बाद करने के बजाय कुछ काम करें।"
अदालत ने यह भी कहा कि यहां तक कि एंबुलेंस को भी इस जाम वाले हिस्से से निकलने में दिक्कत होती है।
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एनएचएआई ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। लेकिन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीश के विनोद चंद्रन की पीठ ने अपील खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा, "आप लोगों से टोल लेते हो लेकिन सुविधा नहीं देते... सर्विस रोड भी ठीक से व्यवस्थित नहीं है।"
जस्टिस चंद्रन ने एनएचएआई से कहा, "अपील करके वक्त बर्बाद करने के बजाय कुछ काम करें।"
अदालत ने यह भी कहा कि यहां तक कि एंबुलेंस को भी इस जाम वाले हिस्से से निकलने में दिक्कत होती है।
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जनता और NHAI के बीच भरोसे पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि जनता और एनएचएआई के बीच का रिश्ता "पब्लिक ट्रस्ट" पर टिका है, और अगर सुचारू यातायात नहीं मिलता तो यह भरोसा टूट जाता है।
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NHAI की दलील और अदालत का रुख
एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले ने रियायतकर्ता, गुरुवायूर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को एनएचएआई से नुकसान की वसूली करने की "गलत" अनुमति दे दी। लेकिन अदालत टस से मस नहीं हुई और एनएचएआई से उसकी कमियों के बारे में सवाल करती रही।
यह महसूस करते हुए कि अदालत अपील पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है, मेहता ने कार्य स्थानों को दर्शाने वाले मानचित्र प्रस्तुत करने के लिए स्थगन की मांग की, जिस पर सीजेआई ने कहा, "आप बर्खास्तगी को स्थगित करना चाहते हैं?"
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सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि जनता और एनएचएआई के बीच का रिश्ता "पब्लिक ट्रस्ट" पर टिका है, और अगर सुचारू यातायात नहीं मिलता तो यह भरोसा टूट जाता है।
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NHAI की दलील और अदालत का रुख
एनएचएआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले ने रियायतकर्ता, गुरुवायूर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को एनएचएआई से नुकसान की वसूली करने की "गलत" अनुमति दे दी। लेकिन अदालत टस से मस नहीं हुई और एनएचएआई से उसकी कमियों के बारे में सवाल करती रही।
यह महसूस करते हुए कि अदालत अपील पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है, मेहता ने कार्य स्थानों को दर्शाने वाले मानचित्र प्रस्तुत करने के लिए स्थगन की मांग की, जिस पर सीजेआई ने कहा, "आप बर्खास्तगी को स्थगित करना चाहते हैं?"
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अगली सुनवाई सोमवार को
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एनएचएआई और रियायतग्राही के बीच विवादों का समाधान मध्यस्थता के माध्यम से किया जा सकता है। इस मामले को, रियायतग्राही की अलग याचिका के साथ, सोमवार को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया गया था।
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