कार कंपनी पर ‘लकी ड्रॉ का ऑफर’ पड़ा भारी, अब शिकायकर्ता को देने पड़ेंगे दो लाख रुपये!
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कार डीलर्स अकसर अपनी कारों की बिक्री बढ़ाने के लिए ग्राहकों को लुभावने ऑफर्स का लालच देते हैं। कुछ ग्राहक इन ऑफर्स के लालच के फंस भी जाते हैं। डीलर्स अकसर लकी ड्रॉ का लालच देते हैं, जो असलियत में मार्केटिंग प्रैक्टिस है। लेकिन एक नामी-गिरामी कार कंपनी के डीलर को ड्रा के नाम पर ऐसा करना भारी पड़ गया और कंज्यूमर फोरम ने उसे भारी भरकम जुर्माना चुकाने का आदेश दिया है।
सेवा शर्तों का उल्लंघन
कोल्लम के क्संजूमर डिसप्यूट्स रिड्रेसल फोरम के अध्यक्ष ईएम मुहम्मेद इब्राहिम और सदस्य एस संध्या रानी का कहना है कि लकी ड्रॉ निकालने वाली कंपनियां पारदर्शिता का पालन करें और कूपन में लिखी शर्तों के मुताबिक विजेताओं के नामों का एलान करें। साथ ही उन्होंने कहा कि कंपनी के स्तर पर सेवा शर्तों का उल्लंघन किया गया है, जिसका फायदा ग्राहक को मिलना चाहिए।
पांच रेनो डस्टर जीतने का मौका
असल में 2014 में ओणम त्योहार के दौरान स्थानीय टीवी चैनल्स और अखबारों में विज्ञापन देकर एलान किया था कि अगस्त 2014 में रेनो कारें बुक करने वाले पांच लकी ग्राहकों को बंपर ईनाम के तौर पर पांच रेनो डस्टर जीतने का मौका मिल सकता है, साथ ही सुनिश्चित ईनाम भी मिलेंगे।
बुक की डस्टर
इस ऑफर के लालच में आकर शिकायतकर्ता ने 16 अगस्त 2014 को एक डस्टर कार बुक कर दी। कार बुक करते समय शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये एडवांस दिए। जिसके बाद उन्हें एक लकी ड्रॉ कूपन दिया गया और काउंटरफॉयल को लकी ड्रा के लिए रख लिया। इसी दौरान रेनो इंडिया, कोच्चि के मैनेजर ने शिकायतकर्ता को बाकी के पैसे लेकर कार डिलीवर कर दी।
नहीं आया एसएमएस
लेकिन शिकायतकर्ता रोज ड्रा का इंतजार करता रहा, उस जब रेनो इंडिया, कोच्चि के मैनेजर से बात की तो उन्होंने बताया कि विजेताओं के नामों एलान एसएमएस भेज कर बताया जाएगा। लेकिन काफी वक्त तक कोई एसएमएस नहीं आया। जिसके बाद शिकायतकर्ता ने वकील के जरिये दो मैनेजर्स को नोटिस भेज दिया।
नीचे पढ़ें ऑर्डर
30 दिन में दें पैसे नहीं तो...
रेनो कोच्चि के मैनेजर का जवाब देख कर फोरम ने कहा कि वह उनके उत्तर से संतुष्ट नहीं हैं और इससे साबित होता है कि उन्होंने कभी ड्रा आयोजित किया ही नहीं और न ही कभी रिजल्ट निकाला। इससे यह साबित होता है कि उन्होंने ग्राहकों के साथ विज्ञापन के जरिये धोखाधड़ी की है और सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है। जिसके बाद फोरम ने आदेश दिया कि मैनेजर्स शिकायकर्ता को हुई मानसिक पीड़ा के तौर पर दो लाख रुपये का मुआवजा दें, साथ ही 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर जमा करें। साथ ही, फोरम ने यह भी कहा कि अगर तीस दिन के भीतर मैनेजर मुआवजा जमा नहीं कराते हैं, तो सालाना नौ फीसदी ब्याज के साथ उनसे यह रकम वसूली जाए।
