फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Existing rules on mandatory insurance cover, helmets on two-wheelers applicable to electric vehicles says HC

HC: हाईकोर्ट ने कहा- दोपहिया वाहनों पर हेलमेट, अनिवार्य बीमा कवर के मौजूदा नियम इलेक्ट्रिक वाहनों पर हैं लागू

Thu, 14 Sep 2023 07:44 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Thu, 14 Sep 2023 07:44 PM IST
सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि अनिवार्य बीमा कवर, दोपहिया वाहनों पर हेलमेट पहनने और अनुपालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई के मौजूदा नियम पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू हैं।

विज्ञापन
Existing rules on mandatory insurance cover, helmets on two-wheelers applicable to electric vehicles says HC
Delhi High Court - फोटो : Social Media

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि अनिवार्य बीमा कवर, दोपहिया वाहनों पर हेलमेट पहनने और अनुपालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई के मौजूदा नियम पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू हैं।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी समय पर वितरित की जा रही है।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय का आदेश एक जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज करते हुए आया, जिसमें मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए बीमा कवर अनिवार्य बनाने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


जनहित याचिका में अदालत से हर तरह की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलों और स्कूटरों पर हेलमेट पहनना अनिवार्य करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की भी मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि जनहित याचिका पूरी तरह से दो समाचार रिपोर्टों के आधार पर दायर की गई थी और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए दावे, आरोप और मुद्दे काफी हद तक अप्रमाणित हैं और इस तरह की "तुच्छ जनहित याचिकाएं" सक्षम होने के बजाय न्याय तक पहुंच वास्तव में "मूल्यवान न्यायिक समय बर्बाद करके" इसमें बाधा डालती है।

पीठ ने अपने फैसले में कहा, "अगर याचिकाकर्ता की ओर से कुछ उचित परिश्रम किया गया होता और शोध किया गया होता, तो यह स्पष्ट होता कि याचिकाकर्ता द्वारा तत्काल जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दों को पहले ही प्रासंगिक कानूनों, नियमों और अधिसूचनाओं के जरिए संबोधित किया जा चुका है।"

इसमें कहा गया है कि जनहित के मुद्दों को संबोधित करने और उन लोगों की सहायता करने के लिए जनहित याचिका के सिद्धांत को विभिन्न फैसलों के जरिए अदालतों द्वारा विकसित किया गया है, जिन्हें सार्वजनिक चोट लगी है या जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है और शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया है।

"हालांकि, यह अक्सर देखा जाता है कि अदालतों के सामने तुच्छ जनहित याचिकाएं दायर की जाती हैं, जिससे वैध शिकायतों वाले वास्तविक वादियों के मामलों के निपटान में काफी देरी होती है।"

पीठ ने कहा, "हालांकि यह अदालत उस उद्देश्य से अवगत है जिसके लिए जनहित याचिका का सिद्धांत विकसित किया गया है, उसे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि व्यक्ति जनहित याचिका से संबंधित उदार नियमों का दुरुपयोग न करें और इस अदालत का कीमती न्यायिक समय बर्बाद न करें।"

अदालत ने याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी जनहित याचिका दायर करने से पहले जरूरी मेहनत करने और संयम बरतने की सलाह दी।

याचिकाकर्ता रजत कपूर एक वकील हैं और उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत, किसी व्यक्ति के लिए मोटर वाहन के इस्तेमाल से होने वाले थर्ड पार्टी के जोखिम के खिलाफ बीमा पॉलिसी हासिल करना अनिवार्य है।

उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रावधान ईवी को कवर नहीं करता है और दिल्ली इलेक्ट्रिक वाहन नीति, 2020 ईवी से संबंधित विभिन्न मुद्दों को कवर करती है। हालांकि, इसमें ईवी का इस्तेमाल करने के इच्छुक लोगों द्वारा प्राप्त की जाने वाली बीमा पॉलिसी का मुद्दा शामिल नहीं है।

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील अनुज अग्रवाल ने अदालत को बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत ईवी के लिए दी जाने वाली सब्सिडी प्राथमिकता के आधार पर समय पर वितरित की जा रही है।

अग्रवाल ने कहा कि "बैटरी चालित वाहन" शब्द को सीएमवी नियमों के नियम 2 (यू) के तहत परिभाषित किया गया है और इसलिए, ईवी एमवी अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के तहत आते हैं।

पीठ ने कहा, "चूंकि एमवी अधिनियम और केंद्रीय मोटर वाहन (सीएमवी) नियमों के प्रासंगिक प्रावधान पहले से ही ईवी पर लागू हैं, खास तौर पर अनिवार्य बीमा कवर, दोपहिया वाहनों पर हेलमेट पहनने और प्रावधानों का पालन न करने पर दंडात्मक प्रावधानों से संबंधित हैं, इस अदालत की राय है कि इस संबंध में कोई आदेश या निर्देश पारित करने की जरूरत नहीं है।''


इसमें कहा गया है कि इसी तरह, चूंकि भारत संघ ने बैटरी चालित वाहनों/ईवी में इस्तेमाल की जाने वाली बैटरियों के लिए निर्माताओं द्वारा पालन किए जाने वाले मानकों को पहले ही निर्धारित कर दिया है, इसलिए इस अदालत द्वारा पारित किए जाने वाले किसी भी आदेश या निर्देश की कोई आवश्यकता नहीं है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed