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Carbon Fibre: 2029 से यूरोप की कारों में कार्बन फाइबर पर बैन! ऑटो इंडस्ट्री में मच सकता है भूचाल
Mon, 21 Apr 2025 07:08 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 21 Apr 2025 07:08 PM IST
सार
कार्बन फाइबर का इस्तेमाल एयरक्राफ्ट से लेकर रेसिंग कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में बड़े पैमाने पर होता है। लेकिन अब यूरोप में इसपर बैन लगने का खतरा मंडरा रहा है।
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यूरोप में लग सकता है कार्बन फाइबर पर बैन
- फोटो : AI
विस्तार
Carbon Fibre Ban In Europe: एक ऐसा इंडस्ट्रीयल मैटेरियल है जिसे अब तक कार कंपनियों के लिए 'मैजिक मैटेरियल' माना जाता था, अब यूरोप में बैन की कगार पर खड़ा है। यूरोपियन यूनियन (EU) ने हाल ही में कबाड़ हो चुके वाहनों के लिए नियमों को नया ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसके मुताबिक कार्बन फाइबर को खतरनाक पदार्थ घोषित किया गया है। अगर यह प्रस्ताव लागू हो गया, तो 2029 तक यूरोपीय बाजार में कारों में कार्बन फाइबर का इस्तेमाल लगभग खत्म हो जाएगा।
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स्वास्थय के लिए खतरनाक?
- फोटो : AI
कार्बन फाइबर: हल्का, मजबूत लेकिन खतरनाक?
कार्बन फाइबर को अब तक उसकी ताकत और हल्केपन के लिए सराहा जाता रहा है। एल्यूमीनियम से हल्का और स्टील से मजबूत यह मैटेरियल एयरक्राफ्ट से लेकर रेसिंग कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि यह बैटरी के भारी वजन को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे रेंज और परफॉर्मेंस दोनों बेहतर होती है।
लेकिन अब इस कमाल के मैटेरियल पर सवाल उठ रहे हैं। वजह यह है कि जब इसे डिस्पोज किया जाता है, तो यह हवा में माइक्रोस्कोपिक फाइबर्स छोड़ता है जो मशीनों को डैमेज कर सकते हैं और इंसानों की त्वचा व सांस की नली को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
यह भी पढ़ें: इन 5 स्मार्ट फीचर्स के दीवाने हुए कार ग्राहक, इनके लिए ज्यादा पैसे खर्चने को भी तैयार
कार्बन फाइबर को अब तक उसकी ताकत और हल्केपन के लिए सराहा जाता रहा है। एल्यूमीनियम से हल्का और स्टील से मजबूत यह मैटेरियल एयरक्राफ्ट से लेकर रेसिंग कारों और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी मांग इसलिए बढ़ी क्योंकि यह बैटरी के भारी वजन को संतुलित करने में मदद करता है, जिससे रेंज और परफॉर्मेंस दोनों बेहतर होती है।
लेकिन अब इस कमाल के मैटेरियल पर सवाल उठ रहे हैं। वजह यह है कि जब इसे डिस्पोज किया जाता है, तो यह हवा में माइक्रोस्कोपिक फाइबर्स छोड़ता है जो मशीनों को डैमेज कर सकते हैं और इंसानों की त्वचा व सांस की नली को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
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लग्जरी कार कंपनियों की बढ़ेगी मुसीबत
- फोटो : AI
स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के लिए खतरा
EU का मानना है कि इन सूक्ष्म फाइबर कणों की वजह से वर्कर्स की सेहत खतरे में पड़ सकती है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। यही वजह है कि EU पहली ऐसी इकाई बन सकती है जो ऑटोमोबाइल सेक्टर में कार्बन फाइबर को “हानिकारक” घोषित करे।
यह भी पढ़ें: 2025 Ducati Scrambler Full Throttle: दमदार इंजन के साथ हुई लॉन्च, एबीएस-ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे कई फीचर्स
इंडस्ट्री की बढ़ेगी चुनौती
अगर यह नियम लागू होता है, तो इसका सीधा असर जापान की दिग्गज कंपनियों, Toray Industries, Teijin और Mitsubishi Chemical पर पड़ेगा, जो पूरी दुनिया के कार्बन फाइबर बाजार का आधे से ज्यादा हिस्सा नियंत्रित करती हैं।
सुपरकार बनाने वाली कंपनी McLaren जैसी ऑटो ब्रांड्स, जो पूरी कार को कार्बन फाइबर से बनाती हैं, उन्हें अब अपने डिजाइन और मटेरियल स्ट्रैटजी पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। 2029 तक EU के इस फैसले पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसका असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ सकता है।
EU का मानना है कि इन सूक्ष्म फाइबर कणों की वजह से वर्कर्स की सेहत खतरे में पड़ सकती है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। यही वजह है कि EU पहली ऐसी इकाई बन सकती है जो ऑटोमोबाइल सेक्टर में कार्बन फाइबर को “हानिकारक” घोषित करे।
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इंडस्ट्री की बढ़ेगी चुनौती
अगर यह नियम लागू होता है, तो इसका सीधा असर जापान की दिग्गज कंपनियों, Toray Industries, Teijin और Mitsubishi Chemical पर पड़ेगा, जो पूरी दुनिया के कार्बन फाइबर बाजार का आधे से ज्यादा हिस्सा नियंत्रित करती हैं।
सुपरकार बनाने वाली कंपनी McLaren जैसी ऑटो ब्रांड्स, जो पूरी कार को कार्बन फाइबर से बनाती हैं, उन्हें अब अपने डिजाइन और मटेरियल स्ट्रैटजी पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। 2029 तक EU के इस फैसले पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इसका असर सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री पर इसका असर पड़ सकता है।