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दिल्ली में ट्रैफिक चालान के नियम बदले: कोर्ट जाने से पहले जमा करना होगा कितना जुर्माना? जानें पूरी प्रक्रिया
Fri, 18 Sep 2026 10:58 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Fri, 18 Sep 2026 10:58 PM IST
सार
दिल्ली में ट्रैफिक चालान को चुनौती देने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अगर किसी वाहन मालिक को लगता है कि उसका e-challan गलत जारी हुआ है, तो अब उसे सीधे कोर्ट जाने के बजाय पहले संबंधित अथॉरिटी के सामने चालान को चुनौती देनी होगी।
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Delhi Traffic Challan Rules
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
दिल्ली में ट्रैफिक ई-चालान (e-Challan) को चुनौती देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। यदि किसी वाहन चालक को लगता है कि उसकी गाड़ी का चालान गलत काटा गया है, तो वह सीधे अदालत का रुख नहीं कर सकता।
नए नियमों के अनुसार, वाहन मालिक को सबसे पहले संबंधित अथॉरिटी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी। यदि अथॉरिटी चालान को सही ठहराती है और वाहन मालिक फिर भी मामले को कोर्ट में ले जाना चाहता है, तो अदालत की सुनवाई शुरू होने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा जमा करना अनिवार्य होगा।
हालांकि, कोर्ट में मामला आगे बढ़ाने के लिए वाहन मालिक को कुल चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। यह जमा राशि चालान को स्वीकार करना नहीं माना जाता। बल्कि कोर्ट में केस आगे बढ़ाने की एक अनिवार्य कानूनी शर्त है।
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नए नियमों के अनुसार, वाहन मालिक को सबसे पहले संबंधित अथॉरिटी के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करानी होगी। यदि अथॉरिटी चालान को सही ठहराती है और वाहन मालिक फिर भी मामले को कोर्ट में ले जाना चाहता है, तो अदालत की सुनवाई शुरू होने से पहले चालान राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा जमा करना अनिवार्य होगा।
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स्टेप 1: चालान रद्द कराने के लिए सबसे पहले कहां अपील करनी होगी?
गलत ई-चालान मिलने पर पहला कदम संबंधित नामित प्राधिकरण के पास शिकायत या अपील दर्ज कराना है।- सबूतों की जांच: अथॉरिटी वाहन मालिक द्वारा दिए गए विवरण और चालान से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड्स (जैसे सीसीटीवी फुटेज या अन्य कैमरा एविडेंस) की समीक्षा करेगी।
- अथॉरिटी द्वारा चालान रद्द होना: यदि जांच में पाया जाता है कि चालान गलती से जारी हुआ था, तो मामला कोर्ट पहुंचे बिना ही अथॉरिटी स्तर पर ही चालान रद्द कर दिया जाएगा। और पोर्टल के जरिए वाहन मालिक को इसकी सूचना दे दी जाएगी।
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यदि अथॉरिटी चालान को सही मानती है, तो कोर्ट जाने की क्या शर्त है?
यदि संबंधित अथॉरिटी शिकायत की समीक्षा के बाद चालान को सही करार देती है और वाहन मालिक इस फैसले से असहमत रहता है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।हालांकि, कोर्ट में मामला आगे बढ़ाने के लिए वाहन मालिक को कुल चालान राशि का 50 प्रतिशत जमा करना होगा। यह जमा राशि चालान को स्वीकार करना नहीं माना जाता। बल्कि कोर्ट में केस आगे बढ़ाने की एक अनिवार्य कानूनी शर्त है।
चालान राशि के हिसाब से कितना एडवांस पैसा जमा करना होगा?
जमा की जाने वाली राशि आपके चालान के मूल्य पर निर्भर करती है:| चालान की कुल रकम | कोर्ट जाने से पहले 50% जमा |
| ₹2,000 | ₹1,000 |
| ₹5,000 | ₹2,500 |
| ₹10,000 | ₹5,000 |
अदालत का फैसला आने पर जमा की गई 50% राशि का क्या होगा?
कोर्ट की सुनवाई के बाद दो परिस्थितियां बन सकती हैं:- यदि कोर्ट चालान रद्द कर देता है: यदि अदालत मामले की जांच कर चालान को गलत पाती है, तो चालान खारिज कर दिया जाएगा। इस स्थिति में वाहन मालिक द्वारा जमा कराई गई 50 प्रतिशत राशि पूरी तरह वापस कर दी जाएगी। उदाहरण के लिए, 2,000 रुपये के चालान पर जमा किए गए 1,000 रुपये वापस मिल जाएंगे।
- यदि कोर्ट चालान बरकरार रखता है: यदि अदालत चालान को सही मानती है, तो वाहन मालिक को शेष 50 प्रतिशत राशि का भुगतान करना होगा। पहले से जमा कराई गई राशि को कुल चालान में एडजस्ट कर लिया जाएगा और चालान का पूर्ण भुगतान मान लिया जाएगा।
वाहन चालकों के लिए यह नई प्रक्रिया क्यों महत्वपूर्ण है?
आजकल ई-चालान बनाने के लिए कैमरों और अन्य स्वचालित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन सिस्टम के जरिए कथित ट्रैफिक उल्लंघन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। ऐसे में किसी चालक को कभी-कभी चालान में दर्ज सबूत या घटना की परिस्थितियों पर आपत्ति हो सकती है।
नई प्रक्रिया ऐसे चालान को चुनौती देने का रास्ता उपलब्ध कराती है, लेकिन वाहन मालिक हर विवादित चालान को सीधे कोर्ट नहीं ले जा सकते। पहले संबंधित अथॉरिटी के स्तर पर शिकायत या अपील की जांच होगी और उसके बाद ही, जरूरत पड़ने पर, 50 प्रतिशत रकम जमा करके अदालत में चुनौती आगे बढ़ाई जा सकेगी।