EU-India: बैटरी कचरे से निकलेगा 'खजाना'! भारत और यूरोपीय संघ ने शुरू किया 169 करोड़ रुपये का साझा कार्यक्रम
भारत और यूरोपियन यूनियन ने इलेक्ट्रिक गाड़ी की बैटरी रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी को सपोर्ट करने के लिए 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) के प्रपोजल के लिए जॉइंट कॉल शुरू की है।
विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) के एक साझा कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का मकसद महत्वपूर्ण खनिजों की रिकवरी और 'सर्कुलर इकोनॉमी' सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
यह कार्यक्रम किन संस्थानों के लिए खुला है?
यह पहल भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के तहत शुरू की गई है, जिसमें आवेदन के लिए ये शर्तें रखी गई हैं:
-
पात्रता: भारत और यूरोपीय संघ की कंपनियां, स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्योग (SME), विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान इसमें हिस्सा ले सकते हैं।
विज्ञापन -
समय सीमा: प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर, 2026 निर्धारित की गई है।
-
फंडिंग: इसे यूरोपीय संघ के 'होरिजोन यूरोप' कार्यक्रम और भारत के भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित किया जा रहा है।
विज्ञापन विज्ञापन
तकनीकी रूप से किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा?
इस कार्यक्रम के तहत आधुनिक रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर दिया जाएगा:
-
रिकवरी सिस्टम: उच्च दक्षता वाली सामग्री रिकवरी प्रणाली और उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीकें।
-
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: बैटरी के संग्रह और छंटनी के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना।
-
पायलट प्रोजेक्ट: औद्योगिक स्तर पर सत्यापन के लिए भारत में एक साझा 'पायलट लाइन' विकसित करना।
-
बैटरी डायग्नोस्टिक्स: पुरानी बैटरियों के दोबारा इस्तेमाल (सेकंड लाइफ) के लिए सुरक्षा निगरानी और जांच तकनीकें।
खनिजों की सुरक्षा के लिए यह सहयोग क्यों जरूरी है?
जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ रहा है, लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिजों की मांग बढ़ रही है:
-
आयात पर निर्भरता: भारत और ईयू का लक्ष्य लिथियम, ग्रेफाइट और कोबाल्ट जैसे खनिजों को रीसायकल करके आयात पर निर्भरता कम करना है।
-
बैटरी क्षमता: अनुमान है कि 2030 तक अकेले भारत के पास 128 GWh की रीसायकल योग्य बैटरी क्षमता होगी।
-
वर्चुअल माइन: इस सहयोग का उद्देश्य बैटरी कचरे को एक 'वर्चुअल माइन' (आभासी खदान) में बदलना है, ताकि शुद्ध सामग्री को दोबारा निर्माण में इस्तेमाल किया जा सके।
प्रमुख अधिकारियों का इस पर क्या कहना है?
इस पहल को लेकर दोनों पक्षों के प्रमुखों ने सकारात्मक विचार रखे हैं:
-
हर्वे डेल्फिन (भारत में ईयू राजदूत): उन्होंने कहा कि बैटरियां इतनी रणनीतिक हैं कि उन्हें एक बार इस्तेमाल के बाद फेंका नहीं जा सकता। यह निवेश खनिज सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों की दिशा में एक बड़ा कदम है।
-
अजय कुमार सूद (भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार): उनके अनुसार, यह पहल भारत के बढ़ते ईवी बाजार के लिए एक मजबूत घरेलू रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगी।
-
लॉजिस्टिक्स: इस मॉडल में असंगठित क्षेत्र को एकीकृत करने वाले लॉजिस्टिक्स मॉडल पर भी ध्यान दिया जाएगा।
यह साझेदारी न केवल भारत और यूरोप के बीच तकनीकी संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सही उपयोग की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।