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Electric Vehicles: इलेक्ट्रिक वाहनों को मिल सकती है बड़ी राहत, 15 साल के बाद भी नहीं माने जाएंगे कबाड़

Mon, 04 Aug 2025 03:49 PM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Mon, 04 Aug 2025 03:49 PM IST
सार

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ाने और ट्रकों-बसेस में EV अपनाने को बढ़ावा देने के लिए सरकार जल्द ही स्पष्ट कर सकती है कि 15 साल की ‘एंड ऑफ लाइफ’ नीति इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू नहीं होगी।
 

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electric vehicles exempted from 15 year end of life norm
इलेक्ट्रिक कार - फोटो : Kia India

विस्तार

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को रफ्तार देने और देश में EV अपनाने की गति बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल्द ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि 15 साल पुराने वाहनों पर लागू 'एंड ऑफ लाइफ' (EoL) नियम इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू नहीं होंगे। इसका सीधा फायदा ई-बसेस, ई-कार्स और ई-ट्रकों की बिक्री को मिलेगा।
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ई-वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर
हाल ही में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। इस बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 2024 में महज 7.6% रही, जबकि 2030 तक का लक्ष्य 30% का है। दोपहिया, तिपहिया और बस सेगमेंट में EV की हिस्सेदारी तो ठीक है, लेकिन ई-कार्स और खासकर ई-ट्रकों की स्थिति कमजोर है।
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बैठक में सड़क परिवहन सचिव वी उमाशंकर ने बताया कि 15 साल से अधिक पुराने अधिकतर बसें निजी स्वामित्व में हैं। इस पर नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने सुझाव दिया कि अगर EV पर 15 साल का नियम नहीं लागू किया जाए तो इससे बिक्री को बढ़ावा मिल सकता है।
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जल्द लागू होंगे नए CAFE नियम
इसके साथ ही सरकार जल्द ही कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली CAFE नॉर्म्स को शहरी माल वाहनों, ट्रकों और बसेस पर भी लागू करने की प्रक्रिया तेज करेगी।

बैठक में यह भी सहमति बनी कि प्रोत्साहनों की जगह अब नियमों और पाबंदियों के जरिए EV अपनाने की रफ्तार बढ़ाई जाए। साथ ही, 5 शहरों में बसेस, अर्बन फ्रेट और पैरा-ट्रांजिट वाहनों में EV को 100% अपनाने की रणनीति पर काम होगा।

ईवी का तैयार होगा बुनियादी ढांचा
बात केवल नीतियों की ही नहीं है, बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जाएगा। फास्ट चार्जर का तैनाती, नई बैटरी टेक्नोलॉजी का विकास, EV फाइनेंसिंग को आसान बनाना और बैटरी आयात पर निर्भरता घटाना जैसे कदम प्राथमिकता में हैं।

वित्त मंत्रालय भी EV फाइनेंसिंग को लेकर एक्टिव हो गया है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में बैंकों के साथ बैठक हुई, जिसमें EV पर उच्च ब्याज दर और लोन स्वीकृति में आ रही बाधाओं पर चर्चा हुई। बैंकों ने सुझाव दिया कि EV की बैटरी को स्टैंडर्डाइज किया जाए, वाहन की लागत घटाई जाए और नई बैटरी की खरीद पर सब्सिडी मिले क्योंकि बैटरियों की उम्र 6-7 साल होती है और वाहन लागत का 40-50% हिस्सा होती है।


सरकार की इन पहलों से आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए राह आसान हो सकती है और देश को अपने 2030 के EV लक्ष्यों के करीब लाया जा सकता है।
 
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