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Electric Highways: सरकार की महात्वाकांक्षी योजना! स्वर्णिम चतुर्भुज पर बनेगा 6,000 किमी इलेक्ट्रिक हाईवे
Wed, 10 Jan 2024 04:35 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 10 Jan 2024 04:35 PM IST
सार
भारत सरकार गोल्डन क्वाड्रिलेटरल पर इलेक्ट्रिक वाहन-सक्षम हाईवे का निर्माण करने की योजना बना रही है। जो प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले हाईवे का एक नेटवर्क है। ताकि इलेक्ट्रिक अंतरराज्यीय सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के जरिए ईंधन की खपत और वाहनों के उत्सर्जन को कम किया जा सके।
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हाईवे
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत में ईवी-रेडी हाईवे बनेगा! भारत सरकार गोल्डन क्वाड्रिलेटरल पर इलेक्ट्रिक वाहन-सक्षम हाईवे का निर्माण करने की योजना बना रही है। जो प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले हाईवे का एक नेटवर्क है। ताकि इलेक्ट्रिक अंतरराज्यीय सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के जरिए ईंधन की खपत और वाहनों के उत्सर्जन को कम किया जा सके।
सरकार का लक्ष्य अगले सात वर्षों में 6,000 किलोमीटर तक ऐसे राजमार्गों का विकास करना है। जिससे देश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा मिले और इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सुविधा हो। ये हाईवे ग्रीन एनर्जी वाले स्रोतों द्वारा संचालित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विजन 2030 पीएम पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा के नाम से जाना जाने वाला यह प्रयास इलेक्ट्रिक बसों के शुभारंभ के साथ ही होगा, जिससे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए एक इकोसिस्टम तैयार होगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "इलेक्ट्रिक हाईवे का विकास संभवतः इलेक्ट्रिक बसों के प्रेरण के साथ होगा, जिससे भारत में ईवी के लिए एक इकोसिस्टम का तेजी से निर्माण होगा।"
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सरकार का लक्ष्य अगले सात वर्षों में 6,000 किलोमीटर तक ऐसे राजमार्गों का विकास करना है। जिससे देश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा मिले और इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती में सुविधा हो। ये हाईवे ग्रीन एनर्जी वाले स्रोतों द्वारा संचालित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस होंगे।
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विजन 2030 पीएम पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा के नाम से जाना जाने वाला यह प्रयास इलेक्ट्रिक बसों के शुभारंभ के साथ ही होगा, जिससे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए एक इकोसिस्टम तैयार होगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, "इलेक्ट्रिक हाईवे का विकास संभवतः इलेक्ट्रिक बसों के प्रेरण के साथ होगा, जिससे भारत में ईवी के लिए एक इकोसिस्टम का तेजी से निर्माण होगा।"
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एक्सप्रेसवे
- फोटो : सोशल मीडिया
ईवी-सक्षम हाईवे और इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती के अलावा, सरकार ने 2030 तक 8 लाख पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदलने के लिए हितधारकों के साथ चर्चा शुरू कर दी है। इसमें 2 लाख इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं, जो राज्य परिवहन उपक्रमों के लिए निर्दिष्ट हैं, 550,000 निजी ऑपरेटरों के लिए हैं और 50,000 स्कूल और कर्मचारी परिवहन के लिए आवंटित हैं।
यह उम्मीद की जाती है कि नए ई-हाईवे के निर्माण से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा मिलेगा। जिससे ज्यादा व्यक्ति रोजमर्रा के आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे। हालांकि, इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पिछले साल लक्षित 1 लाख यूनिट से कम होकर 83,000 यूनिट ही रह गई। इसे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की सीमित रेंज और अपर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में उपभोक्ताओं की चिंताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। नतीजतन, इलेक्ट्रिक वाहनों को मुख्य रूप से व्यक्तिगत परिवहन के दूसरे या तीसरे माध्यम के रूप में माना जा रहा है।
गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल (स्वर्णिम चतुर्भुज) भारत का सबसे लंबा राजमार्ग नेटवर्क है। जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के चार प्रमुख शहरों को जोड़ता है। साथ ही यह विभिन्न औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक केंद्रों को भी जोड़ता है। इस नेटवर्क पर ई-राजमार्गों के निर्माण से COP28 दिशानिर्देशों के अनुरूप लॉजिस्टिक लागत कम करने और उत्सर्जन को रोकने के सरकार के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
यह उम्मीद की जाती है कि नए ई-हाईवे के निर्माण से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को बढ़ावा मिलेगा। जिससे ज्यादा व्यक्ति रोजमर्रा के आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे। हालांकि, इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पिछले साल लक्षित 1 लाख यूनिट से कम होकर 83,000 यूनिट ही रह गई। इसे देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की सीमित रेंज और अपर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में उपभोक्ताओं की चिंताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। नतीजतन, इलेक्ट्रिक वाहनों को मुख्य रूप से व्यक्तिगत परिवहन के दूसरे या तीसरे माध्यम के रूप में माना जा रहा है।
गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल (स्वर्णिम चतुर्भुज) भारत का सबसे लंबा राजमार्ग नेटवर्क है। जो दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई के चार प्रमुख शहरों को जोड़ता है। साथ ही यह विभिन्न औद्योगिक, कृषि और सांस्कृतिक केंद्रों को भी जोड़ता है। इस नेटवर्क पर ई-राजमार्गों के निर्माण से COP28 दिशानिर्देशों के अनुरूप लॉजिस्टिक लागत कम करने और उत्सर्जन को रोकने के सरकार के प्रयासों में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।
इलेक्ट्रिक हाईवे
- फोटो : For Reference Only
क्या है इलेक्ट्रिक हाईवे
इलेक्ट्रिक हाईवे ऊपर लगी इलेक्ट्रिक लाइनों के जरिए चलते वाहनों को बिजली की आपूर्ति करके एक ऊर्जा-कुशल समाधान प्रदान करते हैं। इस समय, जर्मनी के बर्लिन में दुनिया का सबसे लंबा ई-हाईवे है, जो 109 किलोमीटर का है और सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए चालू है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को इलेक्ट्रिक हाईवे के लिए ठेके देने की योजना बनाई है। इलेक्ट्रिक बसों को शहरों के बीच संचालन के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन लगाकर मौजूदा हाईवे की पहचान करने और उन्हें ई-हाईवे में बदलने की कोशिशें भी हो रही हैं। इस तरह लागत-प्रभावी ग्रीन इंटरसिटी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं। इस पहल के लिए पैसा केंद्र और राज्य सरकारें दे रही हैं।
पिछले साल सितंबर में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आर्थिक व्यवहारिकता के कारण सरकार की इलेक्ट्रिक हाईवे को विकसित करने में दिलचस्पी जताई थी। उन्होंने कहा था कि बिजली मंत्रालय रियायती दरों पर बिजली की पेशकश कर सकता है, जबकि निजी निवेशक निर्दिष्ट मार्गों के साथ बिजली लाइनें बना सकते हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस समय हाईवे पर देय टोल के समान एक बिजली टैरिफ प्रणाली लागू कर सकता है।
इलेक्ट्रिक हाईवे ऊपर लगी इलेक्ट्रिक लाइनों के जरिए चलते वाहनों को बिजली की आपूर्ति करके एक ऊर्जा-कुशल समाधान प्रदान करते हैं। इस समय, जर्मनी के बर्लिन में दुनिया का सबसे लंबा ई-हाईवे है, जो 109 किलोमीटर का है और सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए चालू है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत निजी कंपनियों को इलेक्ट्रिक हाईवे के लिए ठेके देने की योजना बनाई है। इलेक्ट्रिक बसों को शहरों के बीच संचालन के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन लगाकर मौजूदा हाईवे की पहचान करने और उन्हें ई-हाईवे में बदलने की कोशिशें भी हो रही हैं। इस तरह लागत-प्रभावी ग्रीन इंटरसिटी सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं। इस पहल के लिए पैसा केंद्र और राज्य सरकारें दे रही हैं।
पिछले साल सितंबर में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आर्थिक व्यवहारिकता के कारण सरकार की इलेक्ट्रिक हाईवे को विकसित करने में दिलचस्पी जताई थी। उन्होंने कहा था कि बिजली मंत्रालय रियायती दरों पर बिजली की पेशकश कर सकता है, जबकि निजी निवेशक निर्दिष्ट मार्गों के साथ बिजली लाइनें बना सकते हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस समय हाईवे पर देय टोल के समान एक बिजली टैरिफ प्रणाली लागू कर सकता है।