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Traffic Challan: दिल्ली में ट्रैफिक चालान से बचने के लिए दे रहे हैं गलत नंबर? जानें अब एक OTP आपको कैसे रोकेगा

Thu, 14 May 2026 07:24 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Thu, 14 May 2026 07:24 PM IST
सार

कभी-कभी, जब किसी कथित ट्रैफिक नियम के उल्लंघन के लिए रोका जाता है, तो ड्राइवर पुलिस को गलत मोबाइल नंबर देकर जुर्माने से बचने की कोशिश करते हैं। इस उम्मीद में कि चालान किसी गलत व्यक्ति के पास चला जाएगा और शायद हमेशा के लिए खो जाएगा। अगर पुलिस की योजना सफल होती है तो, अब ऐसा नहीं होगा। जानें क्या है दिल्ली पुलिस की नई तैयारी।

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Delhi Traffic Police Makes OTP Verification Mandatory for E-Challans
Traffic Police Officer With Driver - फोटो : AI

विस्तार

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने ई-चालान (e-challan) प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करते हुए OTP (ओटीपी) वेरिफिकेशन शुरू कर दिया है। ऐसा अक्सर देखा जाता था कि ट्रैफिक उल्लंघन के दौरान लोग पकड़े जाने पर पुलिस अधिकारी को चालान जारी करते समय गलत मोबाइल नंबर दे देते थे। हालांकि, ओटीपी सत्यापन करने के कदम के साथ ही उस आम समस्या पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। अब से, चालान की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब ड्राइवर के पास आए ओटीपी को सिस्टम में वेरिफाई कर लिया जाएगा।

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चालान प्रक्रिया में यह नया बदलाव कैसे काम करेगा?

अब सड़क पर किसी भी उल्लंघन के लिए चालान काटते समय पुलिस एक नई प्रक्रिया का पालन करेगी:

  • तत्काल ओटीपी: जैसे ही ट्रैफिक अधिकारी ई-चालान डिवाइस में ड्राइवर का मोबाइल नंबर दर्ज करेगा, उस नंबर पर तुरंत एक ओटीपी (OTP) जाएगा।

  • वेरिफिकेशन जरूरी: चालान की प्रक्रिया तभी पूरी होगी जब ड्राइवर वह ओटीपी अधिकारी को बताएगा और वह डिवाइस में वेरिफाई हो जाएगा।

  • फर्जीवाड़े पर लगाम: यदि नंबर गलत, बंद या किसी और का है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेगा और सत्यापन नाकाम हो जाएगा।

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गलत मोबाइल नंबर से चालान सिस्टम को क्या नुकसान हो रहा था?

डिजिटल रिकॉर्ड पर निर्भरता बढ़ने के साथ गलत नंबर देना एक बड़ा सिरदर्द बन गया था:

  • सूचना का अभाव: गलत नंबर होने के कारण चालान अलर्ट, भुगतान रिमाइंडर और कानूनी नोटिस कभी भी असली उल्लंघनकर्ता तक नहीं पहुंच पाते थे।

  • डिजिटल चेन में रुकावट: पहले कागजी चालान में अधिकारी के पास तुरंत भौतिक रिकॉर्ड होता था। लेकिन अब पूरी प्रक्रिया एसएमएस (SMS) और ऑनलाइन डेटाबेस पर निर्भर है। गलत नंबर पूरी व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर देता था।

  • पेमेंट में देरी: सही व्यक्ति तक जानकारी न पहुंचने से ऑनलाइन जुर्माने का भुगतान समय पर नहीं हो पाता था।

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दिल्ली पुलिस डिजिटल इंफोर्समेंट को और कड़ा क्यों बना रही है?

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में ट्रैफिक नियमों को लागू करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है:

  • सटीक डेटा की जरूरत: सीसीटीवी (CCTV) और ई-चालान सिस्टम तभी प्रभावी होते हैं जब दर्ज की गई जानकारी 100 प्रतिशत सही हो।

  • बार-बार नियम तोड़ने वालों पर नजर: अधिकारी अब आदतन नियम तोड़ने वाले लोगों की बेहतर ट्रैकिंग करना चाहते हैं। जिसके लिए सही मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है।

  • लूपहोल को बंद करना: डिजिटल सिस्टम में 'गलत नंबर' जैसी छोटी सी दिखने वालाी खामी (लूपहोल) अब पुलिस की नजर में एक बड़ी बाधा था, जिसे बंद करना जरूरी हो गया था।
     
  • एक बार वेरिफाई होने के बाद, चालान जारी कर दिया जाता है, और कन्फर्म किया गया नंबर सरकार के VAHAN पोर्टल पर भी अपडेट कर दिया जाता है। जिससे भविष्य में इस्तेमाल के लिए रिकॉर्ड ज्यादा सटीक हो जाता है।

इस नए सिस्टम का ड्राइवरों पर क्या असर पड़ेगा?

सड़क पर चलने वाले लोगों के लिए इस बदलाव के कुछ व्यावहारिक पहलू हैं:

  • थोड़ा अतिरिक्त समय: चेक के दौरान चालान पूरा होने में अब कुछ अतिरिक्त सेकंड लग सकते हैं। क्योंकि ओटीपी आने और उसे दर्ज करने में समय लगेगा।

  • चालाकी नहीं चलेगी: अब ट्रैफिक पुलिस को चकमा देने के लिए किसी अजनबी या पुराना नंबर देना नामुमकिन हो जाएगा।

  • पुलिस का तर्क: पुलिस का मानना है कि बाद में यह पता चलने से बेहतर है कि नंबर बेकार था, मौके पर ही उसे वेरिफाई कर लिया जाए। 

दिल्ली पुलिस के हाथ होंगे और मजबूत!

क्या बदलेगा और क्या पहले जैसा ही रहेगा

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस रोजाना 30 लाख से ज्यादा गाड़ियों को संभालती है, जिसके लिए उसके पास लगभग 7,000 कर्मियों की फोर्स है। इनमें से 80 फीसदी कर्मी सड़कों में तैनात रहते हैं। विभाग को रोजाना चालान से जुड़े लगभग 60,000 अपडेट मिलते हैं। जबकि ट्रैफ़िक कर्मी रोजाना लगभग 20,000 चालान जारी करते हैं।

हालांकि, यह OTP सिस्टम सिर्फ मौके पर काटे जाने वाले चालानों पर ही लागू होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया, "ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) टेक्नोलॉजी के जरिए जारी किए गए चालान, गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर से जुड़े मोबाइल नंबर पर ही भेजे जाते रहेंगे।"

ANPR, कैमरे की फुटेज से नंबर प्लेट पढ़ने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन का इस्तेमाल करता है। इसकी मदद से, तेज रफ्तार, रेड-लाइट जंप करने और हेलमेट न पहनने जैसे उल्लंघनों पर चौबीसों घंटे ऑटोमैटिक तरीके से कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का यह कदम स्पष्ट करता है कि भारत के शहरों में ट्रैफिक प्रबंधन अब पूरी तरह डिजिटल और सख्त होता जा रहा है। अब ड्राइवरों के पास सही जानकारी देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। डिजिटल युग में नियमों से बचना अब पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।

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