{"_id":"6abd0e8578d06087e20668b5","slug":"delhi-high-court-seeks-response-from-uber-rapido-and-ola-on-pil-over-women-passenger-safety-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला यात्रियों की सुरक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस: सरकार, पुलिस, ओला, उबर और रैपिडो से मांगा जवाब","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
महिला यात्रियों की सुरक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भेजा नोटिस: सरकार, पुलिस, ओला, उबर और रैपिडो से मांगा जवाब
Wed, 30 Sep 2026 06:58 PM IST
Amar Sharma
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amar Sharma
Updated Wed, 30 Sep 2026 06:58 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐप आधारित कैब सेवाओं में महिला यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और Uber, Rapido तथा Ola Cabs से जवाब मांगा है। जानें कोर्ट ने क्या कहा।
विज्ञापन
Delhi HC women passengers safety
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एप आधारित कैब सेवाओं में महिला यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और उबर, रैपिडो और ओला कैब्स से जवाब मांगा है। अदालत ने कहा कि वह इन एप आधारित सेवाओं को जवाबदेह बनाना चाहती है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर में होगी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने Uber, Rapido और Ola को क्या कहा?
- मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा। यह जनहित याचिका आदित्य सहगल ने दायर की है।
- सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “हम इन एप्स को जवाबदेह बनाना चाहते हैं।” अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस के अलावा ऊबर इंडिया सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड, रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और ANI टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को भी नोटिस जारी किया।
- रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज रैपिडो प्लेटफॉर्म का संचालन करती है। जबकि ANI टेक्नोलॉजीज ओला कैब्स की मूल कंपनी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एप आधारित कैब सेवाओं में किन सुरक्षा पहलुओं पर सवाल उठाए गए?
- याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राजधानी में हजारों कैब संचालित हो रही हैं। लेकिन ड्राइवरों को लेकर पर्याप्त जांच की जा रही है या नहीं, इस पर सवाल हैं। इसमें खास तौर पर रात के समय ड्राइवर के नशे में होने जैसी स्थिति की जांच का मुद्दा भी उठाया गया।
- याचिका में एप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े कई सुरक्षा पहलुओं पर चिंता जताई गई है। इनमें ड्राइवरों के आपराधिक रिकॉर्ड का सत्यापन, वाहन की पहचान, तय मार्ग से विचलन, आपातकालीन प्रतिक्रिया, शिकायत निवारण और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना शामिल हैं।
- इसके अलावा, एप आधारित परिवहन कंपनियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी याचिका में बताई गई है।
क्या संवेदनशील और जोखिम वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाने की मांग की गई है?
- याचिका में अधिकारियों को सार्वजनिक सड़कों पर निगरानी और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें खास तौर पर असुरक्षित, सुनसान और उच्च जोखिम वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने की बात कही गई है।
- याचिकाकर्ता ने एप आधारित परिवहन सेवाओं में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा किए जाने की भी मांग की है।
यात्रियों की मदद के लिए 24×7 कमांड सेंटर की मांग क्यों की गई?
याचिका में एप आधारित कैब कंपनियों को 24×7 ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। प्रस्तावित केंद्र को यात्रियों की ओर से भेजे गए आपातकालीन और SOS अलर्ट को प्राप्त करने, उनकी निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाने की बात कही गई है।
कैब ड्राइवरों की ट्रेनिंग को लेकर क्या मांग रखी गई?
- याचिका में कैब ड्राइवरों के लिए समय-समय पर सत्यापित प्रशिक्षण अनिवार्य करने की मांग भी की गई है। इसमें लिंग संवेदनशीलता, महिला यात्रियों के साथ उचित व्यवहार, यौन उत्पीड़न की रोकथाम और व्यक्तिगत सीमाओं के सम्मान जैसे विषयों पर प्रशिक्षण शामिल करने की मांग की गई है।
- हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और मामले को दिसंबर में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।