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High Court: हाईकोर्ट ने शख्स को दी 19 साल पुरानी कार वापस लेने की इजाजत, चुकाने होंगे 1.5 लाख रुपये
Thu, 02 Oct 2025 02:12 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 02 Oct 2025 02:12 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक शख्स को अपनी 19 साल पुरानी कार कबाड़खाने से वापस लेने की इजाजत दे दी है। हालांकि, इसके लिए उसे 1.5 लाख रुपये बतौर शुल्क देना होगा।
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Delhi High Court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक शख्स को अपनी 19 साल पुरानी कार कबाड़खाने से वापस लेने की इजाजत दे दी है। हालांकि, इसके लिए उसे 1.5 लाख रुपये बतौर शुल्क देना होगा।
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भावनाओं से जुड़ा रिश्ता
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की सिंगल जज बेंच ने अपने आदेश में कहा कि घर, गाड़ियां और पालतू जानवर हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं। इनसे लोगों का भावनात्मक लगाव गहरा होता है और ये रिश्ता आसानी से नहीं टूटता।
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भावनाओं से जुड़ा रिश्ता
जस्टिस मिनी पुष्कर्णा की सिंगल जज बेंच ने अपने आदेश में कहा कि घर, गाड़ियां और पालतू जानवर हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा होते हैं। इनसे लोगों का भावनात्मक लगाव गहरा होता है और ये रिश्ता आसानी से नहीं टूटता।
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NRI का पुरानी कार से लगाव
एनआरआई राजेश्वर नाथ कौल की 19 साल पुरानी कार, जिसे वे विदेश से लेकर आए थे, तय उम्र सीमा पार करने के बाद एमसीडी की नजर में आ गई। निगम ने इसे कबाड़ घोषित कर जब्त कर लिया। इसके बाद कौल कोर्ट पहुंचे और कार से अपने गहरे लगाव की दलील दी।
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एनआरआई राजेश्वर नाथ कौल की 19 साल पुरानी कार, जिसे वे विदेश से लेकर आए थे, तय उम्र सीमा पार करने के बाद एमसीडी की नजर में आ गई। निगम ने इसे कबाड़ घोषित कर जब्त कर लिया। इसके बाद कौल कोर्ट पहुंचे और कार से अपने गहरे लगाव की दलील दी।
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कोर्ट का मानवीय फैसला
कोर्ट ने उनकी भावनाओं को समझते हुए कहा कि अगर वे गाड़ी के जब्त रहने के दौरान का शुल्क अदा करते हैं तो कार वापस ले सकते हैं। इस तरह उन्हें अपनी गाड़ी कबाड़खाने से छुड़ाने की इजाजत मिल गई।
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कोर्ट ने उनकी भावनाओं को समझते हुए कहा कि अगर वे गाड़ी के जब्त रहने के दौरान का शुल्क अदा करते हैं तो कार वापस ले सकते हैं। इस तरह उन्हें अपनी गाड़ी कबाड़खाने से छुड़ाने की इजाजत मिल गई।
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आदेश में कोर्ट की टिप्पणी
कोर्ट ने आदेश में लिखा, "घर, वाहन और पालतू अब लोगों की जिंदगी का खास हिस्सा बन गए हैं। इस जुड़ाव की वजह से कई बार लोग समाज और कानून की तय हदें पार कर जाते हैं। ऐसे मामलों में अदालतों को भी संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए और अलग दृष्टिकोण से सोचना चाहिए।"
साथ ही कोर्ट ने कहा कि कानून के मुताबिक भी नागरिकों को अपने भावनात्मक रूप से जुड़े सामान और पालतुओं की सुरक्षा का अधिकार है।
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कोर्ट ने आदेश में लिखा, "घर, वाहन और पालतू अब लोगों की जिंदगी का खास हिस्सा बन गए हैं। इस जुड़ाव की वजह से कई बार लोग समाज और कानून की तय हदें पार कर जाते हैं। ऐसे मामलों में अदालतों को भी संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए और अलग दृष्टिकोण से सोचना चाहिए।"
साथ ही कोर्ट ने कहा कि कानून के मुताबिक भी नागरिकों को अपने भावनात्मक रूप से जुड़े सामान और पालतुओं की सुरक्षा का अधिकार है।
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