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E-Bus: दिल्ली में प्रदूषण पर लगेगा ब्रेक! इस महीने सड़कों पर उतारी जाएंगी 1,000 से ज्यादा नई इलेक्ट्रिक बसें
Tue, 04 Mar 2025 07:01 AM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 04 Mar 2025 07:01 AM IST
सार
वर्तमान में दिल्ली में कुल 7,600 बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 2,002 इलेक्ट्रिक बसें हैं।
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इलेक्ट्रिक बस (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
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विस्तार
दिल्ली सरकार राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इस महीने 1,000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें सड़कों पर उतरने वाली हैं। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सिंह ने बताया कि दिल्ली का परिवहन क्षेत्र वर्तमान में ₹235 करोड़ के घाटे में चल रहा है। उन्होंने कहा, "हम शहर में सार्वजनिक परिवहन को निरंतर सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं, और जल्द ही और बसें बेड़े में जोड़ी जाएंगी ताकि कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।"
परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने पर जोर
वर्तमान में दिल्ली में कुल 7,600 बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 2,002 इलेक्ट्रिक बसें हैं। सरकार की योजना है कि 2026 तक 11,000 बसें, जिनमें 8,000 इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी, सड़कों पर चलाई जाएं। इसके तहत, सितंबर 2025 तक 3,680 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को और मजबूती मिलेगी।
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2023 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 41 लाख यात्री सार्वजनिक बसों में सफर करते हैं। नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
आप सरकार ने लागू की थी ई-वाहन नीति
पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2020 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य 2025 तक शहर में बसों की कुल संख्या को 10,480 तक बढ़ाना था, जिसमें से 80% यानी 8,280 बसें इलेक्ट्रिक होनी थीं। हालांकि, नई सरकार मोहल्ला बस सेवा की योजना की समीक्षा कर रही है, जो पहले 2,180 छोटी नौ मीटर लंबी बसों को शामिल करने के लिए बनाई गई थी, ताकि संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर हो सके।
चुनावी अभियान के दौरान, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस खरीद में कथित घोटाले का आरोप लगाया था, जिसमें कहा गया था कि बसों की खरीद दरों को बढ़ाकर करीब 4,500 करोड़ रुपये का नुकसान किया गया और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी तक विधानसभा में पेश नहीं की गई है।
नई सरकार अब इन सभी योजनाओं की समीक्षा कर रही है और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली की बस सेवा किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
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सिंह ने बताया कि दिल्ली का परिवहन क्षेत्र वर्तमान में ₹235 करोड़ के घाटे में चल रहा है। उन्होंने कहा, "हम शहर में सार्वजनिक परिवहन को निरंतर सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं, और जल्द ही और बसें बेड़े में जोड़ी जाएंगी ताकि कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।"
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परिवहन को प्रदूषण मुक्त बनाने पर जोर
वर्तमान में दिल्ली में कुल 7,600 बसें संचालित हो रही हैं, जिनमें से 2,002 इलेक्ट्रिक बसें हैं। सरकार की योजना है कि 2026 तक 11,000 बसें, जिनमें 8,000 इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी, सड़कों पर चलाई जाएं। इसके तहत, सितंबर 2025 तक 3,680 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को और मजबूती मिलेगी।
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2023 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, दिल्ली में प्रतिदिन औसतन 41 लाख यात्री सार्वजनिक बसों में सफर करते हैं। नई इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
आप सरकार ने लागू की थी ई-वाहन नीति
पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 2020 में इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य 2025 तक शहर में बसों की कुल संख्या को 10,480 तक बढ़ाना था, जिसमें से 80% यानी 8,280 बसें इलेक्ट्रिक होनी थीं। हालांकि, नई सरकार मोहल्ला बस सेवा की योजना की समीक्षा कर रही है, जो पहले 2,180 छोटी नौ मीटर लंबी बसों को शामिल करने के लिए बनाई गई थी, ताकि संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर हो सके।
चुनावी अभियान के दौरान, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस खरीद में कथित घोटाले का आरोप लगाया था, जिसमें कहा गया था कि बसों की खरीद दरों को बढ़ाकर करीब 4,500 करोड़ रुपये का नुकसान किया गया और कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी तक विधानसभा में पेश नहीं की गई है।
नई सरकार अब इन सभी योजनाओं की समीक्षा कर रही है और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दिल्ली की बस सेवा किस दिशा में आगे बढ़ेगी।