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China EV: इलेक्ट्रिक वाहनों के चलते चीन की बीमा इंडस्ट्री में भूचाल, महंगे प्रीमियम के बावजूद हो रहा भारी घाटा
Thu, 25 Sep 2025 12:10 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 25 Sep 2025 12:10 PM IST
सार
China EV Insurance Companies In Loss: दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार चीन बीमा संकट से जूझ रहा है। EV बीमा प्रीमियम बढ़ने के बावजूद कंपनियां लगातार घाटे में हैं। 2024 में बीमा क्षेत्र को अरबों युआन का नुकसान उठाना पड़ा।
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चीन की ईवी इंश्योरेंस सेक्टर घाटे में
- फोटो : Amar Sharma
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विस्तार
चीन की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को सबसे मजबूत कड़ी माना जाता रहा है। पिछले साल भी चीन ने दुनिया में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन बेचे। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों से चीन में अब एक नया संकट खड़ा होता दिख रहा है। लाखों EV सड़कों पर दौड़ रही हैं, मगर इन्हें कवर करने वाली बीमा कंपनियां लगातार घाटे में जा रही हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में EV बीमा से 141 अरब युआन का प्रीमियम इकट्ठा हुआ। देखने में यह बड़ा बिजनेस लगता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 2024 में बीमा कंपनियों को लगभग 5.7 अरब युआन का घाटा उठाना पड़ा। मतलब, उन्होंने जितना कमाया उससे कहीं ज्यादा क्लेम्स चुकाने पड़े।
घाटे में क्यों हैं बीमा कंपनियां?
ईवी बीमा की मांग तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन असल समस्या रिस्क की है। पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में EV मालिक ज्यादा क्लेम फाइल कर रहे हैं। ऊपर से रिपेयरिंग का खर्च कई गुना ज्यादा है। खासकर बैटरी पैक, जो गाड़ी की कीमत का एक-तिहाई हिस्सा होता है। ईवी में मामूली नुकसान पर भी भारी बिल बन जाता है।
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ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में EV बीमा से 141 अरब युआन का प्रीमियम इकट्ठा हुआ। देखने में यह बड़ा बिजनेस लगता है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 2024 में बीमा कंपनियों को लगभग 5.7 अरब युआन का घाटा उठाना पड़ा। मतलब, उन्होंने जितना कमाया उससे कहीं ज्यादा क्लेम्स चुकाने पड़े।
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घाटे में क्यों हैं बीमा कंपनियां?
ईवी बीमा की मांग तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन असल समस्या रिस्क की है। पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में EV मालिक ज्यादा क्लेम फाइल कर रहे हैं। ऊपर से रिपेयरिंग का खर्च कई गुना ज्यादा है। खासकर बैटरी पैक, जो गाड़ी की कीमत का एक-तिहाई हिस्सा होता है। ईवी में मामूली नुकसान पर भी भारी बिल बन जाता है।
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प्रीमियम रेट्स पर कैप
- फोटो : BYD
सरकार की दखलअंदाजी
स्थिति संभालने के लिए सरकार ने “ईजी-टू-इंश्योर” नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिसके जरिए 5 लाख से ज्यादा वाहनों को कवरेज दिया गया है। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों और बीमा कंपनियों के बीच डेटा शेयरिंग, पार्ट्स की कीमतें घटाने और कस्टमर रिजेक्शन पर रोक जैसी गाइडलाइंस भी लागू की गई हैं।
बीमा कंपनियों की दिक्कतें
सरकार ने प्रीमियम रेट्स पर कैप लगा रखा है, जिससे कंपनियां ज्यादा रिस्क वाले ड्राइवर्स (जैसे राइड-हेलिंग सर्विस यूजर्स) से अतिरिक्त चार्ज नहीं ले सकतीं। इससे छोटी बीमा कंपनियां नुकसान के वजह से बाजार से बाहर हो रही हैं। वहीं, बड़ी कंपनियां जैसे Ping An, PICC और China Pacific भी मान रही हैं कि EV बीमा में मुनाफा कमाना मुश्किल है।
हालांकि कुछ राहत प्रयोगों से मिल रही है। Ping An ने टेक्नोलॉजी बनाई है जिससे निजी और राइड-हेलिंग ड्राइवर्स की पहचान की जा सके। Tesla और BYD खुद के बीमा वेंचर्स शुरू कर रहे हैं, जबकि Xiaomi और Volkswagen पार्टनरशिप के जरिए इस क्षेत्र में उतर रहे हैं।
स्थिति संभालने के लिए सरकार ने “ईजी-टू-इंश्योर” नाम का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिसके जरिए 5 लाख से ज्यादा वाहनों को कवरेज दिया गया है। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों और बीमा कंपनियों के बीच डेटा शेयरिंग, पार्ट्स की कीमतें घटाने और कस्टमर रिजेक्शन पर रोक जैसी गाइडलाइंस भी लागू की गई हैं।
बीमा कंपनियों की दिक्कतें
सरकार ने प्रीमियम रेट्स पर कैप लगा रखा है, जिससे कंपनियां ज्यादा रिस्क वाले ड्राइवर्स (जैसे राइड-हेलिंग सर्विस यूजर्स) से अतिरिक्त चार्ज नहीं ले सकतीं। इससे छोटी बीमा कंपनियां नुकसान के वजह से बाजार से बाहर हो रही हैं। वहीं, बड़ी कंपनियां जैसे Ping An, PICC और China Pacific भी मान रही हैं कि EV बीमा में मुनाफा कमाना मुश्किल है।
हालांकि कुछ राहत प्रयोगों से मिल रही है। Ping An ने टेक्नोलॉजी बनाई है जिससे निजी और राइड-हेलिंग ड्राइवर्स की पहचान की जा सके। Tesla और BYD खुद के बीमा वेंचर्स शुरू कर रहे हैं, जबकि Xiaomi और Volkswagen पार्टनरशिप के जरिए इस क्षेत्र में उतर रहे हैं।