{"_id":"669f9e0d0ee11fb1100f9eeb","slug":"car-tyre-care-tips-monsoon-car-care-tips-for-rainy-season-2024-07-23","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Car Tyre Care: मानसून में गाड़ी चलाना होता है बेहद चुनौतीपूर्ण, जानें अपने वाहन के टायर की देखभाल कैसे करें","category":{"title":"Automobiles","title_hn":"ऑटो-वर्ल्ड","slug":"automobiles"}}
Car Tyre Care: मानसून में गाड़ी चलाना होता है बेहद चुनौतीपूर्ण, जानें अपने वाहन के टायर की देखभाल कैसे करें
Wed, 24 Jul 2024 03:22 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 24 Jul 2024 03:22 PM IST
सार
बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करने के लिए वाहन मालिक को कई बातों पर ध्यान देना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं कि मानसून के दौरान टायरों को कैसे मेंटेन रखा जाए।
विज्ञापन
कार टायर केयर टिप्स
- फोटो : पीटीआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Car Tyre Care Tips: मानसून आखिरकार अपने पूरे शबाब पर है। देश में मानसून के आने से चिलचिलाती और उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। वहीं इसने पूरे भारत के कई क्षेत्रों में यात्रियों के लिए परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
विज्ञापन
देश के विभिन्न हिस्सों में अत्यधिक बारिश जलभराव और बाढ़ का कारण बनती है। जलभराव वाले क्षेत्रों के साथ-साथ बारिश के दौरान गाड़ी चलाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। जबकि बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग सुनिश्चित करने के लिए वाहन मालिक को कई कारकों पर ध्यान देना चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं कि मानसून के दौरान टायरों को कैसे मेंटेन रखा जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
टायर की गहराई जांचें
कई वाहनों में टायर चिकनी सतह वाले हो जाते हैं। टायरों पर बने खांचे (ग्रूव्स) पानी को निकालने में मदद करते हैं। और टायरों को सड़क पर बेहतर पकड़ देते हैं। टायर के ग्रूव्स में पर्याप्त गहराई होना महत्वपूर्ण है। अपनी कार के टायरों की जांच करें कि उन पर बने ग्रूव्स में पर्याप्त गहराई है या नहीं। एक 10 रुपये का सिक्का लें और उसे टायर के ग्रूव्स के बीच रखें। अगर अशोक स्तंभ का शीर्ष दिखाई देता है, तो टायर को बदलने का समय आ गया है। टायर के ग्रूव्स की गहराई कम से कम दो मिलीमीटर होनी चाहिए।
कई वाहनों में टायर चिकनी सतह वाले हो जाते हैं। टायरों पर बने खांचे (ग्रूव्स) पानी को निकालने में मदद करते हैं। और टायरों को सड़क पर बेहतर पकड़ देते हैं। टायर के ग्रूव्स में पर्याप्त गहराई होना महत्वपूर्ण है। अपनी कार के टायरों की जांच करें कि उन पर बने ग्रूव्स में पर्याप्त गहराई है या नहीं। एक 10 रुपये का सिक्का लें और उसे टायर के ग्रूव्स के बीच रखें। अगर अशोक स्तंभ का शीर्ष दिखाई देता है, तो टायर को बदलने का समय आ गया है। टायर के ग्रूव्स की गहराई कम से कम दो मिलीमीटर होनी चाहिए।
टायर की लाइफ चेक करें
मॉडर्न टायरों को गर्मी बढ़ने, घर्षण और दरार का सामना करने के लिए डिजाइन किया जाता है। हालांकि, लाइफ और अत्यधिक इस्तेमाल के साथ, खासकर भारत जैसे देश में, जहां सड़क की स्थिति अक्सर खराब होती है और मौसम की स्थिति या तो बहुत गर्म या ठंडा हो सकता है। ऐसे में तापमान और सड़क से होने वाला घर्षण टायर के रबर के भौतिक गुणों को प्रभावित करते हैं। जो सख्त हो जाते हैं और विशेष रूप से किनारों पर बारीक दरारें हो जाती हैं।
मॉडर्न टायरों को गर्मी बढ़ने, घर्षण और दरार का सामना करने के लिए डिजाइन किया जाता है। हालांकि, लाइफ और अत्यधिक इस्तेमाल के साथ, खासकर भारत जैसे देश में, जहां सड़क की स्थिति अक्सर खराब होती है और मौसम की स्थिति या तो बहुत गर्म या ठंडा हो सकता है। ऐसे में तापमान और सड़क से होने वाला घर्षण टायर के रबर के भौतिक गुणों को प्रभावित करते हैं। जो सख्त हो जाते हैं और विशेष रूप से किनारों पर बारीक दरारें हो जाती हैं।
यह टायर के ओवरऑल परफॉर्मेंस (समग्र प्रदर्शन) को प्रभावित करता है। और कुछ मामलों में टायर फटने का कारण बन सकता है। इसलिए, टायरों की लाइफ की जांच करना महत्वपूर्ण है। निर्माता टायर के लाइफ के रूप में निर्माण की तारीख से अधिकतम 10 वर्ष का दावा करते हैं। यह कितना इस्तेमाल हुआ और ड्राइविंग परिस्थितियों के आधार पर कम हो सकता है।
निर्माता द्वारा तय एयर प्रेशर रखें
सभी वाहन निर्माता वाहनों के लिए अनुशंसित एयर प्रेशर का जिक्र करते हैं। वाहन मालिकों को सिर्फ उसी सिफारिश के आधार पर टायरों को फुलाना चाहिए। जबकि कम हवा वाला टायर परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है। वहीं, ज्यादा हवा भरने से टायर के फटने का खतरा रहता है।
सभी वाहन निर्माता वाहनों के लिए अनुशंसित एयर प्रेशर का जिक्र करते हैं। वाहन मालिकों को सिर्फ उसी सिफारिश के आधार पर टायरों को फुलाना चाहिए। जबकि कम हवा वाला टायर परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है। वहीं, ज्यादा हवा भरने से टायर के फटने का खतरा रहता है।