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Auto Sales: त्योहारी सीजन पर टिकी हुई हैं कार निर्माताओं की पूरी उम्मीदें, बिक्री में बढ़ोतरी पर सारा दारोमदार
Thu, 10 Oct 2024 10:33 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 10 Oct 2024 10:33 PM IST
सार
भारतीय कार निर्माताओं को उम्मीद है कि चल रहे त्योहारी सीजन में उनकी बिक्री में बहुत ज्यादा इजाफा होगा। सुस्त मांग और बाजार में मंदी के संकेत के कारण इन्वेंट्री का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है।
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Automobile Industry
- फोटो : PTI
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विस्तार
भारतीय कार निर्माताओं को उम्मीद है कि चल रहे त्योहारी सीजन में उनकी बिक्री में बहुत ज्यादा इजाफा होगा। सुस्त मांग और बाजार में मंदी के संकेत के कारण इन्वेंट्री का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ रहा है। इसलिए निर्माता उपभोक्ता खर्च में मौसमी उछाल पर भरोसा कर रहे हैं। ताकि स्टॉक को खाली करने और विकास को बढ़ावा देने में मदद मिल सके।
शीर्ष निर्माताओं ने बिक्री को बढ़ावा देने के लिए हाल के महीनों में अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों पर 2 लाख रुपये तक की छूट का एलान किया है। हालांकि, यह अभी तक वास्तविक बिक्री में पूरी तरह से तब्दील नहीं हुआ है।
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शीर्ष निर्माताओं ने बिक्री को बढ़ावा देने के लिए हाल के महीनों में अपने सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडलों पर 2 लाख रुपये तक की छूट का एलान किया है। हालांकि, यह अभी तक वास्तविक बिक्री में पूरी तरह से तब्दील नहीं हुआ है।
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भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग अब उम्मीद है क्योंकि 2024 के लिए श्राद्ध अवधि 2 अक्तूबर को समाप्त हो गई है, जो 16 दिवसीय पितृ पक्ष का समापन है, जो 17 सितंबर से शुरू हुआ था।
हिंदू मान्यता को मानने वाले आमतौर पर श्राद्ध के दिनों में नई खरीदारी करने से बचते हैं। हालांकि कई लोग मानते हैं कि इस मान्यता को लेकर कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है और वे नई खरीदारी करने से परहेज नहीं करते। पिछले साल, श्राद्ध 14 अक्तूबर तक होने के बावजूद, भारतीय कार निर्माताओं ने उच्च आधार के बावजूद 3,53,990 यूनिट्स बेचीं। चूंकि श्राद्ध अक्तूबर की शुरुआत में समाप्त होता है और छूट बढ़ जाती है, इसलिए कंपनियों को बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है।
हिंदू मान्यता को मानने वाले आमतौर पर श्राद्ध के दिनों में नई खरीदारी करने से बचते हैं। हालांकि कई लोग मानते हैं कि इस मान्यता को लेकर कोई शास्त्रीय प्रमाण नहीं है और वे नई खरीदारी करने से परहेज नहीं करते। पिछले साल, श्राद्ध 14 अक्तूबर तक होने के बावजूद, भारतीय कार निर्माताओं ने उच्च आधार के बावजूद 3,53,990 यूनिट्स बेचीं। चूंकि श्राद्ध अक्तूबर की शुरुआत में समाप्त होता है और छूट बढ़ जाती है, इसलिए कंपनियों को बिक्री में तेजी आने की उम्मीद है।
ओणम और गणेश चतुर्थी की शुरुआत, जो परंपरागत रूप से भारत के वार्षिक त्योहारी सीजन की शुरुआत का प्रतीक है, ने उम्मीद के मुताबिक बिक्री को पुनर्जीवित नहीं किया है। हालांकि, नवरात्रि और दिवाली एक ही महीने में पड़ने के कारण, वाहन निर्माता आशावादी हैं कि बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के चैनल चेक के अनुसार, शुरुआती त्योहारी सीजन ने सीमित रफ्तार दिखाई है। जिससे आगामी नवरात्रि-दिवाली की अवधि समग्र FY25 बिक्री के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के चैनल चेक के अनुसार, शुरुआती त्योहारी सीजन ने सीमित रफ्तार दिखाई है। जिससे आगामी नवरात्रि-दिवाली की अवधि समग्र FY25 बिक्री के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
इस बीच, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के ताजा खुदरा बिक्री डेटा यात्री वाहन खंड में चल रही चुनौतियों का संकेत देते हैं। क्योंकि लगातार तीसरे महीने बिक्री में गिरावट आई है, जिससे रिकॉर्ड-उच्च इन्वेंट्री स्तर हो गया है।
सितंबर में, श्राद्ध अवधि के अलावा, भारी बारिश के कारण भी बिक्री में कमी आई। जिसकी वजह से खरीदारी में देरी हुई और बाजार में सुस्ती रही। यात्री वाहन खुदरा बिक्री घटकर 275,681 यूनिट्स रह गई। जो पिछले साल इसी महीने के दौरान बेची गई 339,543 यूनिट्स से 18.81 प्रतिशत कम है।
सितंबर में, श्राद्ध अवधि के अलावा, भारी बारिश के कारण भी बिक्री में कमी आई। जिसकी वजह से खरीदारी में देरी हुई और बाजार में सुस्ती रही। यात्री वाहन खुदरा बिक्री घटकर 275,681 यूनिट्स रह गई। जो पिछले साल इसी महीने के दौरान बेची गई 339,543 यूनिट्स से 18.81 प्रतिशत कम है।
इसके अलावा, सितंबर की बिक्री अगस्त में बेची गई 309,053 यूनिट्स से कम थी। बिक्री में इस निरंतर गिरावट ने डीलरों को ऐतिहासिक रूप से उच्च इन्वेंट्री स्तरों के साथ छोड़ दिया है, जो औसतन 80-85 दिन है। जो कि FADA के अनुसार लगभग 790,000 वाहनों के बराबर है, जिनकी कीमत 79,000 करोड़ रुपये है।
सर्वकालिक उच्च इन्वेंट्री स्तरों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अक्तूबर में बिक्री में अपेक्षित सुधार नहीं होता है। तो डीलरों को अपने गोदामों में जमा हुए बिना बिके स्टॉक से महत्वपूर्ण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
सर्वकालिक उच्च इन्वेंट्री स्तरों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अक्तूबर में बिक्री में अपेक्षित सुधार नहीं होता है। तो डीलरों को अपने गोदामों में जमा हुए बिना बिके स्टॉक से महत्वपूर्ण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
FADA के अध्यक्ष, सी एस विग्नेश्वर ने कहा, "जबकि डीलर और ओईएम मजबूत त्योहारी बिक्री पर दांव लगा रहे हैं। खासकर ग्रामीण बाजारों में जहां सकारात्मक नकदी प्रवाह और बेहतर कृषि स्थितियों से मांग बढ़ने की उम्मीद है, नतीजा अनिश्चित बना हुआ है। अतिरिक्त इन्वेंट्री को साफ करने और वित्त वर्ष 25 के शेष के लिए पॉजिटिव ग्रोथ ट्रेजेक्ट्री (सकारात्मक वृद्धि प्रक्षेपवक्र) निर्धारित करने के लिए एक कामयाब अक्तूबर जरूरी है।"
उन्होंने कहा, "ग्राहकों की बढ़ती पूछताछ और आशावादी डीलर भावनाओं के साथ, दृष्टिकोण आशावादी होने की ओर झुकता है। लेकिन उच्च दांव और अक्तूबर के प्रदर्शन पर निर्भरता एक सतर्क दृष्टिकोण की मांग करती है। अगर प्रत्याशित बिक्री नहीं होती है, तो यह दृष्टिकोण को निराशावादी बना सकता है। जिससे डीलरों के साथ-साथ ओईएम को नए साल में मुश्किल स्थिति में डाल सकता है।"