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Electric Vehicles: क्या भविष्य में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों का वजूद हो जाएगा खत्म? जानिए सच्चाई

Tue, 11 Feb 2025 07:37 AM IST
नीतीश कुमार ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नीतीश कुमार Updated Tue, 11 Feb 2025 07:37 AM IST
सार

आने वाले कुछ दशकों में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की संख्या में भारी गिरावट आ सकती है, लेकिन इनका पूरी तरह से खत्म होना फिलहाल संभव नहीं दिखता। कई कारणों से पारंपरिक ईंधन वाले वाहन अभी भी जरूरी बने रह सकते हैं।

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Can Electric Vehicles Replace Petrol And Diesel Vehicles Completely Know Truth
कैसा होगा ई-वाहनों का भविष्य - फोटो : JSW MG Motor India

विस्तार

Future Of EVs: दुनिया भर में प्रदूषण और तेल के सीमित भंडार को देखते हुए कई देश पेट्रोल-डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों को धीरे-धीरे समाप्त करने की योजना बना रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को इसका सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है। भारत समेत कई देशों में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए सरकारें विशेष नीतियां बना रही हैं। 
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लेकिन क्या इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह से पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की जगह ले पाएंगे? यह बदलाव कितना व्यावहारिक होगा और इसमें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा? इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमें मौजूदा हालात और भविष्य की संभावनाओं को समझना होगा।
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क्या पेट्रोल-डीजल गाड़ियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी?

Can Electric Vehicles Replace Petrol And Diesel Vehicles Completely Know Truth
क्या पेट्रोल-डीजल गाड़ियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी? - फोटो : FREEPIK
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दशकों में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों की संख्या में भारी गिरावट आ सकती है, लेकिन इनका पूरी तरह से खत्म होना फिलहाल संभव नहीं दिखता। कई कारणों से पारंपरिक ईंधन वाले वाहन अभी भी जरूरी बने रह सकते हैं।

EV अपनाने में मौजूदा समस्याएं
सबसे बड़ी समस्या चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की है। पेट्रोल पंप हर शहर, कस्बे और हाईवे पर आसानी से मिल जाते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या अभी काफी कम है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में दिक्कत होती है, खासकर लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान।

दूसरी बड़ी चुनौती लंबी दूरी की यात्रा को लेकर है। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन लंबी दूरी तय करने में अधिक सक्षम होते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बार-बार चार्ज करने की जरूरत होती है। हालांकि कुछ हाई-रेंज वाली इलेक्ट्रिक कारें बाजार में आ चुकी हैं, लेकिन उनकी कीमत आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक है। इसके अलावा, ट्रक, बस और अन्य कमर्शियल गाड़ियां अभी भी पेट्रोल-डीजल पर ज्यादा निर्भर हैं क्योंकि इलेक्ट्रिक ट्रकों की बैटरी टेक्नोलॉजी अभी उतनी विकसित नहीं हुई है।
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चार्जिंग स्टेशनों की है कमी - फोटो : FREEPIK
इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने में एक और बड़ी चुनौती उनकी कीमत को लेकर है। पारंपरिक वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की शुरुआती लागत अधिक होती है। हालांकि सरकारें सब्सिडी और अन्य प्रोत्साहन दे रही हैं, फिर भी यह आम लोगों के लिए एक महंगा विकल्प बना हुआ है। इसके अलावा, नई बैटरी की अधिक लागत और सीमित जीवनकाल भी एक बड़ी समस्या है। समय के साथ बैटरी की क्षमता घटती जाती है और नई बैटरी खरीदना काफी महंगा पड़ता है।

बैटरी को चार्ज करना भी इलेक्ट्रिक वाहनों की एक बड़ी समस्या है। पेट्रोल या डीजल भरवाने में कुछ ही मिनट लगते हैं, जबकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बैटरी को पूरी तरह चार्ज होने में घंटों का समय लग सकता है। हालांकि फास्ट चार्जिंग तकनीक विकसित की जा रही है, लेकिन यह सुविधा अभी सभी चार्जिंग स्टेशनों पर उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, अत्यधिक ठंडे या गर्म इलाकों में बैटरी की परफॉर्मेंस प्रभावित होती है, जिससे गाड़ी की रेंज कम हो जाती है।
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प्रदूषण का कारण बन सकती ही ईवी की बैटरी

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Electric car EV charging battery at charger station - फोटो : Freepik
इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण समस्या बैटरियों को डिस्पोज करने और पर्यावरण पर उनके प्रभाव को लेकर है। हालांकि ये गाड़ियां चलते समय प्रदूषण नहीं फैलातीं, लेकिन उनकी बैटरियों के निर्माण और रीसायकल से पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है। यदि बैटरियों के सुरक्षित और सुरक्षित डिस्पोजल की व्यवस्था नहीं की जाती, तो यह भविष्य में एक गंभीर चुनौती बन सकती है।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मुश्किल है रेस
भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहन तेजी से बढ़ सकते हैं और पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की संख्या में भारी गिरावट आ सकती है। लेकिन पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों पर शिफ्ट होने में अभी समय लगेगा। आने वाले वर्षों में बैटरी टेक्नोलॉजी, चार्जिंग नेटवर्क और उत्पादन लागत में सुधार होने के बाद इलेक्ट्रिक गाड़ियां ज्यादा किफायती और व्यवहारिक बन सकती हैं। हालांकि, हाइब्रिड और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहन भी इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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