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VAHAN: सीएजी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, उत्तर-पूर्व राज्यों में 16,000 वाहनों के चेसिस-इंजन नंबर एक जैसे

Sat, 21 Feb 2026 04:00 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 21 Feb 2026 04:00 PM IST
सार

हाल ही में आई कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट से पता चला है कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों में एक ही चेसिस और इंजन नंबर वाली करीब 16,000 गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं।

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CAG Report Finds Duplicate Vehicle Registrations Across Assam and NE States
Vehicle Registration - फोटो : Freepik

विस्तार

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की एक हालिया रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में करीब 16,000 वाहन ऐसे पाए गए हैं जिनके चेसिस और इंजन नंबर एक जैसे हैं। यह रिपोर्ट असम विधानसभा के 126 सदस्यीय सदन में हाल ही में पेश की गई।

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VAHAN डेटा जांच में क्या सामने आया?
ऑडिट के दौरान VAHAN डेटाबेस की जांच में यह पाया गया कि असम समेत सात अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में 15,849 वाहन ऐसे हैं, जिनके चेसिस और इंजन नंबर समान हैं। और वे दो या उससे अधिक राज्यों में रजिस्टर्ड हैं। 
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इनमें से 12,112 वाहन (करीब 76 प्रतिशत) असम में बिना नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) के पंजीकृत पाए गए।

कानून के हिसाब से यह कितना गंभीर मामला है? 
मोटर वाहन कानून के तहत किसी भी समय एक वाहन का पंजीकरण नंबर और चेसिस-इंजन नंबर यूनिक (उसके जैसा कोई दूसरा नहीं) होना अनिवार्य है। यदि कोई वाहन एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित (ट्रांसफर) होता है, तो पहले पुराने पंजीकरण को रद्द करना जरूरी होता है। इस नियम का उल्लंघन गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जाती है।

परिवहन परमिट जारी करने में क्या गड़बड़ी पाई गई?
रिपोर्ट में आठ जिला परिवहन कार्यालयों (DTO) में परिवहन परमिट जारी करने की प्रक्रिया में भारी विसंगतियां भी सामने आई हैं।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन रिपोर्टों के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच 1,19,369 पंजीकृत वाहनों के मुकाबले केवल 26,105 परमिट जारी किए गए, जो महज 21.98 प्रतिशत है।

स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर क्या चिंता जताई गई?
सीएजी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि आठ जिलों में स्कूल बसों को शैक्षणिक संस्थान बस (EIB) परमिट की जगह अनुबंध गाड़ी परमिट जारी किए गए। इससे अनिवार्य फिटनेस जांच को दरकिनार कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूल परिवहन की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य को ही कमजोर करती है। 

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टैक्स वसूली में कितनी बड़ी चूक सामने आई?
रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 1.29 लाख कमर्शियल वाहनों में से 29,560 वाहनों ने मोटर वाहन टैक्स जमा नहीं किया। इससे मार्च 2024 तक सरकार को

  • 61.28 करोड़ रुपये का टैक्स नुकसान

  • और 24.53 करोड़ रुपये का जुर्माना नुकसान हुआ।

इसके अलावा, आठ जिलों में 1.51 लाख वाहनों से मोटर व्हीकल टैक्स में अंतर पर जुर्माना वसूल नहीं किया गया। जिससे सरकार को 3.79 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व नुकसान हुआ। सात DTO में 64 प्रतिशत पेनल्टी अब तक वसूल नहीं हो पाई, जिससे प्रवर्तन व्यवस्था कमजोर पड़ी है।

प्रदूषण नियंत्रण और स्टाफ की कमी कितनी बड़ी समस्या है?
रिपोर्ट में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों के पालन में भी गंभीर खामियां पाई गईं। CAG ने कहा कि असम में वाहनों की संख्या, परिवहन विभाग की स्टाफ क्षमता से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी है।
विभाग में 30 से 57 प्रतिशत तक पद खाली हैं, जिससे नियमों को लागू करने की क्षमता पर सीधा असर पड़ रहा है। 

ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में क्या गड़बड़ी सामने आई?
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 7.85 प्रतिशत लर्नर लाइसेंस और ड्राइविंग लाइसेंस मामलों में ड्राइविंग टेस्ट की तारीख दर्ज ही नहीं की गई। इससे बिना उचित मूल्यांकन के लाइसेंस जारी होने की आशंका जताई गई है।

इसके अलावा, ड्राइविंग टेस्ट स्लॉट के विश्लेषण में पाया गया कि 2019-2024 के दौरान 40 मामलों में से 24 में एक दिन में असामान्य रूप से ज्यादा टेस्ट दिखाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रक्रियागत लापरवाही या मूल्यांकन की गंभीरता से समझौते की ओर इशारा करता है। 

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