Budget 2026-27: भारत का EV मिशन, लिथियम-आयन और रेयर अर्थ खनिजों के लिए सरकार का बड़ा दांव
बजट 2026-27 में भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने और चीन पर निर्भरता घटाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया है। ऑटो सेक्टर की PLI स्कीम का बजट बढ़ाकर ₹5,939 करोड़ कर दिया गया है, ताकि देश में ईवी उत्पादन को गति मिल सके। हालांकि, लिथियम-आयन सेल निर्माण में देरी के चलते बैटरी सेल के बजट में कटौती की गई है।
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विस्तार
भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चलन को बढ़ाने और चीन पर निर्भरता खत्म करने के लिए एक ठोस योजना तैयार की है। 2026-27 के बजट के जरिए सरकार का लक्ष्य न केवल भारत में ही गाड़ियों के पुर्जे बनाना है, बल्कि बैटरी के लिए जरूरी कच्चे माल की सप्लाई को भी सुरक्षित करना है, ताकि भारत इस क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।
ऑटो PLI बजट में भारी बढ़ोतरी, लेकिन सेल निर्माण में देरी
सरकार ने साल 2026-27 के लिए ऑटो सेक्टर की PLI स्कीम का बजट दोगुने से भी ज्यादा बढ़ाकर ₹5,939 करोड़ कर दिया है, ताकि देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के उत्पादन को रफ्तार दी जा सके। लेकिन इसके उलट, बैटरी बनाने (लिथियम-आयन सेल) के बजट में 45% की कटौती की गई है। इस कटौती की बड़ी वजह यह है कि ओला और रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों की फैक्ट्रियों का काम तय समय से थोड़ा पीछे चल रहा है, जिससे उन्हें मिलने वाली सरकारी सहायता में फिलहाल कमी आई है।
चीन की चुनौती और आयात शुल्क में राहत
भारत फिलहाल बैटरी सेल के लिए पूरी तरह से चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों पर निर्भर है, जहां अकेले चीन से ही 75% से ज्यादा आयात होता है। अब डर यह है कि चीन अपनी सब्सिडी खत्म कर सकता है जिससे भविष्य में बैटरियां महंगी हो जाएंगी। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने भारतीय कंपनियों को राहत दी है। अब बैटरी बनाने वाली मशीनें मंगाने पर कोई टैक्स नहीं लगेगा और बाहर से आने वाले सेल पर मिलने वाली 5% की टैक्स छूट को भी बरकरार रखा गया है, ताकि देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें काबू में रहें।
रेयर अर्थ खनिजों के लिए चार विशेष कॉरिडोर
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मोटर और मैग्नेट बनाने के लिए कुछ खास खनिजों (रेयर अर्थ मिनरल्स) की जरूरत होती है। इनकी कमी को दूर करने के लिए सरकार ने आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और ओडिशा में विशेष कॉरिडोर बनाने का फैसला किया है। साथ ही, देश में ही मैग्नेट बनाने को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ₹7,280 करोड़ के फंड को मंजूरी दी है, जिसमें भारत फोर्ज, JSW और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों ने निवेश करने में काफी दिलचस्पी दिखाई है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
मारुति सुजुकी के एमडी हिसाशी ताकेउची का मानना है कि बजट में सेमीकंडक्टर और खास खनिजों पर ध्यान देना एक बहुत ही समझदारी भरा कदम है, जिससे गाड़ियां बनाने का सामान मिलने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इसी तरह टाटा मोटर्स के एमडी शैलेश चंद्रा ने भी सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि खनन और प्रोसेसिंग के लिए अलग से कॉरिडोर बनाने से सामान की सप्लाई आसान होगी और भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी।
भविष्य की राह: 2030 तक का लक्ष्य
भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी खुद की इतनी बड़ी बैटरी फैक्ट्रियां (गीगाफैक्ट्री) तैयार करना है कि हम 100GWh से ज्यादा की बिजली स्टोर करने वाली बैटरियां बना सकें। इस बड़े मिशन में रिलायंस, टाटा, जेएसडब्ल्यू और एक्साइड जैसी बड़ी कंपनियां दिन-रात काम कर रही हैं। अगर ये प्रोजेक्ट सफल हो जाते हैं, तो भारत न केवल अपनी जरूरतों के लिए खुद बैटरी बना पाएगा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों की सप्लाई करने वाला एक बड़ा हब बन जाएगा।