Superman: वो चालक जिसने अपने ऑटो को बना दिया चलता-फिरता आरामघर, यहां मिलता है सबकुछ, जानें सुपरमैन की कहानी
बेंगलुरु के ऑटो ड्राइवर मणिवेल जो खुद को सुपरमैन कहते हैं। इन्होंने अपने ऑटो को यात्रियों की जरूरतों से भर दिया है, लेकिन इस सुपरमैन की असली कहानी कुछ और ही है। इस लेख में जानते है इस सुपरमैन के बारे में विस्तार से।
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विस्तार
बेंगलुरू के रहने वाले मणिवेल करीब पांच साल से ऑटो रिक्शा चला रहे हैं। इन्होंने अपने आम ऑटो को सुपर ऑटो में बदल दिया। इनके ऑटो में सैनिटरी नैपकिन, पंखा, वाई-फाई, पानी की बोतलें, छोटा टीवी स्क्रीन, सीसीटीवी कैमरा और यहां तक कि कन्नड़ सीखने वाली किताबें पांच भाषाओं (अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु और मलयालम) में उपलब्ध हैं। ये वे चीजें हैं जिनकी कल्पना कोई ऑटो-रिक्शा में नहीं कर सकता है, लेकिन मणिवेल सी. के ऑटो में ये सब कुछ है और इस ऑटो में कई स्टीकर्स भी लगे है, लेकिन इनमें जो सबसे अलग दिखता है वो है गर्भवती महिलाओं और डायलिसिस मरीजों के लिए 10 किमी के अंदर तक मुफ्त सेवा।
कैसे आया यह सुपर आइडिया?
मणिवेल को यह आइडिया तब आया जब 2017 में उनकी पत्नी गर्भवती थीं। उस वक्त उनके पास गाड़ी नहीं थी और अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल होता था। कई ऑटो ड्राइवर कम दूरी की सवारी करने से मना कर देते थे ऐसे में दंपति को विजयनगर में अपने घर से जीटी मॉल तक करीब एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था। वह निकटतम लैंडमार्क जहां से आखिरकार ऑटो मिल जाता था। इस दर्दनाक अनुभव ने मणिवेल के मन में एक विचार जगाया कि अब कोई भी गर्भवती महिला या डायलिसिस मरीज ऐसे हालात में नहीं फंसेगा।
फ्री सवारी और हर महीने 5 हजार की देखभाल
आज मणिवेल हर गर्भवती महिला और डायलिसिस मरीज को 10 किलोमीटर तक मुफ्त राइड देते हैं। अपने एक दोस्त की किडनी फेल होने के बाद उन्होंने डायलिसिस मरीजों को भी इस सेवा में शामिल किया। ऑटो में सभी सुविधाएं बनाए रखने के लिए मणिवेल अपनी कमाई से हर महीने करीब 4000 से 5000 रुपये खर्च करते हैं । पानी, पंखे की बैटरी, वाई-फाई बिल, सैनेटरी पैड्स और छोटी-मोटी मरम्मत के लिए।
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जब यात्री ने उतरने से मना कर दिया
मणिवेल ने बताया कि लोग लंबे दिन के काम के बाद थके-हारे और तनावग्रस्त होकर ऑटो में चढ़ते हैं। फिर धीरे-धीरे आसपास की चीजें नोटिस करते हैं। कोई वाई-फाई का साइन देखता है, तो कोई कन्नड़ की किताब उठाता है या पानी की बोतल। ऐसी छोटी चीजों से उनका मूड बदल जाता है। कई बार लोग मुझसे पूछते हैं कि मैने ये सब कैसे सोचा ? और कुछ कहते हैं कि अगर तीन पहिये वाले वाहन इतनी क्रिएटिव हो सकते हैं, तो वे भी अपने काम में कुछ ऐसा नया करेंगे। ग्राहकों के साथ अपने यादगार अनुभवों को याद करते हुए मणिवेल ने बताया कि हाल के आईपीएल सीजन के दौरान एक यात्री ने उनके ऑटो के छोटे स्क्रीन पर मैच देखना शुरू कर दिया और मैच खत्म होने तक उतरने से मना कर दिया। विजयनगर से सदाशिवनगर की छोटी यात्रा तीन घंटे की हो गई, जहां दोनों ने साथ में मैच देखा और यात्री ने 3000 रुपये दिए।
जल्द लॉन्च होगा सुपर ऑटो एप
हैदराबाद की एक पहल से प्रेरित होकर उन्होंने अपना एप सुपर ऑटो बनाया है। यूट्यूब ट्यूटोरियल्स और कुछ डेवलपर्स की मदद से उन्होंने एक प्लेटफॉर्म बनाना शुरू किया है जहां अन्य ऑटो-रिक्शा ड्राइवर रजिस्टर कर सकते हैं। बशर्ते वे अपने वाहनों में उनके जैसी ही सुविधाएं लगाएं। एप जो कुछ महीनों में लॉन्च होगा, सामान्य बेस किराए से करीब 30 रुपये ज्यादा लेगा। मणिवेल ने कहा कि वे इसके सीईओ होंगे और हर रजिस्टर्ड वाहन और ड्राइवर को खुद वेरिफाई करेंगे। उनका मानना है कि अगर लोग कहीं और आराम के लिए थोड़ा ज्यादा खर्च कर सकते हैं, तो प्रीमियम ऑटो के लिए क्यों नहीं यहां तो सिर्फ 30 रुपये का सवाल है।