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Automobile Industry: ऑटो निर्माताओं के संगठन ने कहा- ऑटो क्षेत्र भारत के जीएसटी में लगभग 15% का देता है योगदान
Mon, 09 Sep 2024 09:10 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 09 Sep 2024 09:10 PM IST
सार
भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग ने वित्त वर्ष 24 में 20 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। और अब देश में एकत्रित कुल जीएसटी में इसका योगदान 14-15 प्रतिशत है।
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- फोटो : Freepik
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विस्तार
भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग ने वित्त वर्ष 24 में 20 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। और अब देश में एकत्रित कुल जीएसटी में इसका योगदान 14-15 प्रतिशत है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चर्रस (SIAM) (सियाम) के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अग्रवाल नई दिल्ली में 64वें वार्षिक ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) सत्र में बोल रहे थे, जहां उन्होंने कहा, ऑटो सेक्टर देश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
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अग्रवाल नई दिल्ली में 64वें वार्षिक ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) सत्र में बोल रहे थे, जहां उन्होंने कहा, ऑटो सेक्टर देश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
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अग्रवाल ने कहा, "भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने वित्त वर्ष 24 में 20 लाख करोड़ रुपये (लगभग 240 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है... हम देश में एकत्र किए गए कुल जीएसटी का लगभग 14-15 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं।"
उन्होंने कहा, ऑटो उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद में मौजूदा स्तर लगभग 6.8 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देगा।
उन्होंने कहा, यह सिर्फ बढ़ोतरी संख्या नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी) में परिवर्तन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ऑटो उद्योग देश के सकल घरेलू उत्पाद में मौजूदा स्तर लगभग 6.8 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देगा।
उन्होंने कहा, यह सिर्फ बढ़ोतरी संख्या नहीं है, बल्कि टेक्नोलॉजी (प्रौद्योगिकी) में परिवर्तन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अग्रवाल ने कहा कि विश्व स्तर पर भी भारतीय ऑटो उद्योग का स्तर बढ़ा है।
उन्होंने कहा, "हम तीसरे सबसे बड़े यात्री वाहन बाजार, सबसे बड़े दो पहिया और तीन पहिया बाजार और तीसरे सबसे बड़े वाणिज्यिक वाहन बाजार बन गए हैं। क्योंकि देश 2047 तक विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है।"
अग्रवाल ने कहा, ऑटोमोबाइल उद्योग और भी तेजी से बढ़ने और देश के विकास में बहुत ज्यादा योगदान देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि ऑटो उद्योग ने आयात निर्भरता को कम करने के लिए स्थानीय उत्पादन के लिए 50 महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स (घटकों) की पहचान की है।
उन्होंने कहा, "हम तीसरे सबसे बड़े यात्री वाहन बाजार, सबसे बड़े दो पहिया और तीन पहिया बाजार और तीसरे सबसे बड़े वाणिज्यिक वाहन बाजार बन गए हैं। क्योंकि देश 2047 तक विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है।"
अग्रवाल ने कहा, ऑटोमोबाइल उद्योग और भी तेजी से बढ़ने और देश के विकास में बहुत ज्यादा योगदान देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि ऑटो उद्योग ने आयात निर्भरता को कम करने के लिए स्थानीय उत्पादन के लिए 50 महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स (घटकों) की पहचान की है।
अग्रवाल ने कहा कि SIAM ने ACMA के साथ स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ाने की यात्रा शुरू की और स्वेच्छा से स्थानीयकरण बढ़ाने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए हैं।
अग्रवाल ने एसीएमए के वार्षिक सत्र में कहा, "यह 2019-20 के आधार स्तर से 2025 तक आयात सामग्री को 60 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिससे पांच वर्षों में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की कमी का लक्ष्य रखा गया है। हमने पहले दो वर्षों में आयात में 5.8 प्रतिशत की कमी के पहले चरण को बहुत अच्छी तरह से हासिल किया है।"
अगले स्तर पर जाने और उच्च तकनीक वाले महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्माण शुरू करने के लिए, जिनके लिए उद्योग आयात पर निर्भर रहा है, उद्योग ने अब 50 महत्वपूर्ण घटकों की सूची की पहचान की है।
अग्रवाल ने एसीएमए के वार्षिक सत्र में कहा, "यह 2019-20 के आधार स्तर से 2025 तक आयात सामग्री को 60 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिससे पांच वर्षों में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की कमी का लक्ष्य रखा गया है। हमने पहले दो वर्षों में आयात में 5.8 प्रतिशत की कमी के पहले चरण को बहुत अच्छी तरह से हासिल किया है।"
अगले स्तर पर जाने और उच्च तकनीक वाले महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्माण शुरू करने के लिए, जिनके लिए उद्योग आयात पर निर्भर रहा है, उद्योग ने अब 50 महत्वपूर्ण घटकों की सूची की पहचान की है।
अग्रवाल ने कहा, "हम ACMA सदस्यों को भारत में उनका निर्माण शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं ताकि वाहन OEM इन वस्तुओं को स्थानीय स्तर पर हासिल कर सकें।"
उन्होंने कहा, चूंकि इनमें से ज्यादातर वस्तुएं इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स हैं, इसलिए ऐसे उच्च तकनीक वाले वस्तुओं के लिए भारत में क्षमताएं विकसित करने की जरूरत है।
अग्रवाल ने कहा, इसके अलावा, गैसोलीन और डीजल जैसी पारंपरिक इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता रखने के साथ-साथ, उद्योग ने अब CNG और इलेक्ट्रिफाइड वाहनों जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइब्रिड वाहनों सहित कई पावरट्रेन में मजबूत क्षमताएं विकसित की हैं।
उन्होंने कहा, उद्योग हाइड्रोजन और फ्यूल सेल आधारित टेक्नोलॉजी को भी विकसित कर रहा है।
उन्होंने कहा, चूंकि इनमें से ज्यादातर वस्तुएं इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स हैं, इसलिए ऐसे उच्च तकनीक वाले वस्तुओं के लिए भारत में क्षमताएं विकसित करने की जरूरत है।
अग्रवाल ने कहा, इसके अलावा, गैसोलीन और डीजल जैसी पारंपरिक इंटरनल कंब्शन इंजन (ICE) टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता रखने के साथ-साथ, उद्योग ने अब CNG और इलेक्ट्रिफाइड वाहनों जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइब्रिड वाहनों सहित कई पावरट्रेन में मजबूत क्षमताएं विकसित की हैं।
उन्होंने कहा, उद्योग हाइड्रोजन और फ्यूल सेल आधारित टेक्नोलॉजी को भी विकसित कर रहा है।
अग्रवाल ने कहा, "आगे बढ़ते हुए, जैसे-जैसे देश की आकांक्षाएं बढ़ती हैं, हमें स्वच्छ और सुरक्षित वाहनों पर अधिक से अधिक आक्रामक रूप से ध्यान केंद्रित करना होगा।"
उन्होंने कहा, "हम भारी उद्योग मंत्रालय के भी आभारी हैं कि उन्होंने 2024 से 2047 तक तीसरी ऑटोमोबाइल मिशन योजना विकसित करने की जरूरत की पहचान की है। जो इन वर्षों में उद्योग के विकास के व्यापक नियंत्रणों को निर्धारित करेगी। तीन अलग-अलग चरणों में, अब से 2030 तक, 2030 से 2037 तक और आखिरी में, 2037 से 2047 तक।"
उन्होंने कहा, "हम भारी उद्योग मंत्रालय के भी आभारी हैं कि उन्होंने 2024 से 2047 तक तीसरी ऑटोमोबाइल मिशन योजना विकसित करने की जरूरत की पहचान की है। जो इन वर्षों में उद्योग के विकास के व्यापक नियंत्रणों को निर्धारित करेगी। तीन अलग-अलग चरणों में, अब से 2030 तक, 2030 से 2037 तक और आखिरी में, 2037 से 2047 तक।"
उन्होंने कहा कि ऑटोमैटिक मिशन योजना न सिर्फ पूरे ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए देश में निवेश की प्रतिबद्धता और योजना बनाने के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज बन जाएगी। बल्कि भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों और कई राज्य सरकारों के लिए भी ऑटो क्षेत्र के विकास और अनुसंधान के साथ अलाइन करने के लिए उपयुक्त नीतिगत उपाय तैयार करने के लिए एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में काम करेगी।
अग्रवाल ने कहा, "हम ऑटोमोटिव मिशन योजना के अंतिम दस्तावेज का इंतजार कर रहे हैं।"
अग्रवाल ने कहा, "हम ऑटोमोटिव मिशन योजना के अंतिम दस्तावेज का इंतजार कर रहे हैं।"
सत्र में बोलते हुए, ACMA की अध्यक्ष श्रद्धा सूरी मारवाह ने कहा कि उद्योग ऑटोमोबाइल मिशन योजना के तीसरे वर्जन का इंतजार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उद्योग को विशेष रूप से कौशल अंतर को दूर करने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि उद्योग को विशेष रूप से कौशल अंतर को दूर करने और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने में विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
मारवाह ने कहा, "इसलिए, शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग और कौशल विकास में निवेश जरूरी है। इसके अलावा, उद्योग सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर चिप्स की बढ़ती मांग रणनीतिक गठबंधनों की जरूरत पर जोर देती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर चिप्स की बढ़ती मांग रणनीतिक गठबंधनों की जरूरत पर जोर देती है।