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Indian Automotive Industry: भारतीय ईवी बाजार में रफ्तार, नई सप्लाई चेन व टेक्नोलॉजी से अगला दशक बदलने को तैयार

Sat, 17 Jan 2026 01:50 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Sat, 17 Jan 2026 01:50 PM IST
सार

Auto Industry Transformation: भारतीय ऑटोमोटिव सेक्टर हमेशा बदलावों को अपनाता रहा है, लेकिन मौजूदा दौर बेमिसाल है। इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और पारंपरिक तकनीकों का एक साथ विकास पूरे उद्योग को नई दिशा दे रहा है। 2025 में वाहन लेआउट, मैन्युफैक्चरिंग स्टेप्स और ऑपरेशनल मॉडल में बड़े बदलाव हुए, जिन्होंने भविष्य की नींव रखी।
 

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auto sector rewired for next decade EVs digital technology transform India's pace development
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : adobe stock

विस्तार

भारत की ऑटोमोटिव इंडस्ट्री एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां इलेक्ट्रिफिकेशन, नई नीतियां और सप्लाई चेन का पुनर्गठन भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं। 2025 इस बदलाव का निर्णायक वर्ष साबित हुआ, जब इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री ने नई ऊंचाइयों को छुआ और पूरे वाहन डिजाइन, उत्पादन प्रक्रियाओं और कंपोनेंट इकोसिस्टम में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिला। आने वाले दशक में लागत प्रतिस्पर्धा, स्केल और वैश्विक प्रासंगिकता उन्हीं कंपनियों के पास होगी जो आज सही रणनीतिक फैसले लेंगी।

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इलेक्ट्रिक वाहनों की तेज रफ्तार

2025 में भारत में 20 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन बिके, जो कुल वाहन पंजीकरण का 7.5 प्रतिशत हैं। दोपहिया और तीन पहिया की बात करें तो ईवी पहले ही मुख्य भाग बन चुके हें। जबकि पैसेंजर ईवी अब सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनता जा रहा है। वहीं, कुछ महीनों में ईवी वॉल्यूम में 80 प्रतिशत तक साल दर साल यानी वाईओवाई वृद्धि दर्ज की। इस बदलाव ने कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स को भी अपने डिजाइन और प्रोडक्शन प्रोसेस बदलने पर मजबूर किया है।

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कंपोनेंट इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव

जैसे-जैसे ईवी और हाइब्रिड टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, वैसे-वैसे हाई-प्रिसिजन बेयरिंग्स, ट्रांसमिशन गियर्स, एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम कंपोनेंट्स की मांग भी बढ़ रही है। ईवी के लिए कम एनवीएच (Noise, Vibration, Harshness), बेहतर थर्मल स्टेबिलिटी और लगातार परफॉर्मेंस बेहद जरूरी हो गई है। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है। बैटरी टेक्नोलॉजी, ई-एक्सल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल सिस्टम एक साथ विकसित हो रहे हैं, जिससे वाहन पहले से ज्यादा स्मार्ट, कनेक्टेड और एफिशिएंट बन रहे हैं। कंपनियां जो आज इन तकनीकों में निवेश और सही रणनीतिक फैसले लेंगी, वही अगले 10 वर्षों में लागत प्रतिस्पर्धा, स्केल और मार्केट लीडरशिप तय करेंगी।

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हरित और सुरक्षित मोबिलिटी की ओर जोर

सरकारी नीतियां अब ऑटोमोटिव सेक्टर की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। हरित प्रथाओं को बढ़ावा, सस्टेनेबिलिटी और वाहन सुरक्षा पर सख्त नियम और लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए इंसेंटिव्स उद्योग को तेजी से बदल रहे हैं। अब भारत सरकार का फोकस सर्कुलर इकोनॉमी और एनर्जी सिक्योरिटी पर है, जिससे कंपनियों को न केवल अनुपालन करना पड़ रहा है, बल्कि नए अवसर भी मिल रहे हैं।


ऑटो इंडस्ट्री की पारंपरिक मैकेनिकल वैल्यू चेन अब इलेक्ट्रो-मैकेनिकल और डिजिटल आर्किटेक्चर में बदल रही है। नए मटेरियल्स, टेक्नोलॉजी पार्टनर्स और इंटीग्रेशन मॉडल पूरे इकोसिस्टम को रीशेप कर रहे हैं। इस नए दौर में कंपनियों के लिए उनका आकार नहीं, बल्कि बदलते हालात के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता सबसे बड़ी ताकत बन रही है। इसी के साथ वैश्विक सप्लाई चेन में हालिया व्यवधानों ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय और लचीली सप्लाई चेन अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। मेक इन इंडिया पहल के तहत ईवी और हाई-प्रिसिजन कंपोनेंट्स को प्रोत्साहन मिल रहा है। लोकल प्रोडक्शन से न केवल गुणवत्ता और लागत नियंत्रण बेहतर होता है, बल्कि इंडस्ट्री को बाजार के बदलावों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी मिलती है।

ग्राहक क्या चाहते?

अब ग्राहक केवल वाहन की शुरुआती कीमत नहीं देखते, बल्कि टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप, लंबे समय की विश्वसनीयता, सस्टेनेबिलिटी और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन जैसे फैक्टर उतने ही जरूरी हो गए हैं। खासकर शहरी और फ्लीट सेगमेंट में, जहां वाहन का  अपटाइम सीधे बिजनेस पर असर डालता है, वहां उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ कंपोनेंट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। सस्टेनेबिलिटी अब केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि ऑटोमोटिव रणनीति का केंद्र बन चुकी है। कंपनियां लो-फ्रिक्शन डिजाइन, हल्के और नए मटेरियल्स तथा एडवांस्ड लुब्रिकेशन सिस्टम पर फोकस कर रही हैं। इसका सीधा फायदा एनर्जी एफिशिएंसी, कम उत्सर्जन और लंबे प्रोडक्ट लाइफ के रूप में सामने आ रहा है, जिससे पर्यावरण और बिजनेस दोनों को लाभ होता है।



आने वाले वर्षों में भारत की मोबिलिटी का भविष्य तकनीकी तैयारियों, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और बाजार अपनाने की गति पर निर्भर करेगा। हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पावरट्रेन समानांतर रूप से आगे बढ़ेंगे, जबकि वाहन ज्यादा स्मार्ट और सेंसर-इनेबल्ड होते जाएंगे। मध्यम से लंबे समय में, बढ़ते लोकल निवेश भारत को ग्लोबल प्रिसिजन इंजीनियरिंग हब के रूप में स्थापित करेंगे, वहीं आफ्टरमार्केट भी तेजी से विस्तार करेगा।

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