आॅटोमोबाइल क्षेत्र में आने वाले कुछ दिनों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। जिनमें इलेक्ट्रिक वाहनों का दस्तक देना सबसे बड़ा बदलाव होगा। यू तो कई कार कंपनियां भारत में अपने इलेक्ट्रिक वाहन पेश करने की कवायद शुरू कर चुकी है। फिलहाल इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए रेनो ने अपनी हैचबैक कार क्विड के इलेक्ट्रिक वर्जन को लगभग तैयार कर लिया है। जिसे हाल ही में चीन की सड़कों पर टेस्टिंग के दौरान देखा गया।
हालांकि कार को लेकर अभी कोई खास जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन क्विड के इलेक्ट्रिक वर्जन में रियर व्यू कैमरा, टच-स्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, रियर एसी वेंट्स, ऑटोमैटिक एसी आदि जैसे प्रीमियम फीचर्स होने की उम्मीद है। Renault Kwid EV को सबसे पहले चीनी बाजार में पेश करेगी, जहां इलेक्ट्रिक वाहन काफी लोकप्रिय हैं। चीन के बाद, Renault भारत में इस इलेक्ट्रिक वाहन को लॉन्च करेगी।
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Electric Vehicle Charging Station
रेनो इंडिया देश की इलेक्ट्रिक वाहन नीति पर सरकार की स्पष्टता का इंतजार कर रही है। एक बार भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए एक स्पष्ट रोड मैप तैयार होने के बाद रेनो क्विड को भारतीय बाजार में पेश करेगी। कंपनी Kwid को डबल चार्जिंग विकल्प के साथ पेश करेगी, जो इसे घरेलू और सार्वजनिक दोनों चार्जर के अनुकूल बनाएगा। बता दें, रेनोे के साथ-साथ मारुति सुजुकी ने पहले ही वैगनआर हैचबैक के इलेक्ट्रिक संस्करण का परीक्षण शुरू कर दिया है और महिंद्रा ने भी घोषणा की है कि वे अपने हाल ही में लॉन्च किए गए कॉम्पैक्ट एसयूवी एक्सयूवी 300 के इलेक्ट्रिक वर्जन को लॉन्च करेंगे।
एक अन्य घरेलू निर्माता टाटा मोटर्स ने पहले से ही टिगोर सेडान का एक ईवी संस्करण बना दिया है। जिसका उपयोग भारत सरकार के ईईएसएल द्वारा किया जाता है। वहीं हुंडई जल्द ही कोना अपनी इलेक्ट्रिक एसयूवी लॉन्च करेगी। इसके अलावा जापान की वाहन निर्माता कंपनी निसान इलेक्ट्रिक व्हीकल सेग्मेंट में तेजी से उभर रही है। गलोबल मार्केट में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार Leaf क्लीन मोबिलिटी के लिए प्रसिद्व है। निसान इस कार को जल्द भारत मे लांच करेगी।
एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक 20 साल बाद यानी 2040 में फिर से वह दौर आएगा। जब 55 प्रतिशत कारें इलेक्ट्रिक होंगी। इस समय बाजार में पेट्रोल-डीजल कारों की बिक्री मंद पड़ी है। न सिर्फ भारत में बल्कि दूसरे प्रमुख देशो में भी बिक्री पर काफी असर देखने को मिला है। इसी कारण वाहन निर्माता कंपनियां पेट्रोल-डीजल गाड़ियों में इनोवेशन करने से कतरा रही हैं।