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Delhi BS3 Cars: दिल्ली में 15 साल पुरानी बीएस-3 पेट्रोल कार, स्क्रैप कराएं या ईवी में बदलें? जानें सही विकल्प

Sat, 10 Jan 2026 09:53 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 10 Jan 2026 09:53 PM IST
सार

अगर आपके पास दिल्ली में 15 साल पुरानी BS3 पेट्रोल कार है, तो अब आप अपनी पसंद या सुविधा के आधार पर फैसला नहीं कर रहे हैं। कानून ने पहले ही आपके विकल्प कम कर दिए हैं।

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15-Year-Old BS3 Petrol Car in Delhi: Should we Scrap It or Convert It to an EV?
Delhi Traffic - फोटो : PTI

विस्तार

अगर आपके पास दिल्ली में 15 साल पुरानी BS3 (बीएस-3) पेट्रोल कार है, तो अब यह फैसला पसंद या सुविधा का नहीं, बल्कि कानूनी मजबूरी का है।
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों के अनुसार:
  • 15 साल से पुरानी पेट्रोल गाड़ियां
  • 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियां
दिल्ली की सड़कों पर चलाने की अनुमति नहीं रखतीं।

भले ही पहले कुछ समय के लिए भारत की सर्वोच्च अदालत ने राहत दी थी, लेकिन वह सुरक्षा अब सिर्फ BS4 या उससे ऊपर के उत्सर्जन मानकों वाली गाड़ियों तक सीमित है। BS3 पेट्रोल कार इसमें शामिल नहीं होती।

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अब कानूनी रूप से आपके पास कितने विकल्प हैं?
मौजूदा नियमों के तहत आपके पास सिर्फ दो रास्ते बचे हैं:
  1. कार को स्क्रैप कराना
  2. कार को इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) में बदलवाना
दोनों विकल्पों के आर्थिक, तकनीकी और भविष्य से जुड़े प्रभाव बिल्कुल अलग हैं।

विकल्प 1: कार को स्क्रैप कराना क्यों आसान माना जाता है?
  • स्क्रैपिंग सबसे सीधा और स्पष्ट विकल्प है।
  • 15 साल से पुरानी पेट्रोल कार को एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल माना जाता है
  • अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में गाड़ी जमा करनी होती है
  • जांच के बाद वाहन को सुरक्षित तरीके से तोड़कर रीसायकल किया जाता है
  • इसके बदले आपको सर्टिफिकेट ऑफ डेस्ट्रक्शन मिलता है

यह सर्टिफिकेट जरूरी है क्योंकि:
  • वाहन आधिकारिक रूप से डी-रजिस्टर हो जाता है
  • नई गाड़ी खरीदते समय सरकारी लाभ मिलते हैं

इसके आर्थिक फायदे क्या हैं?
  • स्क्रैप वैल्यू (वजन और धातुओं पर निर्भर)
  • नई निजी गाड़ी पर रोड टैक्स में 25 प्रतिशत तक छूट
  • कमर्शियल वाहन पर 15 प्रतिशत तक छूट
  • रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ
  • अगर नई गाड़ी ईवी है तो अतिरिक्त इंसेंटिव

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विकल्प 2: कार को ईवी में बदलवाना कितना व्यावहारिक है?
ईवी कन्वर्जन या रेट्रोफिटिंग में:
  • पेट्रोल इंजन, फ्यूल सिस्टम और एग्जॉस्ट हटाए जाते हैं
  • इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी पैक और कंट्रोल सिस्टम लगाए जाते हैं
  •  केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के तहत अप्रूव्ड किट से ही कन्वर्जन संभव है
  • बाद में गाड़ी को EV के रूप में री-रजिस्टर किया जाता है

हकीकत में चुनौतियां क्या हैं?
  • कन्वर्जन लागत आमतौर पर 3 लाख रुपये से 6 लाख रुपये या उससे ज्यादा
  • बैटरी साइज और रेंज बढ़ने पर खर्च और बढ़ता है
  • आरसी अपडेट में देरी
  • इंश्योरेंस री-असेसमेंट
  • सीमित सर्विस सपोर्ट

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EV कन्वर्जन पर सरकारी मदद कितनी है?
आगामी दिल्ली ईवी नीति 2.0 के तहत:
  • ईवी कन्वर्जन पर लगभग 50,000 रुपये की सब्सिडी प्रस्तावित
  • यह राहत सीमित वाहनों तक ही लागू हो सकती है
  • कुल लागत के मुकाबले यह मदद काफी कम है

दोनों विकल्पों की तुलना करने पर क्या निकलता है?

EV कन्वर्जन कब सही है?
  • अगर कार से भावनात्मक जुड़ाव हो
  • बॉडी और चेसिस अच्छी हालत में हों
  • आप बिना कंपनी वारंटी के लाखों खर्च करने को तैयार हों

स्क्रैपिंग क्यों ज्यादा समझदारी है?
  • कानूनी झंझट पूरी तरह खत्म
  • नई गाड़ी खरीदने का साफ रास्ता
  • बेहतर सेफ्टी फीचर्स, रेंज और वारंटी
  • भविष्य में बेहतर रीसेल वैल्यू

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आम कार मालिक के लिए सबसे सही फैसला क्या है?
मौजूदा नियमों और जमीनी खर्चों को देखते हुए, दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुरानी BS3 पेट्रोल कार रखने वालों के लिए स्क्रैपिंग ही सबसे व्यावहारिक और आर्थिक रूप से सही विकल्प है।

ईवी कन्वर्जन फिलहाल एक सीमित और खास समाधान है। जो सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए उपयुक्त है जो ज्यादा खर्च और जटिलता के बदले अपनी पुरानी कार को जिंदा रखना चाहते हैं। 

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