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Hindi News ›   Astrology ›   Vrishchik Sankranti 2021: Vrishchik Sankranti is on November 16, know the importance and what to do on this day

Vrishchik Sankranti 2021:16 नवंबर को है वृश्चिक संक्रांति, जानिए इस दिन क्या करें

Mon, 15 Nov 2021 01:13 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 15 Nov 2021 01:13 PM IST
सार

16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर होगा। सूर्य अपनी नीच राशि  तुला से निकलर 12:49 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। 16 नवंबर को ही सर्वार्थसिद्धि योग भी बनेगा और भौम प्रदोष व्रत भी इसी दिन है।

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Vrishchik Sankranti 2021: Vrishchik Sankranti is on November 16, know the importance and what to do on this day
सूर्य का राशि परिवर्तन - फोटो : istock

विस्तार

वृश्चिक संक्रांति 2021: जैसा कि सब जानते हैं जब सूर्य गृह किसी अन्य राशि में गोचर करता है तो इसे हम संक्रांति कहते हैं। इस बार 16 नवंबर को सूर्य ग्रह वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहा है। सूर्य अपनी नीच राशि यानि तुला से निकालकर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहा है।  सूर्य ग्रह के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। 16 नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में गोचर होगा। सूर्य अपनी नीच राशि से निकलर 16 नवंबर, 2021 को 12:49 बजे वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। 16 नवंबर को ही सर्वार्थसिद्धि योग भी बनेगा और भौम प्रदोष व्रत भी इसी दिन है। वृश्चिक संक्रांति का यह दिन वृश्चिक राशि वालों के लिए सबसे शुभ होगा। सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलेगी, धर्म से संबंधित समस्याएं भी दूर होने की संभावना है। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग होने के कारण कोई भी नया शुभ कार्य करने से उसमे काफी तरक्की तथा लाभ होता है।

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वृश्चिक संक्रांति के दिन क्या करें 

सूर्य को अर्घ्य दें 
वृश्चिक संक्रांति के दिन सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने से सूर्य और पितृ दोष समाप्त होता है। 

दान पुण्य करें 
वृश्चिक संक्रांति के दिन दान पुण्य करना चाहिए। इस दिन गरीबों को वस्त्र आदि का भी दान करना चाहिए। 

गंगा स्नान पुण्य दायक 
वृश्चिक संक्रांति के दिन तीर्थों में स्नान का भी खास महत्व होता है। ऐसी मान्यता है जो इस दिन गंगा स्नान करता है उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है। 

पित्रों का तर्पण
संक्रांति का यह शुभ दिन श्राद्ध और तर्पण करने के रूप में भी महत्वपूर्ण माना गया है, ऐसी मान्यता है कि पित्रो का तर्पण करने से उन्हें मुक्ति मिलती है। जिसके कारण पितृ दोष भी खत्म हो जाता है।ऋतु में बदलाव तथा जलवायु में कुछ प्रमुख परिवर्तन इनकी स्थिति के अनुरूप होता है। संक्रांति को इस दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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