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वास्तु नियम :सौभाग्य और दुर्भाग्य का कारण हो सकता है आपके भवन का बेसमेंट

Thu, 07 May 2020 07:18 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 07 May 2020 07:18 PM IST
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vastu tips for basement in hindi
वास्तु विज्ञान के अनुसार भवन में बेसमेंट का निर्माण कभी भी सम्पूर्ण भूखंड में नहीं करना चाहिए
आजकल महानगर हो या शहर जगह की कमी के कारण छोटे भूखंड का ही ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने का चलन बढ़ा है। यही वजह है कि बहुमंजिली इमारतों की ही तरह भवनों में भी बेसमेंट बनाने का चलन बढ़ा है। बेसमेंट यानी तलघर प्राचीन वास्तु शास्त्र का ही एक अंग है। जब से पक्के मकान, महल, किले आदि बनने शुरू हुए, तब से सुरक्षा की दृष्टि से बेसमेंट यानी तहखाने महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते रहे हैं। बेसमेंट आज के समय में भी अधिकतर रूप से कमर्शियल एक्टिविटीज के लिए प्रयोग किए जाने लगे हैं।
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ऐसा हो बेसमेंट का निर्माण-
वास्तु विज्ञान के अनुसार भवन में बेसमेंट का निर्माण कभी भी सम्पूर्ण भूखंड में नहीं करना चाहिए। कुल निर्माण क्षेत्र का आधा या इससे कम भाग पर ही बेसमेंट बनाना चाहिए। भवन का उत्तरी एवं पूर्वी भाग,दक्षिणी एवं पश्चिमी भाग की तुलना में नीचा एवं हल्का रहना शुभ फलदाई माना गया है। अतः बेसमेंट का निर्माण हमेशा भवन के उत्तर एवं पूर्व में करना श्रेष्ठ रहता है। इसका प्रवेश द्वार पूर्वी ईशान, दक्षिण आग्नेय,पश्चिमी वायव्य अथवा उत्तरी ईशान में करना चाहिए। वास्तु में दक्षिण और पश्चिम जोन को भारी रखने की सलाह दी गई है। अतः भूखंड के मध्य या दक्षिण एवं पश्चिम दिशा में बनाया गया बेसमेंट वहां निवास करने वालों के लिए अत्यंत कष्टदायक हो सकता है,इससे धन की कमी,रोग,व्यापार में नुकसान जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।उत्तर-पश्चिम में बेसमेंट बनाने से आलस्य,अस्थिरता और चोरी होने का भय रहता है।यदि किसी ईमारत में पहले से ही दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेसमेंट बना हुआ हो,तो उसका उपयोग भारी सामान रखने अथवा गैरेज हेतु करना चाहिए।
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 ध्यान रहे यह बातें-

- बेसमेंट की गहराई 10-12 फ़ीट से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए,जिसमें से ऊपर के 3-4 फ़ीट ज़मीन के लेवल से ऊपर आने चाहिए,ताकि प्राकृतिक रोशनी और हवा के लिए खिड़कियां रखी जा सकें।
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- बेसमेंट में आने-जाने के लिए सीढ़ियां ईशान कोण या पूर्व दिशा से वास्तु में लाभ देने वाली मानी गई हैं।

- सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने के लिए बेसमेंट में सफ़ेद,हल्का पीला,हरा या हल्का गुलाबी रंग का पेंट होना चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि न हो इसलिए यहाँ गहरे रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।

- घर में बेसमेंट का प्रयोग ध्यान,जप व एकाग्रता के लिए किया जाना उत्तम रहता है,यहाँ मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में करके बैठना शुभकारी होता है।

- बेसमेंट के पूर्व,उत्तर एवं ईशान कोण को खाली एवं स्वच्छ बनाए रखें।इस दिशा में जल रख सकते हैं।बेसमेंट के मुख्य द्वार पर विंडचाइम लगाना भी शुभ माना गया है,इससे यहाँ सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।    

- व्यवसाय के लिहाज़ से बेसमेंट के दक्षिण-पश्चिम(नैऋत्य)दिशा में भारी सामान या मशीनें आदि रखी जानी चाहिए वहीँ बेचने के लिए जो सामान रखा जाए उसे बेसमेंट की उत्तर-पश्चिम(वायव्य)दिशा में रखा जाना चाहिए।एयरकंडीशन,एग्जॉस्ट फैन हो तो सभी पूर्व दिशा या अग्नि कोण में ही होने चाहिए।


- बेसमेंट के चारों ओर से जल निकासी का ढलान नहीं होना चाहिए और बरसात के पानी के रिसाव आदि के लिए भूतल पर काफी दूरी पर परछत्ते बने होने चाहिए, ताकि बरसाती पानी बेसमेंट में न घुस सके।
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