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घर की बालकनी को बनाएं, खुशियों का द्वार
राकेश/इंटरनेट डेस्क।
Updated Sat, 23 Mar 2013 08:45 AM IST
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हुआ है तो यह घर में रहने वालों के लिए हानिकारक होता है। खुला भूखंड जितना अधिक
होता है उतना ही उत्तम माना जाता है। इसलिए खुला भूखंड के विकल्प के रूप में आजकल
बालकनी का प्रयोग किया जा रहा है। हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उनके घर में
बालकनी हो जहां सुबह और शाम फुर्सत के कुछ पल गुजारा जा सके।
वास्तु विज्ञान के अनुसार फुर्सत का पल भी बोझिल हो सकता है अगर आपके घर की बालकनी वास्तु के नियमों के अनुसार नहीं बनी हो। ज्योतिषी और वास्तु संबंधी विषयों की जानकार चन्द्रप्रभा बताती हैं कि बलकनी का निर्माण हमेशा भूमि के मुख के अनुसार होना चाहिए। भूखंड का मुख उस दिशा को कहा जाता है जिस दिशा भवन का मुख्य दरवाजा होता है।
किस दिशा में हो बालकनी
वास्तु विज्ञान के अनुसार फुर्सत का पल भी बोझिल हो सकता है अगर आपके घर की बालकनी वास्तु के नियमों के अनुसार नहीं बनी हो। ज्योतिषी और वास्तु संबंधी विषयों की जानकार चन्द्रप्रभा बताती हैं कि बलकनी का निर्माण हमेशा भूमि के मुख के अनुसार होना चाहिए। भूखंड का मुख उस दिशा को कहा जाता है जिस दिशा भवन का मुख्य दरवाजा होता है।
किस दिशा में हो बालकनी
- भूमि का मुख पूर्व दिशा की ओर होने पर बालकनी पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।
- भूमि का मुख पश्चिम दिशा की ओर होने पर बालकनी पश्चिम अथवा उत्तर दिशा में होना शुभ फलदायी होता है
- उत्तरमुखी भूमि में बालकनी पूर्व या उत्तर दिशा में होने पर घर में सकारात्मक उर्जा की वृद्धि होती है।
- दक्षिण दिशा में भूमि का मुख होने पर बलकनी पूर्व दिशा में हो तो ज्यादा अच्छा होता है लेकिन किसी कारण पूर्व दिशा में बालकनी नहीं होने पर दक्षिण दिशा का में बालकनी का होना फायदेमंद होता है।