चैन और सुकूनभरी बालकनी के लिए ध्यान रखें वास्तु के ये नियम
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भवन में बालकनी एक प्रकार से खुले स्थान का विकल्प मानी जाती है। किसी भी भवन की सौन्दर्यता, हवा व प्रकाश अधिक से अधिक मात्रा में मिले, इसके लिए घर में बालकनी का होना बेहद जरूरी है। सच में बालकनी घर का वह महत्वपूर्ण स्थान है जो हमें बाहरी दुनिया से संपर्क का अहसास दिलाती है,पड़ोसियों, प्रकृति से संवाद का सुनहरा अवसर भी देती है और जहां जाकर हम बाहर के नजारे देख सकते है एवं शुद्ध हवा का आनंद ले सकते है जिससे मन मस्तिष्क में शांति का अनुभव होता है। परंतु क्या आप इस बात को जानते है कि घर की बालकनी से भी वास्तु दोष उत्पन्न हो सकते है।बालकनी से हम प्रातः काल स्वच्छ वायु एंव सूर्य की प्राकृतिक उर्जा का आनन्द ले सकते है।एवं इसके साथ-साथ यदि घर की बालकनी को वास्तु के अनुसार बनाया जाये तो हितकर व लाभप्रद परिणाम मिलते हैं।
किस दिशा में हो बालकनी
बालकनी की दिशा भवन के मुख्य दरवाजे की दिशा के अनुसार ही निर्धारित की जाती है। बालकनी बनाते समय सर्वप्रथम तो यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि घर में सूर्य का प्रकाश उचित तरीके से आए। यदि घर का मुख्य दरवाजा पूर्व दिशा की तरफ है तो बालकनी का निर्माण पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। ऐसे घर में बालकनी पश्चिम या दक्षिण दिशा में नहीं बनानी चाहिए इससे घर के सदस्यों को शरीरिक और मानसिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। यदि घर के मुख्य दरवाजे की दिशा पश्चिम की तरफ है तो घर में बालकनी को उत्तर या पश्चिम की दिशा में बनाना लाभकारी माना गया है। इससे परिवार के सदस्यों को सुख और समृद्धि मिलती है। यदि घर की दिशा उत्तर की तरफ है तो इस तरह के भवन की बालकनी को पूर्व या उत्तर दिशा में बनाना शुभ माना जाता है।यदि आपका घर दक्षिणमुखी है तो, बालकनी की दिशा पूर्व या दक्षिण दिशा में बनाना ठीक है।
सजावट हो वास्तुनुसार
घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश के लिए बालकनी के उत्तर-पूर्व एवं पूर्व दिशा में छोटे पौधे जैसे तुलसी,गेंदा,लिली,हरीदूब,पुदीना,हल्दी आदि लगाने चाहिए।उत्तर दिशा में नीले रंग के फूल देने वाले पौधे जीवन में समृद्धि लाने में सहायक सिद्ध होंगे।कांटेदार एवं बोनसाई पौधों को वास्तु के अनुसार व्यक्ति के विकास में अवरोध माना गया हैं अतः इन्हें लगाने से बचना चाहिए,हाँ गुलाब के पौधों को यहाँ गमलों में लगाया जा सकता है।जगह के आभाव में आप यहाँ कलरफुल पॉट भी लटका सकते है,जिनमें मनीप्लांट या सीजनल फूलों वाले पौधों को लगाया जा सकता है।
बालकनी में भारी गमलों वाले बड़े पौधे नहीं लागने चाहिए जो कि बालकनी को पूरी तरह से ढक लें। कभी भी काला रंग गमलों पर नहीं करना चाहिए,ये नकारात्मकता को बढ़ाता है। बालकनी में पक्षियों हेतु एक जल का पात्र टांग देना चाहिए जिस से घर में उत्साह का माहोल बना रहे।सकारात्मकता में वृद्धि के लिए आप यहाँ कोई सुंदर मुद्रा की कलात्मक पेंटिंग,शोपीस या स्वास्तिक चिन्ह अथवा विंडचाइम भी लगा सकते हैं ।यहाँ पानी के लिए ढलान वास्तु अनुसार रखना चाहिए ,हमेशा पानी का ढलान दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की तरफ होना चाहिए,इसके विपरीत होने से उत्पन्न वास्तु दोष से परेशानियां पैदा हो सकती हैं ।यहाँ किसी प्रकार की गंदगी और अनुपयोगी सामान रखने से बचना चाहिए,जहाँ ऐसा होता है वहां नकारात्मक शक्तियां अधिक सक्रिय रहती हैं, उस घर में रहने वाले लोगों के विचार नकारात्मक होते हैं एवं परिवार में भी मनमुटाव की स्थितियां बन सकती हैं।