लिविंग रूम एक ऐसा स्थान है जहां परिवार के लोग एक साथ बैठकर कुछ समय बिताते हैं। पूरा दिन कैसा गुजरा इस पर चर्चा करते हैं। ऐसे में इस कक्ष का वास्तु सकारात्मक होना आवश्यक है। परिवार के सदस्यों में कोई मनमुटाव नहीं रहे और उनका जीवन सुखमय हो इसके लिए बहुत ज़रूरी है कि घर का लिविंग रूम वास्तु के अनुरूप हो। इसके साथ ही उसकी दीवारों का रंग, सजावट, फर्नीचर आदि का सही स्थान पर होना आवश्यक है। इन सबके असंतुलित होने से झगड़ा, तनाव, स्वास्थ्य संबंधी जैसी परेशानियां पैदा हो सकती हैं।
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Vaastu Tips: वास्तु के इन उपायों को करने से बैठक कक्ष बन जाएगा सुख- समृद्धि और खुशियों का कमरा
Sat, 25 Apr 2020 01:00 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 25 Apr 2020 01:00 AM IST
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सकारात्मक रहे रंग और सजावट
- लिविंग रूम की दीवारों का रंग हल्का, शांत व सौम्य होना चाहिए। इसके लिए हल्के नीले, हरे, पीले और पीच रंगों का प्रयोग कर सकते हैं। तामसिक रंग जैसे काला,गहरा नीला या भूरे रंगों के चयन से बचें। भारी सामान एवं अत्याधिक सजावट करना वातावरण को बोझिल बनाता है। दीवारों पर युद्ध, शिकार, रक्तरंजित दृश्य, सूखी हुई ज़मीन व उदासी दर्शाने वाले चित्र लगाने से बचें।
सावधानी से लगाएं पेंटिंग
- बैठक कक्ष की दक्षिणी दीवार पर, घर के अंदर आते हुए घोड़ों की तस्वीर लगाएं। घोड़ों की तस्वीर घर में लगाने से धन संबंधी समस्याएं दूर होने लगती हैं, जीवन में प्रसिद्धि और यश मिलता है। तस्वीर खरीदते समय ध्यान रहे कि घोड़ों का मुख प्रसन्न मुद्रा में हो, वे आक्रोश वाले न हों। सकारात्मक ऊर्जा के स्तर में वृद्धि के लिए पूर्व दिशा में उगते हुए सूरज की तस्वीर लगाना अच्छा है।
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समृद्धि का हो द्वार
- द्वार घर का आइना होता है इसलिए इसे हमेशा साफ-सुथरा रखें। अधिक तड़क-भड़क वाली तस्वीरें न लगाकर शुभ प्रतीक चिह्न जैसे स्वास्तिक, ॐ, कलश, पवनघंटी, शंख, मछलियों का जोड़ा, तोरण या आशीर्वाद मुद्रा में बैठे गणेश जी लगाना शुभकारक रहता है।
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हरियाली से नए अवसर
- कक्ष के पूर्व या उत्तर में मनीप्लांट, बांस का पेड़ या कोई छोटा इंडोर प्लांट जैसे पौधे रखना सुंदरता के साथ-साथ समृद्धिकारक भी माने गए हैं। ध्यान रहे सूखे, कांटेदार और बोंसाई पौधे निराशा के सूचक हैं, इन्हें न लगाएं। उत्तर दिशा की तरफ़ हरे-भरे जंगल या लहलाती फसलों का चित्र लगाने से एक साथ कई लाभ प्राप्त होते हैं। दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में पीले रंग का मिट्टी का फूलदान रखना स्थायित्व प्रदान करता है, बचत को बढ़ावा देता है, स्वास्थ्य और आपसी संबंधों को दुरुस्त बनाता है।