ऐसे सजाएं मां का दरबार, मां खोलेगी किस्मत के द्वार
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देवी दुर्गा ही समस्त जगत को सत्ता, स्फूर्ति और सरलता प्रदान करती हैं। इसलिए यह हमारे लिए जरूरी है कि हम सब माता की पूजा न केवल सच्चे मन से करें, बल्कि वास्तु का ध्यान रख सही तरीके से भी माता की पूजा करें। इससे ध्यान केन्द्रित भी होता है और पूजा का फल भी जल्दी प्राप्त होता है।
वास्तु के अनुसार माता
- वास्तुशास्त्र के अनुसार, ध्यान का क्षेत्र उत्तर-पूर्व दिशा (ईश्ान कोण) को माना गया है। यह दिशा मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा यानी इंट्यूशन से जुड़ी है। इसलिए नवरात्र काल में माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में की जानी चाहिए।
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- माता की पूजा के दौरान हमारा मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहना चाहिए, क्योंकि पूर्व दिशा शक्ति और शौर्य का प्रतीक है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके माता का ध्यान करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है।
- माता की मूर्ति को लकड़ी के पाटे पर ही रखें। अगर चन्दन की चौकी हो, तो आैर भी अच्छा रहेगा। वास्तुशास्त्र में चंदन शुभ और सकारात्मक उर्जा का केंद्र माना गया है। इससे वास्तुदोषों का शमन होता है।
घट स्थापना करने का शुभ मुहूर्त और विधि
- अखंड ज्योति को पूजन स्थल के आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए। इस दिशा में अखंड ज्योति रखने से घर के अंदर सुख-समृद्धि का वास होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
- शाम के समय पूजन स्थान पर इष्ट देव के सामने प्रकाश का उचित प्रबंध होना चाहिए। इसके लिए घी का दीया जलाना अत्यंत शुभ माना गया है।
- पूजा संबंधी सामान को पूजा कक्ष के दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें। इस कमरे की दीवारों पर हल्का पीला या हरा, गुलाबी रंग करवाना अच्छा रहता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है।
- नवरात्र में वातावरण को शुद्ध और पवित्र करने के लिए घर में गुग्गुल, लोबान, कपूर, देशी घी आदि के धुएं का प्रयोग करें। इससे घर में शुद्धता बनी रहती है।
- घर की उत्तर-पूर्व दिशा में प्लास्टिक या लकड़ी का बना पिरामिड रखने से माता का ध्यान करने में आसानी होगी। ध्यान रहे कि यह पिरामिड नीचे से खोखला हो।
- पूजा घर में स्वास्तिक भी रख सकते हैं अथ्ावा रोली या कुमकुम से पूजन स्थल के दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक बना सकते हैं। इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और वास्तुदोषों का नकारात्मक प्रभाव भी दूर होता है। वैसे भी ओम और स्वास्तिक जैसे शुभ्ा प्रतीक हमारे जीवन में सकारात्मकता लेकर ही आते हैं। उत्तर-पूर्व दिशा में स्वास्तिक का चिह्न लगाने से आप स्वयं के साथ गहरा जुड़ाव अनुभव करेंगे और अपने हर काम में सफल होंगे।
नवरात्र में रखें इनका ख्याल
नवरात्रों में उपासक को दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करना चाहिए। मांस-मदिरा का त्याग करें। इन दिनों बाल कटवाना, नाखून काटना आदि कार्य भी नहीं करने चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। कन्याओं को भोजन करवाने के बाद उगे हुए जौ और रेत को जल में विसर्जित करें। कुछ जौ को जड़ सहित उखाड़कर धन रखने के स्थान पर रखें। कलश के पानी को पूरे घर में छिड़क देना चाहिए. इससे घर से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और नारियल को प्रसाद स्वरूप वितरित करें।
मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन कीजिए