फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   Vaastu ›   know how to north east direction to remove vaastu defects

जानें उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में वास्तुदोष निवारण के उपाय

Wed, 10 Jun 2020 03:53 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन, वास्तुविद
अनीता जैन, वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 10 Jun 2020 03:53 PM IST
विज्ञापन
know how to north east direction to remove vaastu defects
वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व

हम सभी चाहते हैं कि हमारा एक सुंदर एवं वास्तु के अनुरूप आशियाना हो जिसमें हम अपने परिवार के साथ बिना किसी परेशानी के प्रेम, सुख और शांति से अपना जीवन जी सकें। लेकिन यदि उस घर में कुछ वास्तु दोष हो तो वहां निवास करने वाले सदस्यों को मानसिक,आर्थिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है।पहले से बने हुए घर को उसे फिर से तोड़कर वास्तु दोषों को दूर करना तो  प्रायः असंभव ही होता है। इसीलिए बिना किसी तोड़-फोड़ के इन दोषों को दूर करने के लिए वास्तु में कुछ आसान से उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर हम निश्चय ही अपने जीवन में आई हुई परेशानियों को कुछ हद तक कम कर सकते है। आइए जानते हैं कि ईशान दिशा के वास्तुदोषों को कैसे दूर किया जा सकता है। 

विज्ञापन

ये होता है ईशान कोण
वास्तुशास्त्र के अनुसार भवन में जहां पूर्व और उत्तर दिशाएं मिलती हैं उस स्थान को ईशान या उत्तर-पूर्व दिशा कहा जाता है। वास्तु में ईशान कोण के देवता बुद्धि के प्रदाता बृहस्पति हैं एवं इस दिशा पर गुरु ग्रह का आधिपत्य होता है। भगवान शिव भी इसी दिशा में निवास करते हैं,इसलिए ईश की यह दिशा सबसे अधिक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण मानी गई है। यहां सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत-प्रतिशत होता है, इसीलिए यह दिशा सर्वाधिक सात्विक होने के कारण सबसे अधिक पूज्यनीय भी है। यह स्थान सभी पवित्र कार्यों जैसे पूजा-पाठ,ध्यान,अध्ययन,मेडिटेशन आदि के लिए अच्छा माना गया है।जितना संभव हो सके इस जोन को साफ़-सुथरा और हल्का-फुल्का एवं खुला रखना चाहिए क्योंकि यहां से सकारात्मक ऊर्जाएं भवन के अंदर प्रवेश करती हैं। इस क्षेत्र को बंद,गंदा या भारी रखना अनेक परेशानियों का कारण बन सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

ईशान के कटे होने पर
यदि भवन का ईशान क्षेत्र कटा हो या और दिशाओं की अपेक्षाकृत छोटा हो तो उस कटे हुए भाग पर एक बड़ा शीशा लगाएं, इससे भवन का ईशान क्षेत्र बड़ा हुआ सा प्रतीत होता है और कटे हुए कोण से उत्पन्न वास्तुदोष दूर होगा। इस दिशा में  भगवान विष्णु या देव गुरु बृहस्पति या फिर शिव परिवार की तस्वीर लगाने से वास्तुदोष के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। ईशान कोण के वास्तु दोषो को कम करने के लिए साधु महात्माओं को बृहस्पतिवार के दिन बेसन की बर्फी या लड्डुओं का प्रसाद बांटना चाहिए।

विज्ञापन

टॉयलेट के लिए करें ये उपाय
किसी भवन के उत्तर-पूर्व कोने में जाने-अनजाने में बना हुआ टॉयलेट वास्तु की दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है।ऐसा होने से परिवार में अशांति,जटिल रोग और अनैतिक कार्यों से धन व सम्मान की हानि होने की संभावना रहती है।यदि भवन के ईशान कोण में टॉयलेट है तो उसे स्थाई रूप से बंद करना या फिर केवल बाथरूम के रूप में उपयोग करना ही बेहतर है।लेकिन जगह की कमी के कारण ये संभव नहीं तो टॉयलेट के दरवाजे के बाहरी भाग में एक बड़ा दर्पण इस तरह लगा दें कि वह दक्षिण-पश्चिम कोण से आसानी से नज़र आए।यदि किसी वजह से दर्पण लगाना भी संभव न हो तो टॉयलेट के अंदर कांच के एक बाउल में साबुत या पिसा नमक या फिटकरी के टुकड़े रखें,साथ ही टॉयलेट के दरवाजे के बाहर की तरफ शिकार करते हुए या मुहं फाड़ते हुए शेर का एक बड़ा चित्र लगा दें,वास्तुदोष का प्रभाव कम होगा।   

यदि है यहाँ रसोई तो-
अगर ईशान कोण में रसोई घर हो तो उस रसोई घर के अंदर गैस चूल्हे को आग्नेय कोण में रख दें और रसोई के ईशान कोण में साफ बर्तन में जल भरकर रखें अथवा पीने के पानी व्यवस्था करें जैसे मटका, आर.ओ या वाटर फ़िल्टर।रसोई की ईशान दिशा को हल्का और खाली रखें और यहाँ से भारी चीजें जैसे अलमारी या फ्रिज आदि को रसोई के दक्षिण या पश्चिम दिशा में शिफ्ट कर दें। शुभ फलों में वृद्धि के लिए इस दिशा की रसोई में, बर्फ से ढंके कैलाश पर्वत पर ध्यान मुद्रा में भगवान श्री शिवजी, जिनके भाल पर चंद्र हो और जटा से गंगाजी निकल रही हों, की तस्वीर लगाना अच्छा माना गया है।

सीढ़ियों के होने पर
वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में सीढ़ियों का निर्माण दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में होना  चाहिए।उत्तर-पूर्व में सीढ़ियां होना वास्तु दोष है। इस वजह से घर में शारीरिक व मानसिक रोग,धन का अपव्यय और आकस्मिक दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। परन्तु आपके घर में पहले से ही इस दिशा में सीढ़ियां मौजूद है तो और उन्हें वहां से हटाना संभव नहीं है तो उसके वास्तुदोष को दूर करने के लिए घर की छत पर दक्षिण-पश्चिम की ओर एक कमरा बनवा देना चाहिए। धन की कमी के कारण यदि कमरा नहीं बना सकते हैं तो छत की दक्षिण-पश्चिम दिशा में टिनशेड लगाकर वहां काम में नहीं आने वाला भरी समान रख दें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed