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आपके परिवार का भविष्य बताएगा आपका किचन
राकेश/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 17 Oct 2012 05:03 PM IST
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फैमली का फ्यूचर जानने का एक आसान तरीका है आपका किचन। हो सकता है कि आप इस बात से हैरान हों लेकिन वास्तु विज्ञान के अनुसार यह सच है। वास्तु विज्ञान कहता है कि किचन कि दिशा से यह जाना जा सकता है कि फैमली में खुशियों की बहार छायी रहेगी या विवादों और दुःखों का काला साया रहेगा।
हैप्पी फैमली
किचन में भोजन बनाने का काम अग्नि से होता है इसलिए किचन के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण माना गया है। इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं प्रसन्न और स्वस्थ रहती हैं। किचन के अंदर महिलाओं की हुकूमत चलती है। परिवार में आपसी तालमेल बढ़ता है।
मानसिक अशांति
वास्तु विज्ञान के अनुसार दक्षिण दिशा में किचन का होना शुभ नहीं होता है। यह यम की दिशा है। दक्षिण में किचन होने पर परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बना रहता है। घर के मालिक की सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इनके क्रोध की वजह से परिवार में आपसी सामंजस्य में कमी आती है।
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आर्थिक नुकसान
किचन की दिशा पश्चिम में होने पर घर की महिलाओं में आपसी तालमेल अच्छा रहता है। घर की मालकिन का पूरे घर पर प्रभाव होता है। बहू-बेटियों से इनके अच्छे संबंध होते हैं एवं इनसे भरपूर सहयोग मिलता है। लेकिन इस दिशा में किचन का बुरा प्रभाव यह होता है कि अन्न धन की बर्बादी होती है। इससे घर में बरकत नहीं आती है।
जीवनसाथी से अनबन
जिनके घर में किचन वायव्य कोण यानि उत्तर पश्चिम में होता है उस घर में पति-पत्नी के संबंध मधुर नहीं रहते। इसका कारण घर के मालिक का जरूरत से अधिक रोमांटिक होना होता है। घर के मालिक की कई महिला मित्र होती है। बेटियों के लिए भी यह दिशा अच्छी नहीं मानी जाती है। इससे बेटियों की बदनामी होती है।
धन का आगमन अच्छा
किचन उत्तर दिशा में होना आय की दृष्टि से अच्छा रहता है। जिस घर में किचन उत्तर दिशा में होता है उस घर की महिला बुद्घिमान होती है। घर की मालकिन सभी से स्नेह रखती है। लेकिन परिवार की महिलाओं के बीच आपसी तालमेल की कमी रहती है।
महिलाएं धार्मिक होगी
उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में किचन होना दांपत्य सुख के लिए अनुकूल नहीं होता है। इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं धर्म-कर्म में अधिक रूचि रखने वाली होती है। दांपत्य एवं पारिवारिक विषयों के प्रति इनमें उदासीनता रहती है। इसका प्रभाव दांपत्य जीवन पर पड़ता है।
घर की कप्तान महिला
जिनके घर में किचन पूर्व में होता है उनके घर में धन का आगमन अच्छा रहता है लेकिन घर की पूरी कमान पत्नी के हाथ में होता है। बावजूद इसके पत्नी खुश नहीं रहती है, स्त्री रोग, पित्त रोग एवं नाड़ी संबंधी रोग का इन्हें सामना करना पड़ता है।
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हैप्पी फैमली
किचन में भोजन बनाने का काम अग्नि से होता है इसलिए किचन के लिए सबसे उत्तम दिशा दक्षिण पूर्व यानी आग्नेय कोण माना गया है। इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं प्रसन्न और स्वस्थ रहती हैं। किचन के अंदर महिलाओं की हुकूमत चलती है। परिवार में आपसी तालमेल बढ़ता है।
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मानसिक अशांति
वास्तु विज्ञान के अनुसार दक्षिण दिशा में किचन का होना शुभ नहीं होता है। यह यम की दिशा है। दक्षिण में किचन होने पर परिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव बना रहता है। घर के मालिक की सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इनके क्रोध की वजह से परिवार में आपसी सामंजस्य में कमी आती है।
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आर्थिक नुकसान
किचन की दिशा पश्चिम में होने पर घर की महिलाओं में आपसी तालमेल अच्छा रहता है। घर की मालकिन का पूरे घर पर प्रभाव होता है। बहू-बेटियों से इनके अच्छे संबंध होते हैं एवं इनसे भरपूर सहयोग मिलता है। लेकिन इस दिशा में किचन का बुरा प्रभाव यह होता है कि अन्न धन की बर्बादी होती है। इससे घर में बरकत नहीं आती है।
जीवनसाथी से अनबन
जिनके घर में किचन वायव्य कोण यानि उत्तर पश्चिम में होता है उस घर में पति-पत्नी के संबंध मधुर नहीं रहते। इसका कारण घर के मालिक का जरूरत से अधिक रोमांटिक होना होता है। घर के मालिक की कई महिला मित्र होती है। बेटियों के लिए भी यह दिशा अच्छी नहीं मानी जाती है। इससे बेटियों की बदनामी होती है।
धन का आगमन अच्छा
किचन उत्तर दिशा में होना आय की दृष्टि से अच्छा रहता है। जिस घर में किचन उत्तर दिशा में होता है उस घर की महिला बुद्घिमान होती है। घर की मालकिन सभी से स्नेह रखती है। लेकिन परिवार की महिलाओं के बीच आपसी तालमेल की कमी रहती है।
महिलाएं धार्मिक होगी
उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में किचन होना दांपत्य सुख के लिए अनुकूल नहीं होता है। इस दिशा में किचन होने पर घर की महिलाएं धर्म-कर्म में अधिक रूचि रखने वाली होती है। दांपत्य एवं पारिवारिक विषयों के प्रति इनमें उदासीनता रहती है। इसका प्रभाव दांपत्य जीवन पर पड़ता है।
घर की कप्तान महिला
जिनके घर में किचन पूर्व में होता है उनके घर में धन का आगमन अच्छा रहता है लेकिन घर की पूरी कमान पत्नी के हाथ में होता है। बावजूद इसके पत्नी खुश नहीं रहती है, स्त्री रोग, पित्त रोग एवं नाड़ी संबंधी रोग का इन्हें सामना करना पड़ता है।