{"_id":"925f4357f28a6ddbb1be6c40a70914c2","slug":"asharam-motera-ashram-vastu","type":"story","status":"publish","title_hn":"क्यों हमेशा विवादों में घिरा रहा है आसाराम बापू का आश्रम?","category":{"title":"Vaastu","title_hn":"वास्तु","slug":"vastu"}}
क्यों हमेशा विवादों में घिरा रहा है आसाराम बापू का आश्रम?
टीम डिजिटल
Updated Mon, 23 Sep 2013 08:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आसाराम के अहमदाबाद के मोटेरा स्थित मुख्य आश्रम का वास्तु विश्लेषण करने पर एकदम स्पष्ट हो जाता है कि इस आश्रम की वास्तु स्थिति है ही इस प्रकार है कि व्यक्ति की प्रसिद्धि को आसामान की ऊंचाई तक ले जाकर अपमान दिलाते हुए जमीन पर ला पटके। यह कहना है वास्तु गुरू कुलदीप सालूजा का।
विज्ञापन
इनके अनुसार साबरमती नदी के किनारे स्थित यह आश्रम उत्तरमुखी है जिसका मुख्य प्रवेशद्वार उत्तर ईशान में है और अंदर पूरा आश्रम प्रवेशद्वार के दाहिने भाग पर निर्मित किया हुआ है, क्योंकि प्रवेश द्वार से एकदम बाएं भाग पर किसी दूसरे संत का सदाशिव आश्रम है।
विज्ञापन
आसाराम मोटेरा आश्रम के वास्तुदोष
आसाराम बापू आश्रम में मुख्यद्वार से अंदर आने वाली सड़क जहां खत्म होती है वहां एक मोक्ष द्वार है। सदाशिव आश्रम लम्बाई में छोटा होने के कारण उसके पीछे का दक्षिण दिशा वाला भाग मोक्ष द्वार के लगभग 100 फीट पहले ही सदाशिव आश्रम की ओर पूर्व दिशा में बढ़ा हुआ है।
विज्ञापन
सितम्बर महीने के अंतिम सप्ताह का राशिफल पढ़ें
इस बढ़ाव से आश्रम का पूर्व आग्नेय वाला भाग बढ़ गया है। वास्तु विज्ञान के अनुसार इस वस्तु दोष से आर्थिक लाभ तो मिलता है लेकिन रोग और अदालती मामलों के कारण कष्ट होता है। आश्रम के दक्षिण दिशा में दक्षिण आग्नेय से लेकर दक्षिण के साथ मिलकर दक्षिण नैऋत्य में बढ़ाव है। यहां रैलिंग लगी हुई है।
यमलोक की नदी जहां प्रेत करवाता है नदी पार
यहां से भक्त लगभग 100 फीट ऊंचाई से साबरमती नदी को निहारते हैं। वास्तुशास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा के साथ मिलकर अगर नैऋत्य में बढ़ाव होता है तो मालिक रोगों, प्राण-भय और अकाल मृत्यु के भय से पीडि़त होगा।
आश्रम के पश्चिम दिशा में भी पश्चिम दिशा के साथ पश्चिम नैऋत्य बढ़ा हुआ है। वास्तु के नियमानुसार ऐसी स्थिति में भारी आर्थिक नुकसान होता है। मालिक दुःसंगति और कुकर्मों में फंसकर बहुत पैसे खर्च करेगा, व्यसनों का दास बनेगा, जिद्दी होगा।
आश्रम में कुछ ऐसे भी दोष हैं जिनसे ज्ञात होता है यह स्थान महिलाओं के लिए अनुकूल नहीं है। ऐसे स्थानों पर महिलाओं के साथ दुराचार एवं शोषण की संभावना प्रबल रहती है।