Surya Grahan 2021 December: आज है पूर्ण सूर्य ग्रहण, भारत, भाजपा, अमेरिका और विश्व के लिए बन रहा है अशुभ योग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय ब्रह्मांड में ग्रहों के गोचर से आने वाले समय में मानव, देश, विश्व को प्रभावित करने वाले विषयों जैसे, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, प्रशासनिक, मौसम, महामारी इत्यादि का संकेत प्राप्त होता है।शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दिन और ग्रहण काल के समय तप, दान, जप, प्रार्थना आदि कर्म उत्तम माने गये हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यह ग्रहण ज्येष्ठा नक्षत्र और वृश्चिक राशि में पड़ेगा। ग्रहण के समय ब्रह्माण्ड में मकर लग्न होगा। यह ग्रहण, जल तत्व की राशि वृश्चिक में पड़ेगा, इसमें केतु, सूर्य, चन्द्र, अस्त बुध स्थित हैं। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल, राशि से 12वें भाव में स्थित है, और शनि से दृष्ट है, ये मंगल शनि को भी चौथी दृष्टि से प्रभावित कर रहा है। इसलिए यह अशुभ ग्रहण योग सत्ता, उनके शीर्ष नेतृत्व, मीडिया, न्याय व्यवस्था, धर्मगुरुओं, धार्मिक, संवैधानिक संस्थानों के महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए आने वाला समय चुनौती भरा और अनेक प्रकार के संकट देने वाला होगा। देश में सुप्रीम कोर्ट के अत्यंत सख्त दंडात्मक, संवैधानिक फैसले सरकार, प्रशासन के लिए अनेक संकट पैदा कर सकते हैं।
सूर्य ग्रहण का भाजपा पर प्रभाव
भाजपा (6.4.80), की कुंडली मिथुन लग्न और वृश्चिक राशि की है, इनकी 2018 से 10 वर्ष की चंद्रमा की दशा चल रही है। 2021 के चारों ग्रहण, इनकी जन्म राशि की एक्सिस में पड़ रहे हैं, अतः समस्त राजनीतिक दलों से ज्यादा, इनके लिए अनेक अशुभ और दुखद फल, अपमान और संकटों का योग है। आने वाले राज्यों के चुनावों में सत्ता के विपरीत जनता का मत होने का भी संकेत है।
तूफान, भूकंप आदि के योग
इस संवत्सर (2078), का यह चौथा ग्रहण और दूसरा सूर्यग्रहण है, इस वर्ष के चारों ग्रहण(2 सूर्य, 2 चंद्र ग्रहण) वृश्चिक-वृषभ राशि की एक्सिस में पड़ें हैं। संवत्सर 2078 और स्वतंत्र भारत (15.8.47) की कुंडली वृषभ लग्न की है। लग्न राशि, सम्पूर्ण देश की अवस्था, लोगों का स्वास्थ्य, मंत्रिमंडल, प्रशासनिक अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं का चरित्र इत्यादि का संकेत देती है। चतुर्थ भाव, उसके स्वामी सूर्य आंतरिक सुख, सरकार की नीतियां, किसानों, कृषि, मौसम डॉक्टर, चिकित्सा क्षेत्र, दवाईयां, वैक्सीन, कानून व्यवस्था आदि के कारक हैं।
किसी भी कुंडली में लग्न से पूर्व दिशा, चौथे भाव से उत्तर, सातवें भाव से पश्चिम और दसवें भाव से दक्षिण दिशा देखी जाती है। यही कारण है कि ग्रहण और अशुभ ग्रहों के इस योग के कारण भारत की अर्थव्यवस्था, देश की संपूर्ण अवस्था चिंता का विषय बनी रहेंगी। पूर्व, उ.पूर्व, द.पूर्व, उत्तर, मध्यभारत, पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण पश्चिम दिशाओं से बीमारी, मृत्यु, बर्फबारी, बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूकंप आदि अन्य अशुभ समाचार मिलने का योग बन रहा है ।
सत्ता परिवर्तन का योग
राक्षस नामक, संवत्सर(2078) 12.4.21 को प्रातः 8.01 पर वृषभ लग्न में प्रारम्भ हुआ, जिसका राजा मंगल, मंत्री भी मंगल है, जो राहु केतु से पीड़ित था, लग्नेश शुक्र भी संकट के भाव 12वें में हैं। अतिचारी अष्टमेश गुरु का सत्ता के 10वें भाव में होना, सत्ता के लिए अत्यंत कष्टकारी, परिवर्तन का संकेत देता है। ये सभी ग्रहण अमेरिका (4.7.1776, सिंह लग्न) के 4-10 एक्सिस यानि सत्ता, आंतरिक सुख में पड़ रहे हैं, अतः वर्तमान सत्ता के लिए अशुभ, बाढ़, चक्रवात, भूकंप, हिंसा, दुर्घटनाओं, तूफान से भारी जान माल के नुकसान का भी संकेत है।
विश्व पर सूर्य ग्रहण का प्रभाव
विश्व की कुंडली 14.4.21 को प्रातः 02.33 मिनट पर मकर लग्न में प्रारंभ हुई। इसमें लग्नेश शनि 6 वें भाव में स्थित मंगल से लग्न में पीड़ित हैं। अस्त बुध के नक्षत्र में ग्रहण, डिजिटल इकोनॉमी, करेंसी, सोशल, प्रिंट और अन्य मीडिया क्षेत्र आदि के लोगों के लिए अनेक संकटों का संकेत दे रहा है। सामाजिक हिंसा, आंतरिक कलह, मनोरोग, अन्य बीमारी, दवाओं का संकट, दवाओं का बेअसर साबित होना, पेट्रोलियम, खनिज, रसायन पदार्थों में तेजी राजा, प्रजा दोनों को कष्ट देंगी। बाढ़, चक्रवात, तूफान, भूमि स्लखन, भूकंप आदि से जान माल़, कृषि, और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान, बेरोजगारी, भुखमरी, मौसम, बाढ़ आदि का प्रकोप, भूकंप, किसानों, मजदूरों का आंदोलन, उत्तर पूर्व, उत्तर, उत्तर पश्चिम, पश्चिम, दिशा में पड़ोसी देशों से छद्म युद्ध, हिंसा के कष्टकारी संकेत हैं।
नया संवत्सर
चन्द्र मास
सूर्य संक्रांति
विश्व लग्न
और वर्ष में पड़ने वाले ग्रहण
अतः, ग्रहण मेदिनी ज्योतिष यानि पृथ्वी पर पड़ने वाले ग्रहों के संपूर्ण प्रभाव का अध्ययन है, जिससे भविष्य में, राजा, राजा का कार्यकाल, प्रजा के लिए उसकी नीतियां, प्रजा के सुख दुख, पड़ोसी देशों से संबंध, मौसम, प्राकृतिक प्रकोप, महामारी आदि का संकेत प्राप्त होता है।
इसको प्रभाव सामूहिक है, व्यक्तिगत राशियों पर इनका ज्यादा असर नहीं देखा जाता, सिर्फ उन लोगों को ग्रहण प्रभावित करते हैं, जिनकी जन्म कुंडली में, सूर्य, चन्द्र पीड़ित हों और उनकी वर्तमान में ग्रहण के योग में इन ग्रहों की दशा चल रही हो, अन्य को केवल सामूहिक रूप से प्रभाव होगा।
ग्रहण के दौरान क्या करें?
- शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दिन और ग्रहण काल के समय तप, दान, जप, प्रार्थना आदि कर्म उत्तम माने गये हैं। यहां तप का अर्थ व्रत, संकल्प है।
- प्रातः दिन के भोजन से पहले, तुलसी के पत्ते तोड़कर अपने रसोईघर में रख लें, और भोजन के समय प्रयोग करें। इसका एक मात्र उद्देश्य नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और शुद्धता से है।
- ग्रहण काल में जितना संभव हो गायत्री मंत्र, सूर्य के अन्य मंत्र, आदित्य हृदयस्तोत्र, हनुमान चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम, नारायण कवच आदि का मानसिक जाप करें, ये मंत्र सिद्धि का पर्व माना जाता है।
- व्रत करें, व्रत या संकल्प तीन प्रकार के होते हैं, शारारिक ( सात्विक, मौसम के अनुसार भोजन, प्रकृति के अनुसार दिनचर्या ), वाचिक (सत्य मधुर वाणी, मौन, निंदा, उपहास, कटु वचन, आलोचना न बोलना) और मानसिक ( क्रोध, निराशा, उत्तेजना, घृणा, ईर्ष्या, आलोचना, इन्द्रियों, और मन को नियंत्रित करने के लिए ध्यान, जप योग)