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मेष संक्रांति आज, सूर्य पूजा करते समय इन नियमों का जरूर रखें ध्यान

Mon, 13 Apr 2020 11:43 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 13 Apr 2020 11:43 AM IST
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Sun transit in Aries know how to sun worship
surya puja

वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य जब एक राशि को छोड़कर दूसरी राशि में परिवर्तन करते हैं तो उसे सूर्य संक्रांति कहते हैं। सूर्य एक राशि में एक महीने तक भ्रमण करते हैं। हिंदू धर्म में सूर्य का विशेष स्थान होता है। लोग नित्य-प्रतिदिन सूर्य की उपासना करते है। सूर्य संक्रांति पर विशेष रूप से पूजा-आराधना और दान किया जाता है। कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए हर रोज तांबे के लोटे में जल, चावल और फूल डालकर अर्घ्य दिया जाना चाहिए। इसके अलावा जल चढ़ाने के बाद सूर्य मंत्र का पाठ करना शुभ फलदायी होता है। माना जाता है कि अगर किसी भी जातक की जन्मकुंडली में केवल सूर्य ही बलवान हों तो सभी ग्रहों के दोष कम हो जाते हैं। सूर्य को जल देते हुए ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। सूर्य जब भी मेष राशि में भ्रमण पर होते हैं तो उच्च के होते हैं वहीं तुला राशि में गोचर करते समय नीच के हो जाते हैं। किसी भी जातक की कुंडली में जब सूर्य उच्चराशि के होते हैं तो वह व्यक्ति धनी और राजयोगी बनता है।

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सूर्य की साधना का महत्व 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य को सभी नवग्रहों में पहला ग्रह और पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया है। संतान की प्राप्ति में सूर्य साधना से लाभ होता है। पिता-पुत्र के संबंधों में विशेष लाभ के लिए सूर्य साधना पुत्र को करनी चाहिए। सुख-समृद्धि और मान सम्मान में बढ़ोतरी के लिए भी सूर्य उपासना को लाभकारी माना गया है।
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सूर्य साधना का दिन रविवार
शास्त्रों के अनुसार रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य की साधना-आराधना करने पर शीघ्र ही उनकी कृपा प्राप्त होती है। 

सूर्य मंत्र
जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता पाने का सूर्य मंत्र इस प्रकार है

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।


ॐ घृणि सूर्याय नमः।।

ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पतेए अनुकंपयेमां भक्त्याए गृहाणार्घय दिवाकररू।।

ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ।।

सूर्य नमस्कार के मंत्र -
ॐ सूर्याय नमः।
ॐ भास्कराय नमः।
ॐ रवये नमः।
ॐ मित्राय नमः।
ॐ भानवे नमः।
ॐ खगय नमः।
ॐ पुष्णे नमः।
ॐ मारिचाये नमः।
ॐ आदित्याय नमः।
ॐ सावित्रे नमः।
ॐ आर्काय नमः।
ॐ हिरण्यगर्भाय नमः।

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