फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   What Is Pitra Dosh And How Pitra Dosh Is Formed in Kundli Know Reason and Upay in Hindi

Pitru Dosh: कुंडली में कैसे बनता है पितृदोष ? दूर करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर करें उपाय

Mon, 30 Sep 2024 01:49 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 30 Sep 2024 01:49 PM IST
सार

जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष बनता है उन्हे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पितृदोष के कारण परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव, अशांति, संतान सुख में बाधाएं, धन हानि, अचानक से बीमारी और मान-सम्मान में गिरावट देखने को मिलती है।

विज्ञापन
What Is Pitra Dosh And How Pitra Dosh Is Formed in Kundli Know Reason and Upay in Hindi
पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करने की विधि - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Pitru Dosh: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी जातक के जन्म के साथ ही आकाश मंडल में ग्रहों और नक्षत्रों की मौजूदा स्थितियों के आधार पर कुंडली का निर्माण होता है। जातक की जन्म कुंडली में उसके संपूर्ण जीवन में घटने वाली सभी तरह की घटनाओं के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी छिपी हुई होती हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कई तरह के शुभ और अशुभ दोनों ही तरह के योग बनते हैं। जन्म कुंडली में शुभ योग बनने से जातक का जीवन सुखी, आनंद और धन-धान्य से परिपूर्ण होता है। ऐसा जातक अपने थोड़े से ही प्रयास में बहुत बड़ी सफलता को हासिल कर लेता है, वहीं कुंडली में कुछ अशुभ योग भी बनते हैं जिस कारण से जातक को जीवन में संघर्ष और कठिन मेहतन करने बाद भी जीवन सुखी नहीं रहता है। आज हम आपको कुंडली में बनने वाले पितृ दोष के बारे में बताएंगे जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष बनता है उन्हे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पितृदोष के कारण परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव, अशांति, संतान सुख में बाधाएं, धन हानि, अचानक से बीमारी और मान-सम्मान में गिरावट देखने को मिलती है। आइए जानते हैं कुंडली में कैसे और कैसे बनता है पितृ दोष और इसे दूर करने के उपायों के बारे में...

विज्ञापन


कुंडली में कब बनता है पितृदोष 
- वैदिक शास्त्र के अनुसार राहु-केतु और शनि जैसे पापी ग्रह के साथ कमजोर सूर्य और चंद्रमा के साथ युति बनने पर पितृदोष बनता है। 
- वृहद पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार अगर किसी जातक की कुंडली में लग्नेश यानी कुंडली के पहले भाव के स्वामी, सप्तमेश और पंचमेश कमजोर होते हैं पितृ दोष होता है, लेकिन यही अगर कुंडली में बली हो तो पितृदोष नहीं होता है।
विज्ञापन

- अगर किसी जातक की कुंडली में पंचम भाव के स्वामी कमजोर हो या फिर यह छठे, आठवें और बारहवें भाव में मौजूद हो तो पितृ दोष बनता है। 
- कुंडली के पंचम भाव में राहु-केतु, शनि या मंगल जैसे अशुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर पितृदोष लगता है। 
- कुंडली के दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें और दसवें भाव में सूर्य-राहु या फिर सूर्य-शनि की यति होने पर पितृ दोष लगता है। 

पितृ दोष दूर करने के उपाय
शास्त्रों में पितरों के लिए अमावस्या तिथि बहुत ही खास होती है। पितृगणों की कृपा पाने के लिए अमावस्या तिथि पर पितरों से संबंधित कई तरह के कार्य करने चाहिए। अभी पितृ पक्ष जारी है और 2 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या है। इस तिथि पर सभी पितरों का तर्पण करते हुए और उनका आशीर्वाद लेते हुए उनकी विदाई करनी चाहिए। अमावस्या तिथि पर दान और गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराना और दान देना शुभ माना जाता है। श्राद्ध कर्म और तर्पण करना पितरों को संतुष्ट करने का मुख्य उपाय माना जाता है। श्राद्ध कर्म में पितरों को अर्पित भोजन, जल और तर्पण किया जाता है। दान से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ-साथ अन्न, जल और फल भी दान करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन



 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed