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Vipreet Raj Yoga: कुंडली में क्या होता है विपरीत राजयोग ? व्यक्ति हासिल करता है सफलता के शिखर को

सार

Vipreet Raj Yoga: कुंडली में विपरीत राजयोग का बनना बहुत ही शुभ माना जाता है। अगर किसी जातक का जन्म किसी गरीब व्यक्ति के घर में हुआ और उसकी कुंडली में यह राजयोग बने तो जातक बड़ा होकर अपने जीवन में अच्छी सफलता को प्राप्त होता है।

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vipreet raj yog in kundli know how to make this rajyog and impact on people
कुंडली में विपरीत राजयोग का निर्माण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Vipreet Raj Yog In Kundli: वैदिक ज्योतिष शास्त्र में 'राजयोग' शब्द के बारे में आपने जरूर सुना होगा। अक्सर ज्योतिष शास्त्र के विद्वान कुंडली की विवेचना करते समय राजयोग का प्रयोग करते हैं। राजयोग का मतलब कोई राजा बनने से नहीं है, बल्कि इसका अर्थ जीवन में सुख-समृद्धि, धन-दौलत, यश और सफलता से है। कुंडली में जितने ज्यादा राजयोग होंगे जातक का जीवन उतना ही सफल और समृद्धिशाली होगा। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कई तरह के राजयोग होते हैं। प्रमुख रूप से हंस राजयोग, नीचभंग राजयोग , शश राजयोग ,गजकेसरी राजयोग, महाभाग्य राजयोग और विपरीत राजयोग। आज हम आपको कुंडली में बनने वाले विपरीत राजयोग के बारे में बताएंगे कि विपरीत राजयोग कैसे बनता है और इसका जातकों के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है। 

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विपरीत राजयोग
किसी जातक को कुंडली में विपरीत राजयोग का बनना बहुत ही शुभ माना गया है। कुंडली में विपरीत राजयोग अशुभ भावों के संबंधों से मिलकर बनता है। कुंडली का छठा भाव, आठवां भाव और बाहरवा भाव को अच्छा नहीं माना गया है। ऐसे में जब इन तीन अशुभ भावों का आपसी संबंध, द्दष्टि संबंध होता है इन अशुभ भाव का प्रभाव शुभ हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार किसी जातक की जन्म कुंडली के छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी ग्रहों की युति हो तो विपरीत राजयोग बनता है। इसके अलावा इन भाव के स्वामी अपने घर में स्थित हो या फिर ये ग्रह परस्पर द्दष्टि संबंध बनाते हो तो विपरीत राजयोग का निर्माण होता है। 
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विपरीत राजयोग का शुभ प्रभाव
कुंडली में विपरीत राजयोग का बनना बहुत ही शुभ माना जाता है। अगर किसी जातक का जन्म किसी गरीब व्यक्ति के घर में हुआ और उसकी कुंडली में यह राजयोग बने तो जातक बड़ा होकर अपने जीवन में अच्छी सफलता को प्राप्त होता है। ऐसा जातक रंक से राजा तक का सफर बहुत ही आसानी के साथ पूरा करता है। इस विपरीत राजयोग के शुभ प्रभाव से जातक को यश, सुख, धन-दौलत, भूमि, भवन और वाहन का अपार सुख मिलता है। फलित ज्योतिष शास्त्र में विपरीत राजयोग तीन तरह के होते हैं। हर्ष विपरीत राजयोग, सरल विपरीत राजयोग और विमल विपरीत राजयोग।
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हर्ष विपरीत राजयोग 
हर्ष विपरीत राययोग का संबंध कुंडली के त्रिक भावों यानी छठे, आठवें और बारहवें भाव में बनता है। जब इन तीनों भाव के स्वामी एक -दूसरे के भाव में विराजमान होते हैं तो हर्ष विपरीत राजयोग बनता है। छठे भाव का स्वामी अगर छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो तो हर्ष विपरीत राजयोग बनता है। इसके अलावा अगर छठे घर में कोई पापी ग्रह विराजमान होता है जातक अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। ऐसा जातक बहुत धनवान, पराक्रमी और प्रभावशाली होता है। इन जातकों के शत्रु इन पर काफी भी हावी नहीं हो पाते हैं। 

विपरीत सरल राजयोग
जब किसी जातक की कुंडली में छठे या 12वें भाव का स्वामी 8वें भाव में हो या फिर 8वें भाव का स्वामी 6वें या 12 भाव में हो तो सरल विपरीत राजयोग बनता है। ऐसे जातक कठिन से कठिन परिस्थितियों में सफलता प्राप्त करता है। इस योग के बनने से जातक मेहनती और कठिनाईयों से परेशान नहीं होता है। यह अपने पराक्रम से धन और यश की प्राप्त करता है। 


विमल विपरीत राजयोग
जब किसी जातक की कुंडली में 6वें, 8वें या 12वें भावों के स्वामी 12वें भाव में हो या फिर 12वें भाव का स्वामी 6वें या 8वें भाव में हो तो विमल विपरीत राजयोग बनता है। इस राजयोग के बनने से व्यक्ति अपने जीवन में सुख और संपन्नता को प्राप्त करता है।

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