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Surya Grahan 2026: साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानिए कब, कहां और क्या भारत में दिखेगा ग्रहण का दुर्लभ नजारा ?
Thu, 11 Jun 2026 09:43 AM IST
Vinod Shukla
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Thu, 11 Jun 2026 09:43 AM IST
सार
Surya Grahan 2026: 12 अगस्त 2026 को वर्ष 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा और काफी लंबा चलेगा। आइए जानते हैं इस ग्रहण के बारे में सभी जानकारी।
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सूर्य ग्रहण 2026
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण की घटना को हमेशा से खगोल विज्ञान और धार्मिक नजरिए से खास माना जाता रहा है। 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इससे पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी के महीने में लगा था। हिंदू पंचांग के अनुसार यह सूर्य ग्रहण श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगेगा। यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा जहां पर गुरु भी मौजूद होंगे। आइए जानते हैं साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की हर एक जानकारी।
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब ?
पंचांग गणना के अनुसार, साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। इस सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात करीब 09 बजकर 4 मिनट से होगी, जिसका समापन 13 अगस्त को सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा।
कैसा रहेगा सूर्य ग्रहण
12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। यह ग्रहण काफी लंबा चलेगा।
सूर्य ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ?
पंचांग गणना के अनुसार, साल का यह दूसरा सूर्य ग्रहण कर्क राशि में रहेगा। इस दौरान सूर्य कर्क राशि में संचरण कर रहे होंगे। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं और इस दौरान देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में मौजूद होंगे। कर्क राशि में देवगुरु बृहस्पति उच्च के होते हैं। वहीं अगर नक्षत्र की बात करे तो सूर्य ग्रहण के दौरान अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
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कब लगता है सूर्य ग्रहण ?
हिंदू धर्म में ग्रहण की घटना को बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है। सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों ही एक लाइन में आ जाते हैं यानी सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है। ऐसे में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है। 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। जिसमें सूर्य रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई देगा।
साल 2026 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा, क्योंकि ग्रहण भारतीय समयानुसार रात में शुरू होगा जिसके कारण इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
सूतक काल मान्य होगा या नहीं
हिंदू धर्म में ग्रहण की घटना को अशुभ माना जाता है। ग्रहण के लगने के कुछ घंटों पहले तक सूतक काल शुरू हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य ग्रहण लगता है तो उसके आरंभ होने के करीब 12 घंटे पहले से सूतक काल लग जाता है। सूतक काल के समय को अच्छा नहीं माना जाता है। सूतक में किसी भी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। पूजा-पाठ करना वर्जित होता है। यह सूतककाल ग्रहण के समापन तक चलता है। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके दोबारा से मंदिर खोला जाता है। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां-कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण
भारत में रात होने की वजह से साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। इस वलयाकार सूर्य ग्रहण को यूरोप के कई देशों, अटलांटिक महासागर और रूस के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब ?
पंचांग गणना के अनुसार, साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। इस सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात करीब 09 बजकर 4 मिनट से होगी, जिसका समापन 13 अगस्त को सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा।
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कैसा रहेगा सूर्य ग्रहण
12 अगस्त को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। यह ग्रहण काफी लंबा चलेगा।
सूर्य ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ?
पंचांग गणना के अनुसार, साल का यह दूसरा सूर्य ग्रहण कर्क राशि में रहेगा। इस दौरान सूर्य कर्क राशि में संचरण कर रहे होंगे। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं और इस दौरान देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में मौजूद होंगे। कर्क राशि में देवगुरु बृहस्पति उच्च के होते हैं। वहीं अगर नक्षत्र की बात करे तो सूर्य ग्रहण के दौरान अश्लेषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
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कब लगता है सूर्य ग्रहण ?
हिंदू धर्म में ग्रहण की घटना को बहुत अच्छा नहीं माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या तिथि पर ही लगता है। सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों ही एक लाइन में आ जाते हैं यानी सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है। ऐसे में चंद्रमा की परछाई पृथ्वी पर पड़ती है। 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह सूर्य ग्रहण एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। जिसमें सूर्य रिंग ऑफ फायर के रूप में दिखाई देगा।
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सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं ?साल 2026 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा, क्योंकि ग्रहण भारतीय समयानुसार रात में शुरू होगा जिसके कारण इसे भारत में नहीं देखा जा सकेगा।
सूतक काल मान्य होगा या नहीं
हिंदू धर्म में ग्रहण की घटना को अशुभ माना जाता है। ग्रहण के लगने के कुछ घंटों पहले तक सूतक काल शुरू हो जाता है। शास्त्रों के अनुसार जब सूर्य ग्रहण लगता है तो उसके आरंभ होने के करीब 12 घंटे पहले से सूतक काल लग जाता है। सूतक काल के समय को अच्छा नहीं माना जाता है। सूतक में किसी भी तरह के मांगलिक और शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इस दौरान मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। पूजा-पाठ करना वर्जित होता है। यह सूतककाल ग्रहण के समापन तक चलता है। ग्रहण की समाप्ति के बाद स्नान और पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करके दोबारा से मंदिर खोला जाता है। लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा जिसके कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां-कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण
भारत में रात होने की वजह से साल का यह आखिरी सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा। इस वलयाकार सूर्य ग्रहण को यूरोप के कई देशों, अटलांटिक महासागर और रूस के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।