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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Surya Abhishek Ramanavami 2024 Role and Importance of Sun in Astrology

सूर्य का ज्योतिष में क्या महत्व है? जानें सूर्य से प्रभावित होने वाले पहलुओं के बारे में

Sat, 13 Apr 2024 01:23 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 13 Apr 2024 01:23 PM IST
सार

सूर्य आत्मा , इच्छाशक्ति, अधिकार, नेतृत्व गुण, पिता या पिता के तुल्य, और सरकार या उच्च पदों का प्रतिनिधित्व करता है। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

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Surya Abhishek Ramanavami 2024 Role and Importance of Sun in Astrology
सूर्य का ज्योतिषीय महत्व - फोटो : amar ujala

विस्तार

Significance Of Sun In Vedic Astrology: 17 अप्रैल को रामनवमी  के दिन अयोध्या में रामलला के भव्य जन्मोत्सव की तैयारी के साथ रामलला का सूर्याभिषेक किया जाएगा। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय पिंडों में से एक माना जाता है। सूर्य आत्मा , इच्छाशक्ति, अधिकार, नेतृत्व गुण, पिता या पिता के तुल्य, और सरकार या उच्च पदों का प्रतिनिधित्व करता है। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जीवन में कुछ ऐसे पहलू भी हैं जिस पर सूर्य की स्थिति का भी प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं विस्तार से। 

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व्यक्तित्व: सूर्य की राशि और घर की स्थिति किसी व्यक्ति के मूल व्यक्तित्व गुणों और उनके आत्म-बोध में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
स्वास्थ्य: सूर्य जीवन शक्ति और समग्र स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है। अच्छी स्थिति में स्थित सूर्य अच्छे स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर का संकेत दे सकता है।
करियर: सूर्य की स्थिति करियर के ऐसे रास्ते सुझा सकती है जो सफलता की ओर ले जा सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जिनमें नेतृत्व, जनता का ध्यान या सरकारी सेवा की आवश्यकता होती है।
स्थिति और प्रसिद्धि: स्थिति के कारक के रूप में, एक मजबूत सूर्य प्रसिद्धि, समाज में सम्मान और उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान कर सकता है।
पिता से संबंध: यह किसी के अपने पिता या महत्वपूर्ण पुरुष गुरुओं के साथ संबंध का प्रतिनिधित्व करता है; इसका स्थान इस रिश्ते की प्रकृति का संकेत दे सकता है।
सरकारी प्रभाव: सांसारिक ज्योतिष (विश्व की घटनाओं से निपटने वाली शाखा) में, सूर्य नेताओं और सरकारों से जुड़ा है।
आध्यात्मिक विकास: सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसकी ताकत और पहलू किसी व्यक्ति के आध्यात्मिक झुकाव और आत्मज्ञान की क्षमता का भी संकेत दे सकते हैं।
 
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ग्रहों का राजा है सूर्य 
सूर्य देव को ग्रहों के अधिपति का स्थान प्राप्त है।  कुंडली में सूर्यदेव पंचम स्थान के स्वामी है और साथ ही सिंह राशि का स्वामित्व भी इन्हें प्राप्त है। सभी ग्रहों में सूर्य और चंद्रमा दो ही ऐसे ग्रह हैं जिन्हें 1-1 राशि का स्वामित्व मिला हुआ है। अन्य सभी ग्रहों के पास 2 राशियां हैं।  जहां सूर्यदेव स्व राशि सिंह में मूल त्रिकोण में होते हैं वहीं मेष राशि में उच्च के और तुला राशि में नीच के होते हैं। 

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उच्च और नीच राशि का अर्थ 
फलित ज्योतिष में  हर ग्रह की उच्च और नीच राशि होती है। जन्म के समय अगर ग्रह उच्च राशि में हो तो वो आपके कारक का शुभ फल करेगा वही जिस भाव का स्वामी होगा उसकी वृद्धि होगी। लेकिन अगर जन्म के समय ग्रह नीच राशि में है तो वो अपने कारक और भाव की हानि करेगा। 

नक्षत्र और सूर्य 
मेष राशि में  कृतिका नक्षत्र के प्रथम चरण, वृषभ राशि में 2,3,4 चरण, सिंह राशि में उत्तरा फाल्गुनी का प्रथम चरण, कन्या राशि में 2,3,4 चरण और धनु राशि में उत्तराषाढ़ा के प्रथम चरण और मकर राशि में उत्तराषाढ़ा के 2,3,4 चरण पर सूर्य देव का आधिपत्य है। यानी जो भी जातक इन नक्षत्रों में पैदा होगा उनका स्वामी सूर्य होगा। उसे सूर्य की महादशा प्राप्त होगी। सूर्य जन्म कुंडली में जिस भी स्थिति में बैठा होगा जातक उस गुण को ग्रहण करेगा और उसी हिसाब से उसका व्यक्तित्व होगा।

सूर्य के मजबूत और कमजोर होने का जीवन पर प्रभाव 
सूर्य को लग्न का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में 12 भाव से जातकों के प्रश्नों पर विचार किया जाता है। इसमें लग्न भाव से जातक की मानसिकता, व्यक्तित्व ,सम्मान, ऊर्जा, आत्म-विश्वास, आशा,सांसारिक मामलों में सफलता आदि का विचार किया जाता है। 12 लग्न भाव की कुंडली में पहले भाव से लेकर 12वें भाव तक सूर्य किसी एक भाव का स्वामी होगा।  यदि सूर्य मजबूत स्थिति में है तो वो उस भाव के फलो में वृद्धि करेगा। साथ ही उपरोक्त दी गए कारकों की भी वृद्धि करेगा। प्रशासनिक अधिकारी, मंत्री जैसे पद भी सूर्य के मजबूत स्थिति में होने से प्राप्त होते हैं। 
अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में है तो वो जिस भाव का स्वामी है उसके फल में कमी करेगा वही जिस लग्न का कारक है तो उसके गुणों में कमी करेगा। आम तौर पर कमजोर सूर्य के प्रभाव से जातक उदास, विश्वासहीन, ईर्ष्यालु, क्रोधी, अहंकारी, महत्वाकांक्षी, आत्म केंद्रित, क्रोधी बनता है। सूर्य आत्मकारक ग्रह होता है, इसके कमजोर होने से जातक आत्मविश्वासी नहीं होता है।

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