{"_id":"6874c00ef9b59bac790ab7ea","slug":"saturn-transit-2025-shani-vakri-for-138-days-know-effect-on-gemini-zodiac-signs-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shani Vakri 2025: मीन राशि में शनि हुए वक्री, जानें मिथुन राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
Shani Vakri 2025: मीन राशि में शनि हुए वक्री, जानें मिथुन राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव
Tue, 15 Jul 2025 11:28 AM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 15 Jul 2025 11:28 AM IST
सार
Shani Vakri 2025: मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली के आठवें और नवें भाव के स्वामी माने जाते हैं और अब जब मीन राशि में रहते हुए यह आपके दशम भाव में वक्री हो रहे हैं।
विज्ञापन
मीन राशि में हुए शनि हुए वक्री
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Shani Vakri 2025: न्यायकारक और कर्मफलदाता शनि अब 13 जुलाई से मीन राशि में गोचर करते हुए वक्री हो गए हैं। शनिदेव जो सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं वे 138 दिनों तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे। 28 नवंबर को शनि वक्री से मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष में ग्रहों के वक्री होने का मतलब पीछे की ओर चलने से जबकि मार्गी होने का मतलब आगे की ओर चलना होता है। आइए जानते हैं शनि के मीन राशि में रहते हुए वक्री होना मिथुन राशि वालों के लिए कैसा रहेगा आइए जानते हैं।
Shani Vakri: शनि हुए वक्री, इन राशियों के दिन फिरेंगे और मिलेगी हर काम में सफलता
मिथुन राशि पर शनि के वक्री का प्रभाव
मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली के आठवें और नवें भाव के स्वामी माने जाते हैं और अब जब मीन राशि में रहते हुए यह आपके दशम भाव में वक्री हो रहे हैं। दशम भाव में शनि का गोचर आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता है। मिथुन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना आपको मिले-जुले परिणाम दे सकता है। शनि का मीन राशि में वक्री होने से आपको कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा। कार्यो में गति पहले की तरह ही धीमी रहेगी। दशम में भाव में शनि के होने से यह आपके व्यापार और नौकरी में बाधाएं पहुंचने वाला होता है। इस दौरान आपको सामाजिक मान-सम्मान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
विज्ञापन
Mangal Gochar: कन्या राशि में मंगल का गोचर, इन राशियों को मिलेगा धन और सफलता का वरदान
ज्योतिष में शनि ग्रह
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है।
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होत है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं।
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं।
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और औजारों के कारक ग्रह होते हैं। शनिदेव अनुराधा, पुष्य और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं।
विज्ञापन
Shani Vakri: शनि हुए वक्री, इन राशियों के दिन फिरेंगे और मिलेगी हर काम में सफलता
विज्ञापन
मिथुन राशि पर शनि के वक्री का प्रभाव
मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि ग्रह आपकी कुंडली के आठवें और नवें भाव के स्वामी माने जाते हैं और अब जब मीन राशि में रहते हुए यह आपके दशम भाव में वक्री हो रहे हैं। दशम भाव में शनि का गोचर आमतौर पर अच्छा नहीं माना जाता है। मिथुन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना आपको मिले-जुले परिणाम दे सकता है। शनि का मीन राशि में वक्री होने से आपको कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा। कार्यो में गति पहले की तरह ही धीमी रहेगी। दशम में भाव में शनि के होने से यह आपके व्यापार और नौकरी में बाधाएं पहुंचने वाला होता है। इस दौरान आपको सामाजिक मान-सम्मान में गिरावट देखने को मिल सकती है।
विज्ञापन
Mangal Gochar: कन्या राशि में मंगल का गोचर, इन राशियों को मिलेगा धन और सफलता का वरदान
ज्योतिष में शनि ग्रह
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है।
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होत है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं।
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं।
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और औजारों के कारक ग्रह होते हैं। शनिदेव अनुराधा, पुष्य और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन