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Ram Mandir Pran Pratishtha: किस मुहूर्त में होगी प्राण प्रतिष्ठा? जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

Mon, 22 Jan 2024 10:46 AM IST
श्वेता सिंह पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
पं.मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 22 Jan 2024 10:46 AM IST
सार

हिंदू पंचांग के अनुसार  रामलला की मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा देने के लिए 22 जनवरी' 2024 पौस माह के द्वादशी तिथि को अभिजीत मुहूर्त, इंद्र योग, मृगशिरा नक्षत्र, मेष लग्न एवं वृश्चिक नवांश को चुना गया है जो दिन के 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड तक अर्थात 84 सेकंड का होगा।

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Ram Mandir Pran Pratishtha Muhurat time ayodhya ramlala pran pratishtha in hindi
किस मुहूर्त में होगी प्राण प्रतिष्ठा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Ram Mandir Pran Pratishtha: श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का अद्भुत,अलौकिक, बहुप्रतीक्षित,अद्भुत पल जिसकी प्रतीक्षा में पांच सौ वर्षों का इंतजार जिसमें पीढ़ियां खप गई, असंख्य बलिदान हुए। हम सब बहुत सौभाग्यशाली हैं जो इस अद्भुत अवसर के साक्षी हैं, प्रभु श्रीराम के कृपा पात्र हैं।  आम जनमानस के मन में यह प्रश्न आता है कि जो जगत के नियंता हैं, ईश्वर हैं उनकी मूर्ति में आखिर प्राण प्रतिष्ठा की जरूरत क्या है। हम मनुष्यों में ऐसी क्षमता और सामर्थ्य कहां है जो ईश्वर की प्रतिमा में प्राण प्रतिष्ठा दे पाएं। लेकिन ईश्वरीय प्रेरणा से शास्त्रों में प्राण प्रतिष्ठा का विधान बना हुआ है। इस विधान के अनुसार हम अपने ईश्वर की प्रतिमा को अपने जैसा प्राणवान बनाना चाहते हैं, उनसे अभिन्न संबंध स्थापित करना चाहते हैं, उनके अति निकट होना चाहते हैं, उनको अपने साथ अपने ही लोक में रखना चाहते हैं, उनके स्पंदन से स्वयं स्पंदित होना चाहते हैं। इसलिए ही मूर्ति की स्थापना के आरंभ में स्वयं द्वारा निर्मित मूर्ति में प्राण की प्रतिष्ठा दी जाती है। 
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प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ
प्राण प्रतिष्ठा का अर्थ है 'जीवन शक्ति की स्थापना' या 'देवता को जीवन में लाना' है, और यह एक अनुष्ठान है जो एक देवता को एक मूर्ति में आह्वान करने, उसे एक पवित्र और दिव्य इकाई में बदलने के लिए किया जाता है। एक बार जब प्राण प्रतिष्ठा पूरी हो जाती है, तो मूर्ति एक देवता में बदल जाती है जो प्रार्थना स्वीकार कर सकती है और उपासकों को आशीर्वाद दे सकती है।
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रामलला की मूर्ति का मुहूर्त 
हिंदू पंचांग के अनुसार  रामलला की मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा देने के लिए 22 जनवरी' 2024 पौस माह के द्वादशी तिथि को अभिजीत मुहूर्त, इंद्र योग, मृगशिरा नक्षत्र, मेष लग्न एवं वृश्चिक नवांश को चुना गया है जो दिन के 12 बजकर 29 मिनट और 08 सेकंड से 12 बजकर 30 मिनट और 32 सेकंड तक अर्थात 84 सेकंड का होगा। इसी समय में प्रभु श्रीराम की मूर्ति को प्राण प्रतिष्ठा दी जाएगी।  उस वक्त अयोध्या के आकाश में मेष लग्न का उदय हो रहा है, जो 12 बजकर 45 मिनट तक चलने वाला है। 
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क्या कहता है ज्योतिषशास्त्र
मेष लग्न में धर्म और दुनिया के सारे मंदिरों के अधिष्ठाता और शुभ मांगलिक प्रसंग के रचयिता, देवों के आचार्य बृहस्पति का उदय हो रहा है मतलब लग्न में ही गुरु बैठा है और वो गुरु उच्च नवांश में एकदम बलवान हैं। गुरु ग्रह खुद नवम स्थान और बारहवें स्थान का मालिक हैं, मतलब धर्म स्थान और मोक्ष स्थान के मालिक हैं। ईश्वर की इच्छा के बिना ऐसा मुहूर्त नहीं निकलता है। 
इस लग्न के ऊपर और गुरु के ऊपर बहुत ही बलवान शनि की दृष्टि भी पड़ रही है। शनि और गुरु नवांश कुंडली में भी प्रबल होकर आमने-सामने बैठे हैं। इन दोनों का जब भी संबंध होता है तो ब्रह्मांड में आध्यात्मिक चेतना अपनी उच्च सीमा पर रहती है। शनि भी इस कुंडली में कर्म स्थान का और लाभ स्थान का अधिपति भी बन रहा है। शनि की कृपा के बिना इतना बड़ा प्रसंग कभी नहीं बनता क्योंकि शनि मोक्ष स्थान का कारक भी हैं, ईश्वरके साक्षात्कार का ग्रह भी है और न्याय का देवता भी है।

भगवान रामजी की प्राण प्रतिष्ठा की कुंडली बहुत ही अच्छी बनी है और इस समय आकाश में उच्च नवांशका गुरु और मकर नवांश का शनि एक दूसरे के साथ संबंध कर रहे हैं तो आध्यात्मिक चेतना अपनी चरम सीमा पर है।  इसका संकेत यह भी मिलता है कि आगे जाकर दस वर्षो में भारत में बहुत बड़ा परिवर्तन आने वाला है और भारत पुनः विश्वगुरु के रूप स्थापित होने वाला है। अयोध्या में राममंदिर का निर्माण भारत की सांस्कृतिक पहचान, प्रतिष्ठा और परंपरा को पूरी प्रामाणिकता के साथ विराजित करने का ऐसा अतुलनीय और अविस्मरणीय कार्य है,जो इस ब्रह्माण्ड के अस्तित्व रहने तक गौरव का बोध कराता रहेगा।
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