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सोमवार से राज पंचक शुरू, जानिए क्या होता है पंचक और इसके शुभ-अशुभ परिणाम
ज्योतिष डेस्क,अमर उजाला
Updated Mon, 02 Jul 2018 09:59 AM IST
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सोमवार, 2 जुलाई से पंचक शुरू हो चुका है। यह 5 दिनों तक चलेगा और 6 जुलाई, शुक्रवार की रात तक रहेगा। सोमवार को होने से यह राज पंचक कहलाता है। आइए जानते हैं कितने प्रकार के होते हैं पंचक और क्यों नहीं किया जाता कोई शुभ कार्य।
हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू से पहले मुहूर्त देखा जाता है। बिना मुहूर्त देखे काम की शुरुआत करने से मनचाहा फल नहीं मिलता है। शास्त्रों के अनुसार पंचक को अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक 5 खास नक्षत्र में लगता है जो कि धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। जिसमें कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है।
ज्योतिष के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। सोमवार से शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहते हैं।
वहीं अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है।
जो पंचक मंगलवार को शुरू हो उसे अग्नि पंचक कहते है इस दौरान आग लगने का भय रहता है। इस दौरान औजारों की खरीदारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए।
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इसके अलावा मृत्यु पंचक और चोर पंचक होता है। मृत्यु पंचक शनिवार और चोर पंचक शुक्रवार को होता है। दोनो काफी घातक और अशुभ पंचक माने जाते हैं।
कुछ नक्षत्रों में पंचक लगने पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। पंचक को भले ही शुभ नहीं माना जाता हो, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।
पंचक में 5 काम नहीं करना चाहिए
- पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
- पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।
- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
- पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए।
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हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को शुरू से पहले मुहूर्त देखा जाता है। बिना मुहूर्त देखे काम की शुरुआत करने से मनचाहा फल नहीं मिलता है। शास्त्रों के अनुसार पंचक को अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक 5 खास नक्षत्र में लगता है जो कि धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। जिसमें कोई भी शुभ काम करने की मनाही होती है।
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ज्योतिष के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। सोमवार से शुरू होने वाले पंचक को राज पंचक कहते हैं।
वहीं अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है।
जो पंचक मंगलवार को शुरू हो उसे अग्नि पंचक कहते है इस दौरान आग लगने का भय रहता है। इस दौरान औजारों की खरीदारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए।
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इसके अलावा मृत्यु पंचक और चोर पंचक होता है। मृत्यु पंचक शनिवार और चोर पंचक शुक्रवार को होता है। दोनो काफी घातक और अशुभ पंचक माने जाते हैं।
कुछ नक्षत्रों में पंचक लगने पर शुभ कार्य किए जा सकते हैं। पंचक में आने वाला उत्तराभाद्रपद नक्षत्र वार के साथ मिलकर सर्वार्थसिद्धि योग बनाता है, वहीं धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र यात्रा, व्यापार, मुंडन आदि शुभ कार्यों में श्रेष्ठ माने गए हैं। पंचक को भले ही शुभ नहीं माना जाता हो, लेकिन इस दौरान सगाई, विवाह आदि शुभ कार्य भी किए जाते हैं।
पंचक में 5 काम नहीं करना चाहिए
- पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
- पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।
- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
- पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए।