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Kundli 3rd house: जानिए कुंडली के तीसरे भाव का महत्व और सभी ग्रहों का फलादेश

सार

कुंडली के तृतीय स्थान को पराक्रम और भातृभाव कहते हैं। कुंडली के इस भाव से जातक के साहस, पराक्रम और भाई-बहनों के बारे में जानकारी मिलती है।

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कुंडली के तीसरे भाव का महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुंडली का तीसरा भाव

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जन्म कुंडली के तृतीय स्थान को पराक्रम और भातृभाव कहते हैं। कुंडली के इस भाव से जातक के साहस, पराक्रम और भाई-बहनों के बारे में जानकारी मिलती है। कुंडली के तीसरे भाव से यात्रा, मानसिक बुद्धिमत्ता का होता है। यह भाव जातक के शुरुआती जीवन जैसे भाई-बहन, प्राथमिक विद्यालय, पड़ोसी से संबंधित होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के तीसरे भाव का विशेष महत्व होता है। कुंडली के तीसरे भाव को सहज भाव के नाम से भी जाना जाता है।  कुंडली के तीसरे भाव से शरीर के अंगों में गर्दन, हाथ, कंधे, छाती का ऊपरी हिस्सा का विचार किया जाता है। कुंडली के तीसरे भाव से खेल-कूद, मौज-मस्ती और उत्तेजक गतिविधियों और शुरुआती चीजों को सीखने से संबंधित होती है। अगर किसी जातक की कुंडली के इस भाव में उग्र और क्रूर ग्रह जैसे मंगल या सूर्य स्थित हो तो जातक बहुत ही साहसी, उत्तेजक, रिस्क लेने वाला, पराक्रमी, महत्वाकांक्षी और यशस्वी होता है। काल पुरुष कुंडली में तृतीय भाव पर मिथुन राशि का स्वामित्व होता है और स्वामी बुध ग्रह होते हैं।

कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य का फल
कुंडली के तीसरे घर में सूर्य के होने से जातक पराक्रमी और आत्मविश्वास से भरा होता है। सूर्य के कुंडली के तीसरे भाव में बैठने से व्यक्ति के अंदर एक विशेष प्रकार का आकर्षण होता है। ऐसा व्यक्ति बलशाली और समाज में प्रतिष्ठावान होता है। लेकिन कुंडली के इस भाव में सूर्य के होने से भाईयों से सुख में कमी करता है। ऐसा व्यक्ति विज्ञान और गणित के विषयों में अच्छा होता है। इस भाव में सूर्य के विराजमान होने पर जातक शिक्षक बन सकता है। 
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कुंडली के तीसरे भाव में चंद्रमा का फल
कुंडली के सहज भाव यानी तीसरे भाव में चंद्रमा के विराजमान होने पर यह जातक के लिए अच्छा माना जाता है। ऐसा व्यक्ति कल्पनाशील, बुद्धिमान और रचनात्मकता से परिपूर्ण होता है। इस भाव में चंद्रमा के होने से भाई-बहनों के साथ अच्छा प्रेम और लगाव होता है। चंद्रमा के इस भाव में होने से व्यक्ति नई-नई जगहों की यात्रा करता है। इस तरह का जातक पैसों की बचत करता है। 
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कुंडली के तीसरे भाव में मंगल का फल
कुंडली का तीसरा भाव साहस और वीरता का प्रतिनिधित्व करता है और मंगल ग्रह साहस, रक्त और ऊर्जा का कारक ग्रह होता है। मंगल उग्र स्वभाव का ग्रह होता है। ऐसे में मंगल के इस भाव में स्थित होने पर जातक काफी ऊर्जावान होता है। इस भाव में मंगल के होने से जातक को अपनी ऊर्जा का सही प्रयोग करना चाहिए नहीं तो इसका विपरीत असर होता है। कुंडली के इस भाव में मंगल के होने पर भाई-बहनों के साथ कुछ परेशानियां आ सकती है। इससे छोटे भाई के सुख में कमी आ सकती है। 

कुंडली के तीसरे भाव में बुध का फल
कुंडली के तीसरे भाव में बुध के स्थित होने पर जातक धार्मिक और यशस्वी व्यक्ति होता है। जातक बुद्धिमान और विनम्र होता है। भाई-बहनों से सुख मिलता है और सहयोगी-दोस्तों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसा व्यक्ति बातचीत में बहुत ही माहिर होता है। 

कुंडली के तीसरे भाव में गुरु का फल
तीसरे भाव में देवगुरु के होने का जातक को अच्छा फल प्राप्त होता है। जातक मानसिक रूप से बहुत मजबूत और किसी भी काम को बहुत ही आसानी के साथ करने में सक्षम होता है। गुरु के इस भाव में होने से जातक की शुरुआती शिक्षा बहुत अच्छी होती है। भाई-बहनों के साथ संबंध मधुर होता है। सरकार या संस्था की तरफ से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। 

कुंडली के तीसरे भाव में शुक्र का फल
कुंडली के तीसरे भाव में शुक्र का प्रभाव आपके लिए अच्छा होता है। ऐसे व्यक्ति व्यवहार कुशल और उत्साह से भरे रहते हैं। इन्हे घूमना-फिरना बहुत ही पसंद होता है। इस तरह के लोग कई भाषाओं और कलाओं में निपुण होते हैं। भाई-बहनों की संख्या ज्यादा होती है लेकिन संतान की संख्या कम होती है। शुक्र के इस भाव में होने से व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है और सुखी जीवन व्यतीत करता है। 

कुंडली के तीसरे भाव में शनि का फल
इस भाव में शनि के विराजमान होने पर व्यक्ति न्यायप्रिय और चतुर होता है। इस भाव में शनि के होने पर व्यक्ति अच्छी सलाह देने वाला होता है। लेकिन शिक्षा में व्यवधान आ सकता है। कुंडली के तीसरे भाव में शनि के होने पर जातक को संचार करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति निरोगी और कम बोलने वाला हो सकता है। 

कुंडली के तीसरे भाव में राहु का फल
तृतीय भाव में राहु के होने से व्यक्ति बहुत ही प्रभावशाली,साहसी और महान पराक्रमी होता है। राहु के इस भाव में होने से व्यक्ति को भाग्य का अच्छा साथ मिलता है। आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। यह कम प्रयासों में ज्यादा से ज्यादा से लाभ की प्राप्ति करने में सफल होता है।


कुंडली के तीसरे भाव में केतु का फल
इस भाव में केतु के होने पर भाई-बहनों से संबंध अच्छे नहीं होते हैं। ऐसे लोग अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं। ऐसे लोग को अनजाना भय रहता है। ऐसे जातक बेवजह की चिंताओं से धिरे रहते हैं।

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