फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   kundli ka second house 2nd house in kundli meaning kundali ka second bhav

Kundli 2nd house: जानिए कुंडली के दूसरे भाव का महत्व और फल

सार

कुंडली के दूसरे भाव को धन भाव के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा कुंडली दूसरे भाव से दाहिनी आंख, चेहरा, बोलने की क्षमता जीभ और नाक का विचार किया जाता है। कुंडली का द्वितीय भाव मारक भाव भी होता है। 

विज्ञापन
kundli ka second house 2nd house in kundli meaning kundali ka second bhav
कुंडली का दूसरा भाव धन का माना जाता है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Kundli 2nd house: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली से व्यक्ति के जीवन के हर एक पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। कुंडली के सभी 12 में से हर एक भाव का अपना महत्व होता है, जो जीवन के हर क्षेत्र के बारे में हमें जानकारी मिलती है। कुंडली के पहले भाव से जहां जातक के शरीर, स्वभाव, व्यक्तित्व, क्षमताओं, रंग-रूप और शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग जैसे सिर का विचार करते हैं, तो वहीं कुंडली के दूसरे भाव से जातक के परिवार, वाणी और धन के बारे में विचार किया जाता है। कुंडली के दूसरे भाव को धन भाव के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा कुंडली दूसरे भाव से दाहिनी आंख, चेहरा, बोलने की क्षमता जीभ और नाक का विचार किया जाता है। कुंडली का द्वितीय भाव मारक भाव भी होता है। 

विज्ञापन
  • कुंडली के दूसरे भाव का संबंध धन से होता है। कुंडली का अगर दूसरा भाव मजबूत होता तो जातक के जीवन में धन की कमी नहीं रहती है। जब इस भाव का संबंध गुरु से हो तो व्यक्ति धनवान होता है। कुंडली का दूसरा भाव अगर कमजोर होता है तो जातक तमाम तरह की आर्थिक समस्याओं से घिरा होता है। 
  • विज्ञापन
  • कुंडली का दूसरा भाव बचपन और किशोरावास्था से भी संबंध रखता है। कुंडली के दूसरे भाव से शुरुआती शिक्षा देखी जाती है। 
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • कुंडली का दूसरा भाव वाणी से होता है। अगर इस भाव में कोई क्रूर ग्रह या इस भाव के स्वामी पीड़ित हों तो व्यक्ति को बोलने में दिक्कतें आती हैं, वहीं अगर यह भाव मजबूत होता है तो जातक बोलने और भाषण देने में माहिर होता है। 
  • कालपुरुष की कुंडली में दूसरे भाव की राशि वृषभ होती है जबकि इस भाव का स्वामी शुक्र होते हैं।
  • द्वितीय भाव के कारक ग्रह देव गुरु बृहस्पति होते हैं। 
  • अगर कुंडली के दूसरे भाव का स्वामी यानी द्वितीयेश स्वग्रही, शुभ ग्रहों से दृष्टि या उच्च को होता है तो धन संबंधित मामलों में अच्छा माना गया है। 

कुंडली के दूसरे भाव में बैठे ग्रहों का फल

सूर्य- जब आपकी कुंडली के दूसरे भाव में आत्मा और पिता के कारक ग्रह सूर्य विराजमान हो तो जातक स्वयं से धन अर्जित करने में कामयाब होता है।
चंद्रमा- जब कुंडली के दूसरे भाव में चंद्रमा बैठा हो तो आपको परिवार के सदस्यों से धन लाभ होता है। 
मंगल - कुंडली के दूसरे भाव में भूमि पुत्र और सेनापति मंगलदेव तो जातक को अपने बड़े भाई से लाभ मिलता है। 
बुध- कुंडली के द्वितीय भाव में बुध बैठे हो तो आपकी वाणी मधुर होती और आप बोलने में माहिर होते हैं। 
गुरु- कुंडली के दूसरे भाव में गुरु बैठे होने पर जातक को अपने दादा या अपने गुरु की कृपा से धन अर्जित करता है। 
शुक्र- शुक्र ग्रह बैठने से आपको किसी स्त्री के द्वारा धन लाभ होता है। 
शनि- कुंडली के द्वितीय भाव में शनि बैठे हो तो व्यक्ति अपने कर्मचारियों के बदौलत खूब धन कमाता है।
राहु- इस भाव में अगर राहु बैठा हो तो व्यक्ति को अपने ससुराल या ननिहाल से अचानक धन लाभ होता है।
केतु- कुंडली के द्वितीय भाव में केतु बैठे हो तो जातक अपने पिता के कार्यों में हाथ बटाता है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed