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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Jyotish Upay Good and Bad Effects of Mangal Grah in Kundali News in Hindi

Astrology: ज्योतिष में मंगल ग्रह का महत्व और शुभ-अशुभ प्रभाव

Sun, 19 Feb 2023 11:14 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 19 Feb 2023 11:14 AM IST
सार

मंगल को सदैव अकेले रहना पसंद हैं। किसी ग्रह के साथ युति होने पर मंगल अपने कारक का फल प्रकट करने में समय लगा देता हैं।

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Jyotish Upay Good and Bad Effects of Mangal Grah in Kundali News in Hindi
ज्योतिष में मंगल ग्रह की भूमिका - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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  • वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण सूत्र है और वो है फलित विचार, दरअसल भविष्य में होने वाली किसी भी घटना के बारे में विचार करने को फलित विचार कहते हैं। फलित सूत्र में 9 ग्रह, 12 भाव और 27 नक्षत्रों से विचार किया जाता है। फलित में 9 ग्रह है, सूर्य ,चन्द्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि ये 7 मूल ग्रह माने गये हैं वहीं दो ग्रह राहु और केतु छाया ग्रह माने गए हैं। राहु-केतु सदैव एक दूसरे से सप्तम होते हैं और विपरीत यानी वक्री गति से ही चलते हैं तो आइए जानते हैं मंगल ग्रह के बारे में और साथ ही यह भी जानेंगे कि ज्योतिष में उसकी क्या उपयोगिता है।
  • दरअसल मंगल को ग्रहों में सेनापति कहा गया है और यह व्यक्ति के रक्त और साहस का कारक है। जीवन में ऊर्जा देने का काम मंगल ही करता है। मंगल को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी बनाया गया है। मेष राशि में मंगल बेहद बलवान कहे जाते हैं। इस राशि में वो मूल त्रिकोण कहलाते हैं वहीं वृश्चिक राशि में स्वराशि के होते हैं। तीसरे, छठे और एकादश भाव में विराजमान मंगल को बेहद बलवान कहा गया है। मंगल के नक्षत्रों की बात करें तो धनिष्ठा, मृगशिरा, चित्रा के ये स्वामी होते हैं। अगर उच्च और नीच राशि की बात की जाए तो मंगल शनि देव की राशि मकर में उच्च होते हैं वही जल तत्व राशि कर्क में नीच होते हैं। 
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  • वैदिक ज्योतिष के सूत्र के अनुसार ग्रह अपनी उच्च राशि में अपने कारक का अच्छा फल करते हैं और अपनी नीच राशि में कारक के फल में कमी कर देते हैं। मंगल एक पुरुष ग्रह है और इसके अंदर असीमित ऊर्जा है इसलिए बलवान मंगल के कारण जातक उच्च कोटि का सर्जन, सेना में मेजर, बड़ा जासूस और बड़ा अधिकारी बन सकता है। मंगल जमीन और अग्नि का भी कारक है इसलिए इससे जिनकी कुंडली में मंगल अच्छा होता है उनके पास बड़े रेस्टोरेंट, होटल और भूमि होती है। तकनीकी शिक्षा में भी मंगल सहयोग करता है। मंगल चंद्र, गुरु और बुध के साथ बेहद शुभ परिणाम देता है लेकिन सूर्य, राहु और शनि के साथ ये अशुभ हो जाता है। शुक्र के साथ मंगल चरित्र दोष देता है क्योंकि शुक्र तो भोग का कारक है और मंगल सेना का सेनापति है ऐसे में सेनापति का भोग विलास से क्या काम ?
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  • मंगल को सदैव अकेले रहना पसंद हैं। किसी ग्रह के साथ युति होने पर मंगल अपने कारक का फल प्रकट करने में समय लगा देता हैं। हालांकि दशम भाव में सूर्य मंगल राहु जातक को प्रधानमंत्री भी बना सकते हैं क्योंकि दशम भाव में मंगल सबसे अधिक बलवान होकर सबको साथ लेकर के चलते हैं। लग्न और सप्तम का मंगल जातक को अभिमान से भर देता है वहीं दूसरे और आठवें भाव का मंगल परिवार का सुख नहीं देता है। अगर मंगल के उपाय की बात की जाए तो मंगल स्तोत्र जाप और हनुमान जी की सेवा शुभ फल देने का काम करती है।
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