प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2019 की शाम 7:04 बजे एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण किया है। मोदी सरकार का यह दूसरा कार्यकाल है। जिस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शपथ ली, उस समय के ग्रहों की स्थिति का विवेचना करने पर उनके आगे के कार्यकाल की दशा—दशा स्पष्ट तौर पर निकल कर आती है।
जानें क्या कहते हैं मोदी सरकार के सितारे और पहले के मुकाबले कैसा रहेगा उनका दूसरा कार्यकाल
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सरकार के सामने पैदा होगी यह मुश्किल
प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के समय वृश्चिक लग्न उदित होगा। तदनुसार लग्न में गुरु विराजमान होगा और सप्तम भाव से सूर्य द्वारा दृष्ट होगा। जो एक मजबूत सरकार की आधारशिला तो तो बनाता ही है, परंतु तृतीयेश शनि का द्वितीय भाव में शुक्र के नक्षत्र का होकर केतु के साथ बैठना और शुक्र का छठे घर में खुद के नक्षत्र का मजबूत होना गुप्त और आंतरिक तौर पर विरोधियों का सूचक है। कहने का तात्पर्य है कि पिछली सरकार की तुलना में यह सरकार ज्यादा कठिनाइयों का सामना करेगी और गुप्त विरोधी सक्रिय होंगे| जो सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करेंगे।
संगठन का होगा कुछ ऐसा हाल
साथ ही यह भी निकलकर आ रहा है कि आने वाले समय में सरकार आंतरिक संगठनात्मक मजबूती भी कहीं न कहीं प्रभावित होगी। हालांकि लग्न में गुरु न्याय संगत सरकार की परिकल्पना का सूचक है। साथ ही साथ सूर्य की दृष्टि एक कुशल प्रशासनिक क्षमता की सूचक है।
इस तरह बढ़ेगी लोकप्रियता
यदि यहां 2014 के शपथ ग्रहण के समय की तुलना की जाए तो पिछला शपथ ग्रहण 26 मई 2014 को शाम 6:00 बजे हुआ था, जिसके अनुसार तुला लग्न उदित था। लग्नाधिति सप्तम भाव में काफी मजबूत स्थिति में लग्न को देख रहा था। साथ ही लग्न में उच्च का शनि काफी मजबूत स्थिति में विराजमान था और भाग्य स्थान में बुध के साथ गुरु का पाया जाना बड़ा ही सौभाग्यशाली योग बनता है। ऐसी स्थिति में शपथ ग्रहण तमाम कठिनाइयों के बावजूद भी काफी सफल कार्यकाल और लोकप्रियता का सूचक बना।
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सक्रिय रहेंगे विरोधी
लेकिन इस बार लग्नेश मंगल का अष्टम में राहु के साथ होना और द्वितीयस्थ शनि एवं षष्ठमस्थ शुक्र शनि से मूल त्रिकोण का होना आन्तरिक विरोध व कठिनाई का सूचक है। साथ ही साथ नवमांश वृश्चिक लग्न का बन रहा है और लग्न में शनि शुक्र एवं केतु मजबूत स्थिति में विराजमान है तथा चतुर्थ भाव में कुंभ राशि का मंगल कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा है। साथ ही साथ पंचम भाव में चंद्रमा अत्यधिक भावनात्मक प्रधानता का सूचक बनता है। ऐसी स्थिति में यह कहा जा सकता है कि यह मोदी सरकार पिछली सरकार की तुलना में कमजोर कही जाएगी और शायद उतने मजबूत फैसले लेने में असमर्थ रहे और अगर कुछ मजबूत फैसले लेती भी है, तो काफी विरोध तनाव तथा कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि इस सरकार में विरोधी ग्रह ज्यादा ही सक्रिय और मजबूत दिखाई दे रहे हैं।