Mars Retrograde in Pisces 2020: मंगल ग्रह क्यों है लाल, जानें इसका रहस्य
Mars Retrograde in Pisces: मंगल ग्रह 4 अक्तूबर को मीन राशि में वक्री हो रहे हैं और फिर 14 नवंबर को मार्गी होंगे। मंगल की वक्री चाल की अवधि कुल 48 दिनों की रहेगी। मीन राशि जल तत्व की राशि है और यह बृहस्पति द्वारा शासित है, बृहस्पति और मंगल आपस में मित्र हैं। मंगल की इस वक्री चाल का प्रभाव सभी राशियों पर पड़ेगा। मंगल देव साहस, पराक्रम, क्रोध और सैन्य शक्ति के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
मंगल ग्रह का रंग लाल है। यह लाल रंग का कारक भी है। इसलिए मंगल के दोष से बचने के लिए मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने का उपाय बताया जाता है। शास्त्रों में मंगल देव के लाल रंग के होने के पीछे की एक पौराणिक कथा का वर्णन मिलता है। जो इस प्रकार है..
पुराणों के अनुसार उज्जैन नगरी को मंगल की जननी कहा जाता है। यानी कि मंगल देव का जन्म यहीं हुआ था। मंगलनाथ मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसी मंदिर के ठीक ऊपर आकाश में मंगल ग्रह स्थित है। मत्स्यपुराण एवं स्कंदपुराण आदि में भी मंगल देव के संबंध में विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार उज्जैन में ही मंगल देव की उत्पत्ति हुई थी।
स्कंद पुराण के अवंतिका खंड के अनुसार अंधकासुर नामक दैत्य को शिवजी ने वरदान दिया था कि उसके रक्त से सैकड़ों दैत्य जन्म लेंगे। वरदान के बाद इस दैत्य ने अवंतिका में तबाही मचा दी। तब दीन-दुखियों ने शिवजी से प्रार्थना की। भक्तों के संकट दूर करने के लिए स्वयं शंभु ने अंधकासुर से युद्ध किया। दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ।
भीषण युद्ध में शिवजी का पसीना बहने लगा। रुद्र के पसीने की बूंद की गर्मी से उज्जैन की धरती फटकर दो भागों में विभक्त हो गई और मंगल ग्रह का जन्म हुआ। शिवजी ने दैत्य का संहार किया और उसकी रक्त की बूंदों को नव उत्पन्न मंगल ग्रह ने अपने अंदर समा लिया। कहते हैं इसलिए ही मंगल की धरती लाल रंग की है।