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ज्योतिष: नौ ग्रहों के नौ मंत्र, जप करने से दूर हो जाते हैं कुंडली के दोष
Sun, 03 May 2020 12:51 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 03 May 2020 12:51 PM IST
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मान-सम्मान, नौकरी और समृद्धिशाली जीवन जीने के लिए सूर्य देव की कृपा जरूरी होती है।
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मनुष्य का जीवन ग्रहों और नक्षत्रों की काल गणना और उनकी चाल पर निर्भर करता है। कुंडली में ग्रहों के शुभ स्थिति से शुभ फल की और अशुभ स्थिति होने पर अशुभ फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष में कुल नौ ग्रह हैं सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु जो व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करते हैं। कुंडली मे अगर कोई ग्रह अशुभ फल देते हैं तो उनसे बचने के लिए ग्रहों से संबंधित मंत्रों का जप करना चाहिए। ज्योतिष में नौ ग्रहों के मंत्रों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
सूर्य मंत्र - ऊँ सूर्याय नम:।
सूर्य मान-सम्मान और ऊर्जा का कारक ग्रह होता है। मान-सम्मान, नौकरी और समृद्धिशाली जीवन जीने के लिए सूर्य देव की कृपा जरूरी होती है।
चंद्र मंत्र - ऊँ सोमाय नम:।
कुंडली में चंद्र दोष होने से कलह, मानसिक विकार, माता-पिता की बीमारी, दुर्बलता, धन की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है।
मंगल मंत्र - ऊँ भौमाय नम:।
मंगल साहस और पराक्रम का कारक ग्रह है। कुंडली में मंगल के कमजोर होने पर उसके साहस और ऊर्जा में निरंतर कमी रहती है।
बुध मंत्र - ऊँ बुधाय नम:।
तरक्की और प्रसिद्धि पाने के लिए कुंडली में बुध का मजबूत होना आवश्यक है। बौद्धिक नजरिए से सबसे प्रबल ग्रह होता है।
गुरु मंत्र - ऊँ बृहस्पतये नम:।
वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याओं के लिए इस मंत्र का जप करना चाहिए। कुंडली में बृहस्पति के शुभ प्रभाव से धन लाभ, सुख-सुविधा, सौभाग्य, लंबी आयु आदि मिलता है।
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शुक्र मंत्र - ऊँ शुक्राय नम:।
कुंडली में शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर सभी तरह के ऐशो-आराम की सुविधा मिलती है।
शनि मंत्र - ऊँ शनैश्चराय नम:।
परेशानियों को दूर करने के लिए शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।
राहु मंत्र - ऊँ राहवे नम:।
तनाव को कम करने के लिए राहु मंत्र का जप करना चाहिए। कुंडली में यदि राहु अशुभ स्थिति में है तो व्यक्ति को आसानी से सफलता नहीं मिलती।
केतु मंत्र - ऊँ केतवे नम:।
कलह से बचने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
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सूर्य मंत्र - ऊँ सूर्याय नम:।
सूर्य मान-सम्मान और ऊर्जा का कारक ग्रह होता है। मान-सम्मान, नौकरी और समृद्धिशाली जीवन जीने के लिए सूर्य देव की कृपा जरूरी होती है।
चंद्र मंत्र - ऊँ सोमाय नम:।
कुंडली में चंद्र दोष होने से कलह, मानसिक विकार, माता-पिता की बीमारी, दुर्बलता, धन की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। चंद्रमा मन का कारक ग्रह होता है।
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मंगल मंत्र - ऊँ भौमाय नम:।
मंगल साहस और पराक्रम का कारक ग्रह है। कुंडली में मंगल के कमजोर होने पर उसके साहस और ऊर्जा में निरंतर कमी रहती है।
बुध मंत्र - ऊँ बुधाय नम:।
तरक्की और प्रसिद्धि पाने के लिए कुंडली में बुध का मजबूत होना आवश्यक है। बौद्धिक नजरिए से सबसे प्रबल ग्रह होता है।
गुरु मंत्र - ऊँ बृहस्पतये नम:।
वैवाहिक जीवन से जुड़ी समस्याओं के लिए इस मंत्र का जप करना चाहिए। कुंडली में बृहस्पति के शुभ प्रभाव से धन लाभ, सुख-सुविधा, सौभाग्य, लंबी आयु आदि मिलता है।
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शुक्र मंत्र - ऊँ शुक्राय नम:।
कुंडली में शुक्र ग्रह के मजबूत होने पर सभी तरह के ऐशो-आराम की सुविधा मिलती है।
शनि मंत्र - ऊँ शनैश्चराय नम:।
परेशानियों को दूर करने के लिए शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।
राहु मंत्र - ऊँ राहवे नम:।
तनाव को कम करने के लिए राहु मंत्र का जप करना चाहिए। कुंडली में यदि राहु अशुभ स्थिति में है तो व्यक्ति को आसानी से सफलता नहीं मिलती।
केतु मंत्र - ऊँ केतवे नम:।
कलह से बचने के लिए इस मंत्र का जाप करना चाहिए।