{"_id":"5e1d84f28ebc3e87cd195182","slug":"makar-sankranti-2020-surya-puja-mantra-benefits-and-rules","type":"story","status":"publish","title_hn":"Makar Sankranti 2020: सूर्यदेव को जल चढ़ाने के नियम, फायदे और मंत्र, जानें ऐसी 7 बातें","category":{"title":"Astrology","title_hn":"ज्योतिष","slug":"astrology"}}
Makar Sankranti 2020: सूर्यदेव को जल चढ़ाने के नियम, फायदे और मंत्र, जानें ऐसी 7 बातें
Tue, 14 Jan 2020 02:39 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 14 Jan 2020 02:39 PM IST
विज्ञापन
Makar Sankranti 2020
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में गोचर को मकर संक्रांति कहते हैं। माघ महीने में सूर्य के राशि परिवर्तन से सूर्य की स्थिति बदलती है। सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। शास्त्रों में सूर्य उपासना, सूर्य को जल देने और इससे होने वाले फायदों के बारे में विस्तार से बताया गया है। कुंडली में सूर्य की शुभ स्थिति से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। सूर्य को जल अर्पित करने के नियम
- ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक बताया गया है। नियमित सूर्य को जल देने से आत्म शुद्धि और आत्मबल प्राप्त होता है। सूर्य को जल देने से आरोग्य लाभ मिलता है।
- सूर्य को नियमित जल देने से सूर्य का प्रभाव शरीर में बढ़ता है और यह आपको ऊर्जावान बनाता है। कार्यक्षेत्र में आपको इसका लाभ मिलता है।
- जिनकी नौकरी में परेशानी चल रही हो तो नियमित रूप से सूर्य को जल देने से उच्चाधिकारी से सहयोग मिलता है और मुश्किलें दूर होती हैं।
- सूर्य को जल तांबे के बर्तन से अर्पित करना चाहिए।
- सूर्य को जल देने से पहले उसमें चावल, लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं।
- नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्। दिवाकरं रविं भानुं मार्तण्डं भास्करं भगम्।।
इन्द्रं विष्णुं हरिं हंसमर्कं लोकगुरुं विभुम्। त्रिनेत्रं त्र्यक्षरं त्र्यङ्गं त्रिमूर्तिं त्रिगतिं शुभम्।। - 12 सूर्य मंत्र
विज्ञापन
विज्ञापन
ॐ भास्कराय नम:।
ऊं रवये नम: ।
ऊं मित्राय नम: ।
ॐ भानवे नम:
ॐ खगय नम: ।
ॐ पुष्णे नम: ।
ॐ मारिचाये नम: ।
ॐ आदित्याय नम: ।
ॐ सावित्रे नम: ।
ॐ आर्काय नम: ।
ॐ हिरण्यगर्भाय नम: ।